कि गणतंत्र में
शासक को
सर्वज्ञ मान लेना
गणतंत्र के विनाश का
लक्षण है
जन समाचार मंच
कि गणतंत्र में
शासक को
सर्वज्ञ मान लेना
गणतंत्र के विनाश का
लक्षण है

जंबूद्वीप में
विगत कई बरसों से
जानलेवा
मज़ाक़ का दौर
चल रहा है
एक शख़्स
जो दुर्भाग्य से
मुल्क का
पर्याय बन चुका है
वह वैज्ञानिकों को
स्पेस साइंस सिखा रहा है
धर्माचार्यों को
धर्म सिखा रहा है
विद्यार्थियों को
पढ़ना सिखा रहा है
लेखकों को
लिखना सिखा रहा है
डॉक्टरों को
चिकित्सा सिखा रहा है
अर्थशास्त्रियों को
अर्थशास्त्र पढ़ा रहा है
प्रशासकों को
प्रशासन सिखा रहा है
शिक्षकों को
पढ़ाना सिखा रहा है
पत्रकारों को
पत्रकारिता सिखा रहा है
किसी को चरित्र
किसी को ज्ञान
किसी को विज्ञान
किसी को अध्यात्म
किसी को दर्शन
हद तो तब हो गई
जब वह
हवा और पानी को बहना
सूरज को जलना
सिखाने लगा
यानी
जब वह अपनी
धरती पर होता है
तब दिन में
बीस घंटे
सभी को
कुछ न कुछ
सिखा-पढ़ा रहा होता है
और मज़े की बात यह
कि उपरोक्त
किसी विषय का
उसे न्यूनतम
सामान्य ज्ञान
तक नहीं
यहां तक तो थी
सूचना
मज़ाक़
अब शुरू होता है
कि विगत कई बरसों से
ज़्यादातर लोग
उसे बड़ी गंभीरता से
सुन रहे हैं
गुन रहे हैं
(कुछ लोग हैं जो
सिर धुन रहे हैं)
यह जानते हुए
कि इसमें
मूर्खता के सिवा
कुछ भी नहीं है
पर
सब एकाग्र होकर
सुन रहे हैं
और तब
चाणक्य ने कहा
कि जब शिक्षा से
अधिक राष्ट्रधन
राजमार्ग निर्माण पर
खर्च हो
तब राष्ट्रनिर्माण
एक छलावा बन जाता है
कि गणतंत्र में
शासक को
सर्वज्ञ मान लेना
गणतंत्र के विनाश का
लक्षण है
हमारे लिए
यह संतोषजनक है
कि जंबूद्वीप
हमसे बहुत दूर है
हमें ईश्वर का
शुक्रगुज़ार होना चाहिए
कि हम
जंबूद्वीप में नहीं हैं
- हूबनाथ
[लेखक परिचय: लगभग 20 पुस्तकों के अनुवाद एवं संपादन का काम कर चुके लेखक हूबनाथ 'बाजा', 'हमारी बेटी' और 'अंतर्ध्वनि' फिल्मों में संवाद लेखन कर चुके है। आपकी 'कौए', 'लोअर परेल', 'अकाल' व 'मिट्टी' नाम से काव्य संग्रह सहित 'ललित निबंध', 'सिनेमा समाज साहित्य' समेत अनेक किताबें प्रकाशित है। आप मुंबई में रहते है।]
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प्रकाशित: 10 अगस्त 2026 • 2 मिनट पठन

प्रश्न करना /
राजद्रोह /
आंदोलन करना /
देशद्रोह /
हक़ मांगना /
राष्ट्रद्रोह /
बना दिया ।
इन सबके बावजूद /
लोग डर नहीं रहे /
छोटे-छोटे बच्चे /
खिलाफत को /
उतारू हैं ।
16 सितंबर 2026

मंगलवार दोपहर गड़वेता के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी।
16 सितंबर 2026

हम तो /
नारी शक्ति के समक्ष /
नतमस्तक हैं ।
हम सभी /
एक स्त्री से ही तो /
जनमे हैं ।
उसी के संरक्षण में /
हमारा स्वर्णिम /
बालपन बीता है ।
12 सितंबर 2026

रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने स्पष्टत: कहा कि राममोहन राय ने भारत में आधुनिक युग का उद्घाटन किया, आज के विश्वजनीन सहयोग के जमाने की मानवता में हमारी दीक्षा उन्होंने ही सम्पन्न किया।
श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

भक्ति-आन्दोलन का जनसाधारण पर जितना व्यापक प्रभाव हुआ उतना किसी अन्य आन्दोलन का नहीं। पहली बार शूद्रों ने अपने सन्त पैदा किये, अपना साहित्य और अपने गीत सृजित किये। कबीर, रैदास, नाभा सिपी, सेना नाई, आदि-आदि महापुरुषों ने ईश्वर के नाम पर जातिवाद के विरुद्ध आवाज बुलन्द की। समाज के न्यस्त स्वार्थवादी वर्ग के विरुद्ध नया विचारवाद अवश्यम्भावी था , वह हुआ।
अपराजिता • 30 जुलाई 2026

जो लोग/
गाली से भी बदतर हैं/
उन्हें शिकायत है/
कि लड़कियां/
गाली दे रही हैं।
दरअसल/
लड़कियां/
वह सब कुछ/
सूद समेत लौटा रही हैं।
राजीव कुमार पाण्डेय • 29 अगस्त 2026
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