दबाव और शिकायतों के बाद हरकत में आए निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को भेजे गए पत्र में दो मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए गए।
जन समाचार मंच
दबाव और शिकायतों के बाद हरकत में आए निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को भेजे गए पत्र में दो मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए गए।

नई दिल्ली/पीलीभीत: 2 नवंबर। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची (Voter List) में सामने आई गंभीर अनियमितताओं और हेरफेर के मामले में निर्वाचन आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग के निर्देश पर इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स और जांच के मुताबिक, सूची में बड़े पैमाने पर बिना वैध दस्तावेजों और आवेदन पत्रों के ही प्रविष्टियों को मंजूरी और खारिज किए जाने का मामला सामने आया था। कार्यालय में इन प्रविष्टियों से संबंधित कोई भी उचित आवेदन पत्र या सहायक दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिले, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए।
दबाव और शिकायतों के बाद हरकत में आए निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को भेजे गए पत्र में निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया कि ईआरओ मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। आयोग के निर्देश के अनुसार:
दोनों अधिकारियों के खिलाफ आरोप-पत्र (चार्जशीट) जांच-पड़ताल के लिए निर्वाचन आयोग को सौंपे जाने चाहिए।
निर्वाचन आयोग की पूर्व अनुमति के बिना इन्हें सेवा में बहाल नहीं किया जा सकता।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस मामले में संलिप्तता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की प्रासंगिक धाराओं (जैसे धारा 198) को जोड़ने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। चुनाव आयोग की इस सख्त कार्रवाई से प्रशासनिक और चुनावी महकमे में हड़कंप मच गया है।
'वाम की आवाज' लगातार इस धांधली को प्रमुखता से उठाता रहा है (देखें लिंक)
उत्तरप्रदेश:मतदाता सूची में फर्जीवाड़ा।आरोपी अफसरों पर योगी मेहरबान!
उत्तर प्रदेश: मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियाँ, आयोग पर उठे गंभीर सवाल
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प्रकाशित: 02 नवंबर 2026 • 2 मिनट पठन

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां एक ही पहचान संख्या पर 13 हजार से अधिक प्रविष्टियां दर्ज पाई गईं। चुनाव आयोग के निर्देश पर एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, योगी सरकार द्वारा आरोपी अधिकारियों को निलंबित करने की बजाय पहले नई तैनाती देना और फिर किरकिरी होने पर प्रतीक्षारत करना गंभीर मिलीभगत की ओर इशारा करता है। पिछले चुनाव में जीत का मामूली अंतर और प्रभावित मतदाताओं का बहुसंख्यक अल्पसंख्यक होना इस सुनियोजित खेल के राजनीतिक निहितार्थों को साफ उजागर करता है। वोटर सूची में बड़े पैमाने पर धांधली और आरोपियों पर सरकारी मेहरबानी ने उत्तर प्रदेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश सीपीआई(एम) राज्य समिती के सदस्य नवाबउद्दीन ने इस रिपोर्ट के जरिए प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग और लोकतंत्र पर मंडराते खतरे को बेनकाब किया है।
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