कहानियां/
ले जाती हैं/
कल्पना लोक में/
जहां सब कुछ/
सच्चा/
न्यायपूर्ण/
भावविभोर करने वाला/
धर्म भी वहीं/
ले जाता है।
जन समाचार मंच
कहानियां/
ले जाती हैं/
कल्पना लोक में/
जहां सब कुछ/
सच्चा/
न्यायपूर्ण/
भावविभोर करने वाला/
धर्म भी वहीं/
ले जाता है।

*
हर धर्म में
होती हैं कहानियां
जिनके सहारे
टिका होता है धर्म
कहानियों में होती है
कथा वस्तु
चरित्र
संवाद
देश-काल
और होता है
उद्देश्य
धर्म में होती है
कथा वस्तु
चरित्र
संवाद (एकतरफ़ा)
देश-काल
और उद्देश्य
कहानियों को चाहिए
श्रोता
या पाठक
धर्म को भी
कहानियां
ले जाती हैं
कल्पना लोक में
जहां सब कुछ
सच्चा
न्यायपूर्ण
भावविभोर करने वाला
धर्म भी वहीं
ले जाता है
पर कहानियां
झूठ नहीं बोलतीं
और धर्म
कभी सच नहीं बोलता
धर्म कभी भी
कहानियों से बाहर
नहीं निकल पाता
कहानियां
बची रह सकतीं हैं
धर्म के बगैर
पर धर्म में
इतना साहस
नहीं होता
फिर भी
साहस के लिए
लोग कहानियों में
नहीं जाते
धर्म में भटकते हैं
और कायरों की मौत
मरते हैं
*
- हूबनाथ
लगभग 20 पुस्तकों के अनुवाद एवं संपादन का काम कर चुके लेखक हूबनाथ 'बाजा', 'हमारी बेटी' और 'अंतर्ध्वनि' फिल्मों में संवाद लेखन कर चुके है। आपकी 'कौए', 'लोअर परेल', 'अकाल' व 'मिट्टी' नाम से काव्य संग्रह सहित 'ललित निबंध', 'सिनेमा समाज साहित्य' समेत अनेक किताबें प्रकाशित है। आप मुंबई में रहते है।
क्या यह लेख उपयोगी था?
प्रकाशित: 23 अगस्त 2026 • 1 मिनट पठन

प्रश्न करना /
राजद्रोह /
आंदोलन करना /
देशद्रोह /
हक़ मांगना /
राष्ट्रद्रोह /
बना दिया ।
इन सबके बावजूद /
लोग डर नहीं रहे /
छोटे-छोटे बच्चे /
खिलाफत को /
उतारू हैं ।
16 सितंबर 2026

मंगलवार दोपहर गड़वेता के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी।
16 सितंबर 2026

हम तो /
नारी शक्ति के समक्ष /
नतमस्तक हैं ।
हम सभी /
एक स्त्री से ही तो /
जनमे हैं ।
उसी के संरक्षण में /
हमारा स्वर्णिम /
बालपन बीता है ।
12 सितंबर 2026

रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने स्पष्टत: कहा कि राममोहन राय ने भारत में आधुनिक युग का उद्घाटन किया, आज के विश्वजनीन सहयोग के जमाने की मानवता में हमारी दीक्षा उन्होंने ही सम्पन्न किया।
श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

भक्ति-आन्दोलन का जनसाधारण पर जितना व्यापक प्रभाव हुआ उतना किसी अन्य आन्दोलन का नहीं। पहली बार शूद्रों ने अपने सन्त पैदा किये, अपना साहित्य और अपने गीत सृजित किये। कबीर, रैदास, नाभा सिपी, सेना नाई, आदि-आदि महापुरुषों ने ईश्वर के नाम पर जातिवाद के विरुद्ध आवाज बुलन्द की। समाज के न्यस्त स्वार्थवादी वर्ग के विरुद्ध नया विचारवाद अवश्यम्भावी था , वह हुआ।
अपराजिता • 30 जुलाई 2026

जो लोग/
गाली से भी बदतर हैं/
उन्हें शिकायत है/
कि लड़कियां/
गाली दे रही हैं।
दरअसल/
लड़कियां/
वह सब कुछ/
सूद समेत लौटा रही हैं।
राजीव कुमार पाण्डेय • 29 अगस्त 2026
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...