जलपाईगुड़ीवासियों ने जताया आक्रोश
जन समाचार मंच
जलपाईगुड़ीवासियों ने जताया आक्रोश

सीपीआई(एम) के जिला कार्यालय 'सुबोध सेन भवन' पर सोमवार रात भाजपा समर्थित उपद्रवियों द्वारा हमला करने, आग लगाने और पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्या के प्रयास की घटना से पूरे जलपाईगुड़ी जिले के आम लोगों में आक्रोश फूट पड़ा है। सत्ता में आने के महज चार महीनों के भीतर ही शासक भाजपा की आतंक की राजनीति के खिलाफ शहर के नागरिकों ने भी आवाज उठाई है।
जलपाईगुड़ी न केवल रात के अंधेरे में हुए एकतरफा सशस्त्र हमले का, बल्कि उसके खिलाफ हुए कड़े प्रतिरोध और विरोध जुलूस का भी गवाह बना। मंगलवार शाम को जलपाईगुड़ी शहर में एक दृढ़ और स्वतःस्फूर्त विरोध जुलूस निकाला गया।
सीपीआई(एम) जलपाईगुड़ी जिला कार्यालय सुबोध सेन भवन पर हमले और आगजनी में शामिल सत्ताधारी दल के उपद्रवियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए यह जुलूस सुबोध सेन भवन के सामने से शुरू हुआ। यह जुलूस कदमतला, बेगुनतारी, मर्चेंट रोड थाना मोड़ होते हुए वापस सुबोध सेन भवन के सामने आकर समाप्त हुआ। जुलूस के दौरान देखा गया कि डीबीसी रोड स्थित भाजपा के जिला कार्यालय के सामने केंद्रीय बल के जवान तैनात थे। केंद्रीय बल भाजपा कार्यालय को सुरक्षा प्रदान कर रहा था, जबकि सोमवार रात भाजपा समर्थकों के हमले के समय पुलिस मूकदर्शक बनी रही और केंद्रीय बल का कोई जवान नजर नहीं आया। सोमवार रात भाजपा के उपद्रवियों ने लाल झंडा टांगने वाले स्टील के खंभे को नुकसान पहुंचाया था। उसे तेजी से ठीक किया गया और जुलूस के अंत में वहीं पार्टी का झंडा फहराया गया। झंडा सीपीआई(एम) की राज्य सचिव मंडली के सदस्य जियाउल आलम ने फहराया। पास में बनी शहीद वेदी पर मुट्ठी बंधा हाथ अब भी टूटा हुआ था, उसी शहीद वेदी पर जियाउल आलम, राज्य कमेटी सदस्य सलिल आचार्य, पार्टी के जिला सचिव पीयूष मिश्र, पूर्व सांसद जितेन दास, पार्टी राज्य कमेटी सदस्य मयूख बिस्वास, फॉरवर्ड ब्लॉक के पूर्व विधायक गोविंद रॉय, सीपीआई (एमएल-लिबरेशन) के नेता प्रदीप गोस्वामी सहित अन्य वामपंथी दलों के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। यह जुलूस सीपीआई(एम) के आह्वान पर होना था, लेकिन बाद में वामपंथी दलों के संयुक्त प्रयास से निकाला गया।
सोमवार रात करीब 10:30 बजे सीपीआई(एम) जिला कार्यालय पर भाजपा समर्थित उपद्रवियों ने ईंट, पत्थर, लाठी और हथियारों से अचानक हमला कर दिया। पहले ईंट-पत्थर फेंककर पार्टी कार्यालय के बाहर की कांच की खिड़कियां, सीढ़ियों पर लगे कांच के फ्रेम और लाल झंडा लगाने का स्टील का खंभा तोड़ दिया। इसके बाद पेट्रोल डालकर लाल झंडे को जला दिया गया। झंडे को आधी जली हालत में युवा नेता देवराज बर्मन और पिंटू दास ने बरामद किया। उस समय देवराज बर्मन और गेट के सामने मौजूद पिंटू दास सहित छात्र-युवा नेतृत्व और पार्टी कार्यकर्ताओं पर ईंटें फेंककर भाजपा कार्यकर्ता अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। रास्ता रोककर सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने कड़ा प्रतिरोध किया। काफी देर तक यह तांडव चलता रहा, लेकिन पुलिस नजर नहीं आई। हमले में देवराज बर्मन, सोहिनी रॉय, प्रभाकर सरकार, दिया साहा, पूर्णा दत्त भौमिक, पंचम घोष, वेदव्रत घोष सहित अंदर मौजूद अन्य पार्टी नेता और छात्र-युवा घायल हुए।
