मस्जिद ध्वस्तीकरण के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अविलम्ब सख्त कार्रवाई की जाए, अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों को निशाना बनाने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा सभी धार्मिक स्थलों के संबंध में समान और पारदर्शी नीति अपनाई जाए।
जन समाचार मंच
मस्जिद ध्वस्तीकरण के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अविलम्ब सख्त कार्रवाई की जाए, अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों को निशाना बनाने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा सभी धार्मिक स्थलों के संबंध में समान और पारदर्शी नीति अपनाई जाए।
लखनऊ, 6 सितंबर 2026
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल ने सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने कहा कि भाजपा सरकार के शासन में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को चुन-चुनकर निशाना बनाने और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देना बेहद चिंताजनक है। मस्जिद पक्ष के लिए उच्चतर न्यायालयों में उपलब्ध वैधानिक उपचारों का रास्ता खुला था। इसके बावजूद अवकाश के दिन भोर में मस्जिद को ध्वस्त करना उसे प्रभावी कानूनी राहत लेने से वंचित करने की कोशिश प्रतीत होती है।
सीपीआई(एम) ने कहा कि मस्जिद, मजार और अन्य अल्पसंख्यक धार्मिक स्थलों को विवाद का विषय बनाकर बहुसंख्यकवादी राजनीति को मजबूत करने का प्रयास देश के धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। स्वतंत्रता-पूर्व से अस्तित्व में रही मस्जिद का ध्वस्तीकरण संविधान की भावना तथा पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 के प्रावधानों के अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। किसी भी समुदाय को उसके धार्मिक स्थलों और आस्था के आधार पर भयभीत या अपमानित करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सीपीआई(एम) सचिव मंडल ने मांग की है कि मस्जिद ध्वस्तीकरण के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अविलम्ब सख्त कार्रवाई की जाए, अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों को निशाना बनाने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा सभी धार्मिक स्थलों के संबंध में समान और पारदर्शी नीति अपनाई जाए। पार्टी ने कहा कि उत्तर प्रदेश को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और नफरत की राजनीति की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा तथा धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताकतों से संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की।
— उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
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अपलोडर: VKA-43UUB7 • प्रकाशित: 07 सितंबर 2026 • 2 मिनट पठन

सत्तारूढ़ एबीवीपी (ABVP) को हराकर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (HCU) में एसएफआई (SFI) के नेतृत्व वाले वामपंथी छात्र एकता (Left Student Unity) ने बड़ी जीत हासिल की है।
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27 सितंबर 2026

"यह जो चुनाव हुआ, उसमें तरह-तरह की गड़बड़ियां करके और वोटर लिस्ट को ताक पर रखकर वोट कराए गए। एक शब्द में कहें तो कानून का पालन किए बिना काम हुआ है, नियम-कानून जैसा कुछ नहीं छोड़ा गया। हमने शुरुआत से ही संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात की है। असल बात यह है कि भ्रष्ट तृणमूल-कांग्रेस बीजेपी के साथ मिल गई है। शुभेंदु अधिकारी ने एक समय तृणमूल-कांग्रेस का झंडा लेकर करोड़ों रुपये खर्च किए और पुलिस व असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल करके पंचायत पर कब्जा किया था—यह बात लोग खुद कह रहे हैं। वही शुभेंदु अधिकारी अब बीजेपी में जाकर राज्य सरकार में आ गए हैं। चुनाव नतीजों के बाद कई लोगों ने सोचा था कि शायद अब भ्रष्टाचार बंद होगा। हमने तभी कहा था कि इन दोनों पार्टियों में कोई अंतर नहीं है। वही बात अब साबित हो चुकी है। तृणमूल-कांग्रेस खुलेआम बीजेपी में चली गई है। तो फिर क्या इस पार्टी से विकास की उम्मीद की जा सकती है? शुभेंदु अधिकारी और शमीक भट्टाचार्य हर दिन अपनी बात बदलते हैं। बीजेपी अपने फायदे के लिए आरएसएस के जरिए हुमायूं कबीर जैसे नेताओं को तैयार करती है। यही उनकी नीति है।"
मोहम्मद सलीमसीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
25 सितंबर 2026

पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ?
नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू- काश्मीर, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में फैल गया था पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है । प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।
केशव कुमार भट्टड़ • 12 मई 2026

सीबीआई ने आरोपी की पहचान पीवी कुलकर्णी के रूप में की है। जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी न केवल रसायन शास्त्र (Chemistry) के प्रोफेसर थे, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'एनटीए' के एक प्रभावशाली अधिकारी भी थे। इसी पद पर रहने के कारण प्रश्नपत्रों तक उनकी आसान पहुंच थी।
केशव कुमार भट्टड़ • 15 मई 2026

'पहाड़' की ताकत 'पहाड़' के हाथों में क्यों नहीं?! अफसरों के दम पर स्वायत्तता का नाटक बंद करो!" स्वायत्तता छीने जाने पर गरजे मोहम्मद सलीम!" - दार्जिलिंग के कलामंदिर हॉल में आयोजित कार्यकर्ताओं की सभा में सीपीआई(एम) पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार स्वायत्त निकाय जीटीए (GTA) में प्रतिनिधियों के चुनाव कराने के बजाय प्रशासक बिठाकर लोकतंत्र और पहाड़ के अधिकारों का हनन कर रही है। कश्मीर से लद्दाख और दार्जिलिंग तक क्षेत्रीय स्वायत्तता को खत्म करने की साजिश का दावा करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि भाजपा न तो बहुलतावाद को मानती है और न ही विविधता का सम्मान करती है। पार्टी ने घोषणा की कि वे संविधान की छठी अनुसूची, भूमि अधिकार, चाय बागान श्रमिकों की बदहाली, पर्यावरण विनाश और नागरिकता के नाम पर हो रहे भेदभाव के मुद्दों को लेकर अक्टूबर-नवंबर में पहाड़ की जनता के बीच एक व्यापक जन-अभियान चलाएंगे।
केशव कुमार भट्टड़ • 14 सितंबर 2026
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