"सरकार ज़हर देकर मार डाले," ज्योतिनगर की महिलाएँ कह रही हैं
जन समाचार मंच
"सरकार ज़हर देकर मार डाले," ज्योतिनगर की महिलाएँ कह रही हैं

इस बार का लक्ष्य गंगा तट की जमीन है। कोलकाता पोर्ट की लाखों रुपये की जमीन अधिग्रहीत करके भाजपा सरकार उसे अडानी समूह के हाथों सौंपना चाहती है। और इस योजना को लागू करने की प्राथमिक सीढ़ी के रूप में काशीपुर के ज्योतिनगर बस्ती इलाके का इस्तेमाल किया जा रहा है, ऐसा ही अंदेशा बस्ती आंदोलन के नेता जता रहे हैं।
भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछले डेढ़ महीने से काशीपुर-बेलगाछिया विधानसभा क्षेत्र के 6नंबर वार्ड के अंतर्गत ज्योतिनगर कॉलोनी के झुग्गीवासियों की पानी की आपूर्ति कोलकाता कॉर्पोरेशन ने बंद कर दिया है। नहाने के पानी से लेकर पीने का पूरा पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है या फिर गंगा के कीचड़ भरे अस्वास्थ्यकर पानी में फिटकरी मिलाकर उस पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
पानी, बिजली, आवास और सेवाएं इस देश के नागरिकों के मौलिक अधिकार हैं। उसी अधिकार को वापस दिलाने की मांग को लेकर रविवार को 'पश्चिम बंगाल बस्ती उन्नयन समिति, कोलकाता जिला कमेटी' के नेतृत्व में बस्तीवासियों ने रैली और सम्मेलन का आयोजन किया।
6 सितम्बर की शाम को चिड़ियामोड़ पर एकत्रित होकर बस्तीवासी ज्योतिनगर कॉलोनी में आयोजित बेदखली विरोधी सम्मेलन (कन्वेंशन)में शामिल हुए। बस्तीवासियो के साथ इस दिन विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर वामपंथी महिला, युवा और छात्र संगठन भी उतरे। स्थानीय निवासियों ने रास्ते में ही अपने दुख-दर्द साझा किए।
हाल ही में काशीपुर-बेलगाछिया निर्वाचन क्षेत्र के स्थानीय भाजपा विधायक रीतेश तिवारी के कार्यालय में अपनी समस्याओं की जानकारी देने के उद्देश्य से 9 बस्तीवासी महिलाएं गई थीं। उनमें से कुछ कांच की फैक्ट्री में काम करती हैं, तो कुछ सड़क पर फेंकी हुई शीशी-बोतलें चुनकर अपना घर चलाती हैं। उन्हें दैनिक मजदूरी के रूप में ज्यादा से ज्यादा 200 रुपये मिलते हैं। घर के पुरुष सदस्य या तो मजदूरी का काम करते हैं या फिर राजमिस्त्री हैं।
अपने कटे-फटे हाथों की स्थिति दिखाते हुए एक स्थानीय महिला ने कहा, "यह देखिए, काँच कटने से मेरे हाथों की क्या हालत हो गई है। घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं। गंगा के गंदे पानी में नहाने से उन्हें चर्म रोग हो रहे हैं। वे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। हर हफ्ते दो हजार रुपये का पानी खरीदना क्या हमारे लिए संभव है? सरकार हमारे बारे में न सोचे, कम से कम बच्चों के बारे में तो एक बार सोचे! बिना पानी के कैसे जिएँ, आप ही बताइए? इस तरह से तड़पाकर मारने के बजाय पानी में ज़हर ही मिला देना चाहिए था। बाल-बच्चों को लेकर एक ही बार में मर जाते। इतनी यातना तो सहनी नहीं पड़ती!"
गंगा से पानी लाते समय या नहाते समय डूबने से बस्ती के कई बच्चों की मौत होने की जानकारी भी स्थानीय लोगों के बयानों से सामने आई है। इसके बावजूद जब झुग्गी की महिलाएँ इस संकट की जानकारी देने विधायक के पास गईं, तो उन्हें सुनना पड़ा कि उनके पास बात करने की योग्यता ही नहीं है। अभी तो सिर्फ़ पानी बंद हुआ है। इसके बाद तुम्हारे साथ और क्या-क्या होता है, देखते जाओ। हमें चुनाव जीतने के लिए मुसलमानों के वोट की ज़रूरत नहीं है। तुमने मुझे वोट नहीं दिया, इसलिए मैं पानी नहीं दूंगा।" स्थानीय मेहनतकश लोगों का आरोप है कि विधायक के रूप में संविधान की शपथ लेकर रीतेश तिवारी फिलहाल इसी तरह काम कर रहे हैं।
