मंगलवार दोपहर गड़वेता के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी।
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिला अंतर्गत लबनी और गड़वेता में सोमवार रात से मंगलवार दोपहर के बीच सीपीआई(एम) के 7 कार्यालयों में बीजेपी ने तोड़फोड़ और लूटपाट की। गरबेटा में लेनिन की मूर्ति तोड़ी गई। बीजेपी कार्यकर्ताओं के हमले में शालबनी के वरिष्ठ पार्टी नेता श्याम पांडे गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके अलावा पार्टी नेता सौगत पंडा समेत कई अन्य लोग भी घायल हुए हैं। इन सब घटनाओं के आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने मनगढ़ंत आरोपों में गड़वेता से एक सीपीआई(एम) कार्यकर्ता को गिरफ्तार कर लिया है।

बीजेपी के इस हमले के विरोध में मंगलवार को पश्चिम मेदनीपुर के 21 स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध सभाएं और रैलियां निकालीं। गड़वेता और शालबनी में सीपीआई(एम) के दफ्तरों पर हुए हमलों के प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों ने बताया कि हमलावरों में से ज्यादातर लोग 4 मई से पहले तृणमूल कांग्रेस के लिए वसूली करते थे और वोट लूट करते थे, वही लोग अब बीजेपी के उपद्रवी दस्ते बन गए हैं।
सोमवार को भी बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी के एक अन्य कार्यालय पर हमला किया था। चंद्रकोना रोड स्थित उस पार्टी दफ्तर में तोड़फोड़ और आगजनी करने से पहले वे पार्टी की एक रैली में हंगामा करने गए थे, लेकिन वहां से उन्हें पीछे हटना पड़ा। इसके बाद उन्होंने चंद्रकोना रोड के कार्यालय पर हमला किया। सोमवार रात से उन्होंने फिर हमले शुरू कर दिए। ठीक इसी तरह 1997-98 से गरबेटा और केशपुर में तृणमूल हमले करती थी।
मंगलवार दोपहर गरबेटा के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी। मंगलवार सुबह से पार्टी कार्यकर्ता उस दफ्तर में एकत्र हुए और दोपहर तक मलबे को हटाकर दफ्तर फिर से चालू कर दिया गया।
पार्टी कार्यकर्ताओं के जाते ही बीजेपी कार्यकर्ताओं ने वहां फिर से हमला कर दिया। इसमें पार्टी के जिला कमेटी सदस्य और पूर्णकालिक कार्यकर्ता 70 वर्षीय श्याम पांडे पर हमला किया गया, जिससे उनका सिर फट गया और सिर में 6 टांके आए हैं। उनके हाथ-पांव में पट्टी बांधी गई, लेकिन अस्पताल में भर्ती करने के बजाय छुट्टी दे दी गई। इस हमले में पार्टी नेता सौगत पंडा समेत चार लोग घायल हुए।
सोमवार रात से सुबह के बीच बीजेपी कार्यकर्ताओं ने आग लगाकर गड़वेता के राधानगर, अमलागोड़ा, मौलाड़ा और राउलिया स्थित पार्टी दफ्तरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की। चंद्रकोना के नयाबसत और रसकुंडू स्थित दो पार्टी कार्यालयों में भी तोड़फोड़ और लूटपाट की गई तथा आग लगा दी गई।
बीजेपी ने 4 महीने पहले भी उस मूर्ति को तोड़ा था। मंगलवार को उन्होंने फिर से वही मूर्ति तोड़ दी। विजय पाल ने बताया कि चंद्रकोना के सम्मेलन से सोमवार को लौटते समय पार्टी के कई कार्यकर्ताओं पर हमला हुआ, फिर भी उन्होंने प्रतिरोध किया। ऐसे ही एक पीड़ित आकछुड़ा शाखा के सचिव सामशेर खान को पुलिस ने रात में झूठे मामले में गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार शाम बीजेपी ने उनके घर और किराना दुकान पर हमला कर दिया।
इन हमलों के दौरान जिला पुलिस अधीक्षक को बार-बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। थानों ने भी कोई भूमिका नहीं निभाई।
बीजेपी की इस बर्बर कार्रवाई की निंदा करते हुए सीपीआई(एम) के पश्चिम मेदनीपुर जिला सचिव विजय पाल ने कहा, "बीजेपी सरकार आने के 4 महीने के भीतर ही जनता पर से उसका भरोसा उठ गया है। हाल के दिनों के अपने कारनामों से वे जमीन खो रहे हैं। वे बुलडोजर संस्कृति और बंगाल की संस्कृति पर ध्रुवीकरण व विभाजन की राजनीति थोपना चाहते हैं। उनके बुलावे पर अब आम लोग शामिल नहीं हो रहे हैं। केवल 'अन्नपूर्णा भंडार' का डर दिखाकर महिलाओं को उनकी रैलियों और बैठकों में जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सीपीआई(एम) जनता के संकटों और मांगों को लेकर लड़ रही है, जिससे बीजेपी घबराई हुई है। इसलिए आतंक का माहौल बनाना और सीपीआई(एम) पर हमला करना ही अब उनका एकमात्र काम और लक्ष्य है। इसके खिलाफ सड़कों पर और कानूनी लड़ाई लड़कर हम बीजेपी का अंत देखेंगे।"
उल्लेखनीय है कि तृणमूल के शासनकाल में भी गड़वेता में लेनिन की मूर्ति दो बार तोड़ी गई थी।
इस हिंसक हमले के विरोध में जिले के 21 स्थानों पर प्रदर्शन, जुलूस और विरोध सभाएं की गईं। मेदनीपुर शहर में दो, खड़गपुर शहर में तीन, डेबरा ब्लॉक में 5, घाटल ब्लॉक में तीन, दासपुर, सोनाखाली, गोपीगंज समेत कई इलाकों में रैलियां निकाल कर विरोध सभाएं की गईं।
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साभार:- गणशक्ति
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