सत्तारूढ़ एबीवीपी (ABVP) को हराकर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (HCU) में एसएफआई (SFI) के नेतृत्व वाले वामपंथी छात्र एकता (Left Student Unity) ने बड़ी जीत हासिल की है।
जन समाचार मंच
सत्तारूढ़ एबीवीपी (ABVP) को हराकर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (HCU) में एसएफआई (SFI) के नेतृत्व वाले वामपंथी छात्र एकता (Left Student Unity) ने बड़ी जीत हासिल की है।
गोविंद बर्मन

हैदराबाद
29 सितंबर— सत्तारूढ़ एबीवीपी (ABVP) को हराकर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (HCU) में एसएफआई (SFI) के नेतृत्व वाले वामपंथी छात्र एकता (Left Student Unity) ने बड़ी जीत हासिल की है। सोमवार को मतदान के बाद मंगलवार शाम से छात्र संघ चुनाव की मतगणना शुरू हुई थी। शुरुआत से ही ज्यादातर सीटों पर वामपंथी उम्मीदवार आगे चल रहे थे। मंगलवार देर रात तक मुख्य चार पदों पर वामपंथी प्रत्याशी ही आगे रहे। अध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद के लिए मतगणना पूरी हो चुकी है।
अध्यक्ष पद पर वामपंथी छात्र एकता के एसएफआई उम्मीदवार दिलशादा रायहान को 2178 वोट मिले। वह अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एबीवीपी उम्मीदवार से 451 वोटों से आगे रहे। 30वें राउंड तक, उपाध्यक्ष पद पर वामपंथी एकता के 'ट्राइबल स्टूडेंट्स फेडरेशन' (TSF) के उम्मीदवार कोररा नितिन चौहान को 1204 वोट मिले। वह एबीवीपी उम्मीदवार से 61 वोटों से आगे रहे। 30 वें राउंड तक, महासचिव पद पर वामपंथी एकता के 'अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (ASA) के उम्मीदवार प्रतीक को 1040 वोट मिले। वह एबीवीपी उम्मीदवार से 141 वोटों से आगे रहे।
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संयुक्त सचिव पद पर वामपंथी गठबंधन के आइसा (AISA) उम्मीदवार सिद्धांत को 2056 वोट मिले। उन्होंने एबीवीपी प्रत्याशी से 399 वोट अधिक हासिल किए। कुल 55 राउंड की मतगणना के बाद बुधवार को अंतिम परिणाम घोषित किया जाएगा।
मुख्य चार पदों के अलावा जीएसकैश (आंतरिक शिकायत समिति) के तीन पदों में से 2 पर वामपंथी छात्र एकता के एसएफआई उम्मीदवार नाफी और टीएसएफ उम्मीदवार बायागिरी ने जीत हासिल की है। एक पद पर एबीवीपी गठबंधन के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। इसके अलावा, खेल सचिव और संस्कृति सचिव के पदों पर वामपंथी उम्मीदवार मामूली अंतर से पीछे हैं। हालांकि, अभी भी लगभग 35 राउंड की मतगणना बाकी है। इसके अतिरिक्त, 57 विभागीय प्रतिनिधि (Departmental Representative) पदों में से 34 पर वामपंथी उम्मीदवार निर्वाचित हुए हैं। कई पदों पर कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) के नेतृत्व वाले गठबंधन ने जीत दर्ज की है। एबीवीपी काफी पीछे रह गई है।
पिछले साल इस विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में आरएसएस के छात्र संगठन एबीवीपी, सेवालाल विद्यार्थी दल (SLVD) और ओबीसी स्टूडेंट्स एसोसिएशन के गठबंधन ने जीत हासिल की थी। छात्र संघ की जिम्मेदारी मिलने के बावजूद एबीवीपी अपने वादे पूरे करने में विफल रही। नया हॉस्टल बनाने, कैंपस में पीने के पानी की व्यवस्था करने, कैंटीन में उचित दाम पर खाना देने और स्कॉलरशिप-फ़ेलोशिप के अवसर बढ़ाने का आश्वासन देने के बावजूद एबीवीपी इन्हें पूरा नहीं कर सकी। छात्रों के एक बड़े वर्ग का कहना है कि अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए आरएसएस का छात्र संगठन प्रचार में झूठ का सहारा ले रहा है।
इसके साथ ही, एबीवीपी ने अधिकारियों के साथ साठगांठ करके विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं पर केंद्र सरकार की विभिन्न शिक्षा-विरोधी नीतियों को थोपने की कोशिश की। छात्रों ने आंदोलनों के जरिए इसे नाकाम कर दिया है।
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अपलोडर: VKA-43UUB7 • प्रकाशित: 30 सितंबर 2026 • 3 मिनट पठन

