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"वीरकन्या प्रीतिलता"

अपराजिता•17 अगस्त 20262 मिनट पठन8 बार पढ़ा गया

प्रीतिलता वाद्देदार चटगाँव के क्रांतिकारी स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण महिला योद्धाओं में से एक थीं। उनका आत्मत्याग भारतीय उपमहाद्वीप के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अनूठा अध्याय है। उस इतिहास को सिनेमा के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाना ही 'वीरकन्या प्रीतिलता' का मुख्य उद्देश्य है।

'वीरकन्या प्रीतिलता '

कोलकाता में प्रदर्शित की गई प्रदीप घोष द्वारा निर्मित फिल्म 'वीरकन्या प्रीतिलता'। भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कोलकाता के टॉलीगंज स्थित राधा स्टूडियो, चलचित्र शतवर्ष भवन में बांग्लादेश के फिल्म निर्माता प्रदीप घोष द्वारा निर्मित पूर्ण-लंबाई वाली फिल्म 'वीरकन्या प्रीतिलता' का प्रदर्शन किया गया। भारत के ब्रिटिश विरोधी स्वतंत्रता संग्राम की अग्निकन्या प्रीतिलता वाद्देदार के जीवन, संघर्ष, आत्मत्याग और देशभक्ति की कहानी पर आधारित इस फिल्म ने दर्शकों के बीच विशेष रुचि पैदा की।

इस विशेष प्रदर्शन में विशिष्ट पत्रकार अभिजीत दासगुप्ता, कोलकाता प्रेस क्लब के अध्यक्ष स्नेहाशीष सूर, वरिष्ठ वामपंथी नेता सुजन चक्रवर्ती, सामाजिक कार्यकर्ता स्वर्णाली दत्त सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम में फिल्म के निर्देशक प्रदीप घोष ने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों के साथ फिल्म के निर्माण, प्रीतिलता वाद्देदार के जीवन और उन पर फिल्म बनाने के अपने अनुभव साझा किए।

प्रीतिलता वाद्देदार चटगाँव के क्रांतिकारी स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण महिला योद्धाओं में से एक थीं। उनका आत्मत्याग भारतीय उपमहाद्वीप के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अनूठा अध्याय है। उस इतिहास को सिनेमा के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाना ही 'वीरकन्या प्रीतिलता' का मुख्य उद्देश्य है।

कोलकाता में इस विशेष स्क्रीनिंग के ज़रिए प्रीतिलता के जीवन और संघर्ष के इतिहास को दोनों बंगाल (पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश) के दर्शकों तक अधिक व्यापक रूप से पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण अवसर मिला है। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने फिल्म की प्रशंसा की और प्रीतिलता वाद्देदार जैसे ऐतिहासिक पात्रों और उनके आत्मत्याग पर अधिक फिल्में बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

फिल्म की निर्माता कंपनी 'एसएम एंटरटेनमेंट' है। इस स्क्रीनिंग के आयोजन से बांग्लादेशी सिनेमा निर्माण और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के बीच एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक सेतु का निर्माण भी हुआ है।

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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति |17 अगस्त,2026

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"वीरकन्या प्रीतिलता"

प्रकाशित: 17 अगस्त 2026 • 2 मिनट पठन

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