पीने के पानी के साथ-साथ सड़क की बिजली सेवा भी बंद कर दी गई थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सावन महीने में शिव पूजा की सुविधा के लिए फिलहाल बिजली सेवा बहाल की गई है। उस इलाके के दोनों तरफ हिंदू आबादी है। बीच का पूरा 'ज्योतिनगर' इलाका अल्पसंख्यक बहुल है। वहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि बीजेपी विधायक रीतेश तिवारी की नज़र में उनका यही एकमात्र अपराध है। उन्होंने बताया कि अशुद्ध पानी का इस्तेमाल करने के कारण स्थानीय महिलाओं को कई जटिल शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पश्चिम बंगाल बस्ती विकास समिति के स्थानीय कमेटी सचिव मोइनुद्दीन का कहना है, "यहां के विधायक सोच रहे हैं कि हम बांग्ला बोलते हैं, इसका मतलब हम बांग्लादेशी हैं। लेकिन हमारे बाप-दादा यहीं के निवासी हैं। मैं 12 साल की उम्र से यहां रह रहा हूं। जिस समय से हमारे पूर्वज यहां रह रहे हैं, उस समय इस बीजेपी सरकार के किसी व्यक्ति ने इस इलाके को देखा तक नहीं था। हम भारतीय हैं। दस्तावेज़ मांगे जाएं तो हम नागरिकता के सारे प्रमाण दिखा सकते हैं।"
पानी की आपूर्ति बंद करने के पीछे वास्तव में बेदखली (उच्छेद) की धमकी छिपी होने के डर से बस्तीवासियों ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में मामला दायर किया था। बीते 18 अगस्त को स्थानीय पुलिस स्टेशन से बुलाकर उन्हें पुलिस ने बताया कि अदालत के स्टे ऑर्डर के बिना वे कलकत्ता पोर्ट (कोलकाता बंदरगाह) की ज़मीन पर नहीं रह सकते। स्थानीय लोगों का सवाल है कि ज़मीन की रजिस्ट्री के सारे दस्तावेज़ पास होने के बावजूद उन्हें उनके पूर्वजों की ज़मीन से क्यों बेदखल किया जाएगा? हालांकि बस्ती विकास समिति के कोलकाता ज़िला सचिव शिबेंदु घोष ने बताया कि अदालत ने एक महीने का स्टे ऑर्डर दिया है। उन्होंने कहा कि हमने कोलकाता नगर निगम की कमिश्नर स्मिता पांडे को इस संकट के बारे में बताया था। मानवाधिकार विकास अधिकारी से लेकर कोलकाता पोर्ट अथॉरिटी के कार्यालय में भी बार-बार अवगत कराया गया है। लेकिन आश्वासन मिलने के बाद भी इस इलाके में पानी की सेवा अभी भी बंद है।
पश्चिम बंगाल बस्ती विकास समिति के राज्य सचिव सुखरंजन दे का कहना है कि धार्मिक उन्माद पैदा करके असल में कोलकाता पोर्ट की ज़मीन पर कब्ज़ा करना ही बीजेपी सरकार का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि केवल अल्पसंख्यक समुदाय के लोग ही नहीं, बल्कि बीजेपी का लक्ष्य सभी श्रमजीवी और मेहनतकश वर्ग के लोग हैं। पोर्ट की ज़मीन पर कब्ज़ा करने के लिए सिर्फ़ ज्योतिनगर ही नहीं, बल्कि काशीपुर-बेलगाछिया इलाके की कई हिंदू बहुल बस्तियों को भी बेदखली का सामना करना पड़ेगा। ज्योतिनगर से इस प्रक्रिया की शुरुआत करने का मुख्य कारण पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के नाम पर नामित इस इलाके पर कब्ज़ा करना और शुरुआती तौर पर एक तरह का धार्मिक उन्माद पैदा करके लोगों का ध्यान दूसरी तरफ भटकाना है। सी ई एस सी , कोलकाता नगर निगम या कोलकाता पोर्ट क्या स्वतंत्र संस्थाएं हैं? उनका अडानी-अंबानी या पुलिस प्रशासन के साथ क्या संबंध है?
इस दिन आयोजित कन्वेंशन में वक्ता के रूप में पीपुल्स रिलीफ कमेटी (पश्चिम बंगाल) के सचिव डॉ. फुआद हलीम, अधिवक्ता शमीम अहमद, अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला समिति की सर्वभारतीय महासचिव कनीनिका घोष, सी आई टी यू नेता प्रतीप दासगुप्ता, बस्ती विकास समिति के कोलकाता ज़िला अध्यक्ष अब्दुल रऊफ, सुखरंजन दे, शिबेंदु घोष, महिला समिति की कोलकाता ज़िला अध्यक्ष पारमिता रॉय, प्रोफेसर डॉ. महालया चटर्जी आदि उपस्थित थे।
सुखरंजन दे ने बताया कि आगामी 25 सितंबर को नागरिकता वापस देने की मांग को लेकर महिला समिति के नेतृत्व में बस्तीवासी भी सीईओ कार्यालय का घेराव करने के अभियान में शामिल होंगे। केवल शहरी क्षेत्रों से ही नहीं, बल्कि आसपास के ज़िलों से भी बस्तीवासी उच्छेद संस्कृति और अन्यायपूर्ण तरीके से नागरिकता छीने जाने के विरोध में वामपंथी महिलाओं के साथ चुनाव आयोग के कार्यालय के घेराव अभियान में भाग लेने जा रहे हैं।
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अपलोडर: VKA-N9LYCE • प्रकाशित: 07 सितंबर 2026 • 7 मिनट पठन

प्रश्न करना /
राजद्रोह /
आंदोलन करना /
देशद्रोह /
हक़ मांगना /
राष्ट्रद्रोह /
बना दिया ।
इन सबके बावजूद /
लोग डर नहीं रहे /
छोटे-छोटे बच्चे /
खिलाफत को /
उतारू हैं ।
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हम तो /
नारी शक्ति के समक्ष /
नतमस्तक हैं ।
हम सभी /
एक स्त्री से ही तो /
जनमे हैं ।
उसी के संरक्षण में /
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