काफी देर बाद पुलिस पहुंची, लेकिन पुलिस के सामने भी फिर से उपद्रवी जिला कार्यालय पर हमले के मकसद से जुटने लगे। उस समय पार्टी कार्यकर्ता और छात्र-युवा सीधे प्रतिरोध में उतर आए। कुछ देर बाद आईसी कोतवाली के नेतृत्व में पुलिस बल सीपीआई(एम) जिला कार्यालय के सामने पहुंचा और पीयूष मिश्र, सलिल आचार्य सहित पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से घर जाने को कहा। नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि वे पार्टी कार्यालय छोड़कर नहीं जाएंगे और रात भर यहीं रहकर कार्यालय की रक्षा करेंगे, क्योंकि उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं है।
रात में ही जलपाईगुड़ी कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। भाजपा उपद्रवियों के नाम और पहचान के साथ एफआईआर दर्ज कराने के बावजूद मंगलवार रात तक पुलिस किसी को भी हिरासत में या गिरफ्तार नहीं कर सकी।
मंगलवार को शहर में विरोध प्रदर्शन और जुलूस के बाद आयोजित एक संक्षिप्त सभा में जियाउल आलम ने कहा कि लाल झंडा मजदूरों, किसानों और मेहनतकश लोगों के खून-पसीने से बना है। हमला करके या आग लगाकर लाल झंडे को खत्म नहीं किया जा सकता। राज्य की भाजपा सरकार महज कुछ ही दिनों में यह साबित कर रही है कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ नहीं है। जिला कार्यालय पर हमला करने वालों को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
पार्टी के जिला सचिव पीयूष मिश्र ने कहा कि सत्ता में आते ही भाजपा खुद को सर्वोपरि समझने लगी है और चार महीनों में ही उसका मुखौटा उतर गया है। चूंकि बड़ी संख्या में लोग भाजपा के खिलाफ लड़ाई में सीपीआई(एम) से जुड़ रहे हैं, इसलिए वे हताश होकर यह हमला कर रहे हैं। अंग्रेजों की दलाल आरएसएस वामपंथियों के आंदोलन को डराकर दबाना चाहती है, लेकिन ऐसा नहीं होगा। आने वाले दिनों में लड़ाई और मजबूत होगी।
पार्टी की राज्य कमेटी के सदस्य मयूख बिस्वास ने कहा कि जलपाईगुड़ी की धरती गोविंद कुंडू, सुबोध सेन और मानिक सान्याल की धरती है। इस मिट्टी में गांधी के हत्यारे नाथूराम की पार्टी के लिए कोई जगह नहीं है। जिला मुख्यालय के साथ-साथ जिले के अन्य हिस्सों में भी विरोध जुलूसों में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
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अपलोडर: VKA-N9LYCE • प्रकाशित: 09 सितंबर 2026 • 5 मिनट पठन

प्रश्न करना /
राजद्रोह /
आंदोलन करना /
देशद्रोह /
हक़ मांगना /
राष्ट्रद्रोह /
बना दिया ।
इन सबके बावजूद /
लोग डर नहीं रहे /
छोटे-छोटे बच्चे /
खिलाफत को /
उतारू हैं ।
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16 सितंबर 2026

हम तो /
नारी शक्ति के समक्ष /
नतमस्तक हैं ।
हम सभी /
एक स्त्री से ही तो /
जनमे हैं ।
उसी के संरक्षण में /
हमारा स्वर्णिम /
बालपन बीता है ।
12 सितंबर 2026

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