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राइटर्स बिल्डिंग (महाकरण) भी जा रहा है अडानी के हाथों में

राजीव कुमार पाण्डेय•09 सितंबर 20265 मिनट पठन35 बार पढ़ा गया

नवान्न के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "महाकरण में दोबारा सचिवालय लौटने की संभावना लगभग न के बराबर है। हालांकि, जीर्णोद्धार के बाद इस ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग का क्या उपयोग होगा, इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

राइटर्स बिल्डिंग (महाकरण) भी जा रहा है अडानी के हाथों में

राइटर्स बिल्डिंग के जीर्णोद्धार (संस्कार) का जिम्मा अडानी समूह को सौंपने की तैयारी की जा रही है।

 

हाल ही में अडानी समूह का एक प्रतिनिधिमंडल राइटर्स बिल्डिंग का निरीक्षण करने पहुंचा था। राज्य प्रशासन के विभिन्न पदों पर रह चुके सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी संजय थड़े, जो वर्तमान में अडानी समूह के प्रमुख सलाहकारों में से एक हैं, खुद इस निरीक्षण में मौजूद थे। उनके साथ लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रभारी इंजीनियर और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। राइटर्स बिल्डिंग के निरीक्षण के बाद प्रशासनिक सूत्रों से पता चला है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अडानी समूह से राइटर्स बिल्डिंग के जीर्णोद्धार का जिम्मा संभालने का अनुरोध किया था। इसके बाद समूह के प्रतिनिधियों ने महाकरण (राइटर्स) जाकर वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।

 

राज्य में सत्ता में आने के बाद से ही भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस सरकार को "श्यामा प्रसाद की धरती पर श्यामा प्रसाद की सरकार" कहता रहा है। राज्य भर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मनाई जा रही है। न्यू टाउन में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फीट ऊंची प्रतिमा का शिलान्यास केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया था। प्रशासन और भाजपा सूत्रों के अनुसार, जीर्णोद्धार के बाद राइटर्स बिल्डिंग का नाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखे जाने की संभावना है।

 

राज्य सरकार न्यू टाउन में अडानी समूह को 57 एकड़ जमीन दे रही है, जहां अडानी समूह एक निजी अस्पताल बनाएगा। इस अस्पताल के निर्माण के लिए जमीन की श्रेणी (कैरेक्टर) बदलने सहित विभिन्न मदों में सरकार अडानी समूह को लगभग 1,900 करोड़ रुपये की राजस्व छूट दे रही है। इसके बदले, अडानी समूह अपनी सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) परियोजना के तहत राइटर्स बिल्डिंग का जीर्णोद्धार कराएगा।

 

राज्य प्रशासन के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, सरकार की योजना के मुताबिक इस समय महाकरण के जीर्णोद्धार के लिए 150 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। लेकिन ममता बनर्जी की सरकार के कार्यकाल में यह मामूली राशि भी खर्च करने की पहल नहीं की गई थी। अब अडानी समूह के 'अडानी आरोग्य निकेतन' अस्पताल निर्माण में भारी छूट देकर सरकार इस काम को अडानी से कराने जा रही है। इसी महीने अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी न्यू टाउन में नए अस्पताल के निर्माण का शिलान्यास करने आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, उसी दिन राइटर्स बिल्डिंग के जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी औपचारिक रूप से अडानी समूह को सौंपने की घोषणा हो सकती है।

 

ममता बनर्जी के कार्यकाल में 6 अगस्त 2013 को महाकरण से राज्य सचिवालय को 'नवान्न ' स्थानांतरित किया गया था। करीब 13 साल बीत जाने के बाद भी राइटर्स के जीर्णोद्धार में कोई प्रगति नहीं हुई। अब राइटर्स का जिम्मा अडानी समूह को दिए जाने के बावजूद, राज्य सचिवालय के दोबारा महाकरण लौटने पर संशय है। क्योंकि राज्य सरकार ने न्यू टाउन में राज्य का नया सचिवालय बनाने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। सभी विभागों को एक ही छत के नीचे लाने के लिए न्यू टाउन में नया सचिवालय बनेगा। ऐसे में नए रूप में सजने के बाद महाकरण का क्या होगा?

 

नवान्न के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "महाकरण में दोबारा सचिवालय लौटने की संभावना लगभग न के बराबर है। हालांकि, जीर्णोद्धार के बाद इस ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग का क्या उपयोग होगा, इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। संभव है कि भविष्य में इसे संग्रहालय (म्यूजियम) के रूप में इस्तेमाल किया जाए।"

 

6 अगस्त 2013 को मीडिया के समक्ष मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राइटर्स बिल्डिंग के जीर्णोद्धार के निर्णय की घोषणा की थी। उसी वर्ष 5 अक्टूबर को राज्य प्रशासन का मुख्यालय राइटर्स से हावड़ा स्थित HRBC बिल्डिंग में स्थानांतरित कर दिया गया था। HRBC बिल्डिंग का निर्माण वाममोर्चा सरकार ने परिधान उद्योग (कपड़ा उद्योग) में रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया था। ममता बनर्जी ने उस बहुमंजिला इमारत का नाम बदलकर 'नवान्न' रखा था।

 

राइटर्स से नवान्न स्थानांतरित करने का कारण बताते हुए ममता बनर्जी ने कहा था, "राइटर्स जर्जर और खतरनाक स्थिति में है। फिलहाल मरम्मत और सुधार के लिए सचिवालय को दूसरी जगह ले जाया जा रहा है। काम पूरा होते ही इसे वापस राइटर्स लाया जाएगा।"

 

भविष्य में महाकरण कैसा होगा, इसकी योजना और कार्यान्वयन के लिए तत्कालीन गृह सचिव (और बाद में मुख्य सचिव) वासुदेव बनर्जी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था। उस समिति की कई बैठकें हुईं, लेकिन ठोस काम कुछ नहीं हुआ। इस वर्ष मई में तत्कालीन मुख्य सचिव बी.पी. गोपालिका ने राइटर्स जीर्णोद्धार समिति के साथ एक बैठक की थी। नबाना के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, "वह बैठक सिर्फ नाममात्र की थी, उसमें कोई फलदायी चर्चा नहीं हुई। परिणामस्वरूप, राइटर्स बिल्डिंग के जीर्णोद्धार कार्य में कोई प्रगति नहीं हुई। अब उसी राइटर्स बिल्डिंग के जीर्णोद्धार का काम अडानी समूह संभालने जा रहा है।"

 

इससे पहले ममता बनर्जी के कार्यकाल में कालीघाट मंदिर के जीर्णोद्धार का काम मुकेश अंबानी के रिलायंस फाउंडेशन ने किया था। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब अडानी समूह का दायरा बढ़ रहा है। राज्य में भाजपा सरकार के आने के बाद जून महीने में गौतम अडानी के बेटे और अडानी समूह के प्रमुखों में से एक करण अडानी भी आए थे। ममता बनर्जी के शासनकाल में ताजपुर गहरे समुद्री बंदरगाह (डीप सी पोर्ट) परियोजना से शुरुआत में अडानी जुड़े थे, लेकिन बाद में वे इससे पीछे हट गए थे। अब भाजपा सरकार ने ताजपुर डीप सी पोर्ट परियोजना को पूरी तरह रद्द कर दिया है और उसकी जगह पूर्व मेदिनीपुर जिले के ददनपात्रबाड़ में नया बंदरगाह बनाने का ऐलान मुख्यमंत्री ने किया है।

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राइटर्स बिल्डिंग (महाकरण) भी जा रहा है अडानी के हाथों में

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