27 सितंबर 2026

"यह जो चुनाव हुआ, उसमें तरह-तरह की गड़बड़ियां करके और वोटर लिस्ट को ताक पर रखकर वोट कराए गए। एक शब्द में कहें तो कानून का पालन किए बिना काम हुआ है, नियम-कानून जैसा कुछ नहीं छोड़ा गया। हमने शुरुआत से ही संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात की है। असल बात यह है कि भ्रष्ट तृणमूल-कांग्रेस बीजेपी के साथ मिल गई है। शुभेंदु अधिकारी ने एक समय तृणमूल-कांग्रेस का झंडा लेकर करोड़ों रुपये खर्च किए और पुलिस व असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल करके पंचायत पर कब्जा किया था—यह बात लोग खुद कह रहे हैं। वही शुभेंदु अधिकारी अब बीजेपी में जाकर राज्य सरकार में आ गए हैं। चुनाव नतीजों के बाद कई लोगों ने सोचा था कि शायद अब भ्रष्टाचार बंद होगा। हमने तभी कहा था कि इन दोनों पार्टियों में कोई अंतर नहीं है। वही बात अब साबित हो चुकी है। तृणमूल-कांग्रेस खुलेआम बीजेपी में चली गई है। तो फिर क्या इस पार्टी से विकास की उम्मीद की जा सकती है? शुभेंदु अधिकारी और शमीक भट्टाचार्य हर दिन अपनी बात बदलते हैं। बीजेपी अपने फायदे के लिए आरएसएस के जरिए हुमायूं कबीर जैसे नेताओं को तैयार करती है। यही उनकी नीति है।"
मोहम्मद सलीमसीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
25 सितंबर 2026

बीजेपी सरकार ने राजनीतिक मंशा से जानबूझकर राजनीतिक योजना बनाकर कोलकाता नगर निगम का परिसीमन (डीलिमिटेशन) किया है। इस आरोप को उठाते हुए और नगर निगम के समग्र गतिरोध का विरोध जताते हुए आगामी 29 सितम्बर को कोलकाता जिला वाममोर्चा ने 'कोलकाता नगर निगम चलो' का आह्वान किया है।
24 सितंबर 2026

पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ?
नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू- काश्मीर, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में फैल गया था पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है । प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।
केशव कुमार भट्टड़ • 12 मई 2026

सीबीआई ने आरोपी की पहचान पीवी कुलकर्णी के रूप में की है। जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी न केवल रसायन शास्त्र (Chemistry) के प्रोफेसर थे, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'एनटीए' के एक प्रभावशाली अधिकारी भी थे। इसी पद पर रहने के कारण प्रश्नपत्रों तक उनकी आसान पहुंच थी।
केशव कुमार भट्टड़ • 15 मई 2026

'पहाड़' की ताकत 'पहाड़' के हाथों में क्यों नहीं?! अफसरों के दम पर स्वायत्तता का नाटक बंद करो!" स्वायत्तता छीने जाने पर गरजे मोहम्मद सलीम!" - दार्जिलिंग के कलामंदिर हॉल में आयोजित कार्यकर्ताओं की सभा में सीपीआई(एम) पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार स्वायत्त निकाय जीटीए (GTA) में प्रतिनिधियों के चुनाव कराने के बजाय प्रशासक बिठाकर लोकतंत्र और पहाड़ के अधिकारों का हनन कर रही है। कश्मीर से लद्दाख और दार्जिलिंग तक क्षेत्रीय स्वायत्तता को खत्म करने की साजिश का दावा करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि भाजपा न तो बहुलतावाद को मानती है और न ही विविधता का सम्मान करती है। पार्टी ने घोषणा की कि वे संविधान की छठी अनुसूची, भूमि अधिकार, चाय बागान श्रमिकों की बदहाली, पर्यावरण विनाश और नागरिकता के नाम पर हो रहे भेदभाव के मुद्दों को लेकर अक्टूबर-नवंबर में पहाड़ की जनता के बीच एक व्यापक जन-अभियान चलाएंगे।
केशव कुमार भट्टड़ • 14 सितंबर 2026
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