बुद्धदेव भट्टाचार्य की सोच, उनका दर्शन, जीवन दर्शन, सांस्कृतिक अभ्यास और कलात्मक सोच—एक मानवतावादी और रवींद्रनाथ टैगोर के अनुरागी के रूप में उन्होंने नई पीढ़ी के लिए जिन विचारों की कल्पना की थी और जिन्हें भविष्य में साकार करने का प्रयास किया था, उन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए इस सांस्कृतिक केंद्र की शुरुआत की जाएगी।
बुद्धदेव भट्टाचार्य के नाम पर
'बुद्धदेव भट्टाचार्य कल्चरल सेंटर'
का काम शुरू

बुद्धदेव भट्टाचार्य की याद में आयोजित सभा के अवसर पर शनिवार को सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने बुद्धदेव भट्टाचार्य कल्चरल सेंटर (बीबीसीसी) का प्राथमिक चरण के तहत वर्चुअल सेंटर के रूप में उद्घाटन किया।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस वर्ष के अंत तक मुख्य केंद्र का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
मोहम्मद सलीम ने कहा कि बुद्धदेव भट्टाचार्य की सोच, उनका दर्शन, जीवन दर्शन, सांस्कृतिक अभ्यास और कलात्मक सोच—एक मानवतावादी और रवींद्रनाथ टैगोर के अनुरागी के रूप में उन्होंने नई पीढ़ी के लिए जिन विचारों की कल्पना की थी और जिन्हें भविष्य में साकार करने का प्रयास किया था, उन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए इस सांस्कृतिक केंद्र की शुरुआत की जाएगी।
इसके अलावा, उन्होंने संस्कृति और कला जगत के लोगों से इस केंद्र के संबंध में सुझाव भी मांगे। वर्तमान में इंटरनेट पर एक वेबसाइट के माध्यम से बुद्धदेव भट्टाचार्य की कविताएं, गीत, भाषण, लेख और अन्य सामग्रियां एकत्र करके एक संग्रह (आर्काइव) तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस केंद्र का उपयोग युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए किया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने आगे बताया कि इस केंद्र में एक स्टेट-ऑफ-द-आर्ट ऑडिटोरियम, डिजिटल नॉलेज लाइब्रेरी, बुक कैफे, ऑडियो-विजुअल आर्काइव सेंटर, सेमिनार रूम, कॉन्फ्रेंस रूम और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक आर्ट गैलरी बनाई जाएगी। राजनीतिक मैदान में उन्होंने जिस संघर्ष की बात सोची थी वह तो जारी रहेगी ही, साथ ही इस कल्चरल सेंटर के निर्माण के माध्यम से बुद्धदेव भट्टाचार्य ने जिस पश्चिम बंगाल को बनाने का सपना देखा था, उसे साकार करने का प्रयास हम जारी रखेंगे।
इसके अलावा, इस स्मरण सभा में एसएफआई के अखिल भारतीय महासचिव सृजन भट्टाचार्य ने शमशुर रहमान की कविता का पाठ किया, जबकि श्रीपांथो बोस और पायल कवि ने संगीत प्रस्तुत किया।
.
.
साभार: डिजिटल गणशक्ति
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...