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पंचतंत्र का छठां तंत्र - हूबनाथ

राजीव कुमार पाण्डेय•11 अगस्त 20262 मिनट पठन20 बार पढ़ा गया

शावक/

यह भूल गए थे/

कि शेर ही /

पूरा जंगल है ।

कि जंगल की/

डेमोक्रेसी के नियम/

अलग होते हैं।

पंचतंत्र का छठां तंत्र - हूबनाथ

जंगल के

एकछत्र सम्राट

सिंहाधिराज को

मृग एवं

शशक शावकों ने

जंगल के

भीड़भरे चौराहे पर

मां-बहन की

गालियां दीं

जिसके आगे

ख़ूख़्वार दरिंदों की

निगाह तक

नहीं उठती

ज़बान तक

नहीं खुलती

उसे भारी जनसमूह के

सामने

इस क़दर

बेइज़्ज़त किया जाए

शेर के पैरों तले

पूरा जंगल खिसक गया

उसका पूरा साम्राज्य

भय और आतंक पर ही

टिका हुआ था

ऐसे में

इन टोडलरों की

यह हिम्मत

सिंहराज ने

पहली बार

धीरज और कूटनीति से

काम लिया

उसी चौक पर

उन शावकों को

क्षमा करने की

अधिसूचना जारी कर दी

शावकों की नैतिकता

उनके जन्मदाताओं के

चरित्र पर

अफ़सोस जताते हुए

उन सभी को

माफ़ कर दिया

वनराज की सहृदयता

क्षमाशीलता

कारुण्य पर

जंगल के सभी पशुओं ने

जय-जयकार किए

इस तरह

लोग शावकों की

निन्दा करते हुए

अरण्याधिराज की

महानता और पावनता में

आकंठ डूब गए

उसके बाद

भेड़ियों

लोमड़ियों

और सियारों को

गुपचुप तरीके से

जंगल की

सुरक्षा के नाम पर

महाराज के हुक्म से

शावकों के शिकार की

अनुमति दे दी गई

वैसे भी

शावकों की चीख़ ही

कितनी होती है

महाराज की

जय-जयकार के

शोरोगुल के बीच

शावकों की चीखें

ग़ुम होने लगीं

शावक

यह भूल गए थे

कि शेर ही

पूरा जंगल है

कि जंगल की

डेमोक्रेसी के नियम

अलग होते हैं

-हूबनाथ
लेखक परिचय: लगभग 20 पुस्तकों के अनुवाद एवं संपादन का काम कर चुके लेखक हूबनाथ 'बाजा', 'हमारी बेटी' और 'अंतर्ध्वनि' फिल्मों में संवाद लेखन कर चुके है। आपकी 'कौए', 'लोअर परेल', 'अकाल' व 'मिट्टी' नाम से काव्य संग्रह सहित 'ललित निबंध', 'सिनेमा समाज साहित्य' समेत अनेक किताबें प्रकाशित है। आप मुंबई में रहते है।]

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पंचतंत्र का छठां तंत्र - हूबनाथ

प्रकाशित: 11 अगस्त 2026 • 2 मिनट पठन

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