वो दिमाग़ी नक्सल है/
क्योंकि वो पढ़ा लिखा बेरोज़गार है/
जिसके इस इस हश्र में/
वजह केवल और केवल सरकार है।
जन समाचार मंच
वो दिमाग़ी नक्सल है/
क्योंकि वो पढ़ा लिखा बेरोज़गार है/
जिसके इस इस हश्र में/
वजह केवल और केवल सरकार है।

दिमाग़ी नक्सल
वो दिमाग़ी नक्सल है
क्योंकि वो जानता है
इधर एक पेड़ माँ के नाम
उधर जंगल का काम तमाम
वो दिमाग़ी नक्सल है
क्योंकि वो समझता है
क्या होता है संविधान उठाना
और क्या होता है गीता-कुरान उठाना
वो दिमाग़ी नक्सल है
क्योंकि वो सोचता है
कि क्यों नहीं कोई सोचता है
इस बात पर वह अफसोसता है
वो दिमाग़ी नक्सल है
क्योंकि वो सवाल करता है
जो जवाबदेही से भागता है
जिसका ज़मीर गणतंत्र की तरह कांपता है
वो दिमाग़ी नक्सल है
क्योंकि वो बोलता है
कि क्यों नहीं कोई बोलता है
वो हर चुप्पी के पत्ते पुरजोर खोलता है
वो दिमाग़ी नक्सल है
क्योंकि वो पढ़ा लिखा बेरोज़गार है
जिसके इस इस हश्र में
वजह केवल और केवल सरकार है।

-बच्चा लाल 'उन्मेष'
जिला भदोही, उत्तर प्रदेश स्थित ममहर गाँव के किसान परिवार में जन्म
पटना विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में कविताएँ शामिलप्रकाशित पुस्तकें: कौन जात हो भाई (कविता संग्रह) तथा छिछले प्रश्न गहरे उत्तर (कविता संग्रह),
सम्मान: साहित्य चेतना मंच, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) द्वारा तृतीय ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मृति साहित्य सम्मान-2022.
तथा मलखान सिंह सिसोदिया कविता पुरस्कार-2022
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प्रकाशित: 18 अगस्त 2026 • 1 मिनट पठन

प्रश्न करना /
राजद्रोह /
आंदोलन करना /
देशद्रोह /
हक़ मांगना /
राष्ट्रद्रोह /
बना दिया ।
इन सबके बावजूद /
लोग डर नहीं रहे /
छोटे-छोटे बच्चे /
खिलाफत को /
उतारू हैं ।
16 सितंबर 2026

मंगलवार दोपहर गड़वेता के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी।
16 सितंबर 2026

हम तो /
नारी शक्ति के समक्ष /
नतमस्तक हैं ।
हम सभी /
एक स्त्री से ही तो /
जनमे हैं ।
उसी के संरक्षण में /
हमारा स्वर्णिम /
बालपन बीता है ।
12 सितंबर 2026

रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने स्पष्टत: कहा कि राममोहन राय ने भारत में आधुनिक युग का उद्घाटन किया, आज के विश्वजनीन सहयोग के जमाने की मानवता में हमारी दीक्षा उन्होंने ही सम्पन्न किया।
श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

भक्ति-आन्दोलन का जनसाधारण पर जितना व्यापक प्रभाव हुआ उतना किसी अन्य आन्दोलन का नहीं। पहली बार शूद्रों ने अपने सन्त पैदा किये, अपना साहित्य और अपने गीत सृजित किये। कबीर, रैदास, नाभा सिपी, सेना नाई, आदि-आदि महापुरुषों ने ईश्वर के नाम पर जातिवाद के विरुद्ध आवाज बुलन्द की। समाज के न्यस्त स्वार्थवादी वर्ग के विरुद्ध नया विचारवाद अवश्यम्भावी था , वह हुआ।
अपराजिता • 30 जुलाई 2026

जो लोग/
गाली से भी बदतर हैं/
उन्हें शिकायत है/
कि लड़कियां/
गाली दे रही हैं।
दरअसल/
लड़कियां/
वह सब कुछ/
सूद समेत लौटा रही हैं।
राजीव कुमार पाण्डेय • 29 अगस्त 2026
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