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डॉ. अशोक सिंह•10 अप्रैल 20263 मिनट पठन31 बार पढ़ा गया
बांग्ला फिल्म और रंगमंच के लोकप्रिय अभिनेता राहुल अरूणोदय बनर्जी की शूटिंग के दौरान समुद्र तट पर डूबने से हुयी मौत ने बंगाल के सांस्कृतिक जगत को झकझोर दिया है। मीडिया और सोशल मीडिया में प्रश्नों की बौछार हो रही है। बांग्ला फिल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री सुदीप्ता चक्रवर्ती ने अपने फेसबुक वाल पर बांग्ला भाषा में यह पोस्ट किया है। उसका हिंदी अनुवाद किया है डॉ. अशोक सिंह ने।
⚫ तो फिर बात क्या बनी?
नज़रुल मंच या धनधान्य ऑडिटोरियम में भीड़ बढ़ाने के लिए जब-तब शूटिंग बंद करने का निर्देश दिया जा सकता है, लेकिन एक युवा अभिनेता की शूटिंग के दौरान ही हुई अचानक मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए आधे दिन की शूटिंग रोकने का कोई निर्देश कहीं से नहीं आता। सरकारी पुरस्कार (???)वितरण समारोह में सभी कलाकार और तकनीशियन 'भारी संख्या में शामिल' हो सकें, इसलिए एक WhatsApp मैसेज पर उस दिन के लिए सारे शूटिंग फ्लोर शांत किए जा सकते हैं। लेकिन एक युवा सहकर्मी को आखिरी बार देखने का मौका देने के लिए, कैमरे की रोलिंग एक घंटे के लिए बंद रखने का कोई ईमेल या WhatsApp मैसेज किसी की तरफ से नहीं आता। कलाकारों के विभिन्न सम्मानों से नवाजे जाने के वार्षिक दृश्य को अपनी आंखों से देख पाने के 'स्वर्गीय आनंद' से कोई कलाकार या तकनीशियन वंचित न रह जाए, यह सुनिश्चित करने के लिए फिल्म, वेब सीरीज और यहां तक कि डेली सीरियल की शूटिंग भी बंद रखी जा सकती है। तब एपिसोड 'बैंकिंग' कम होने की चिंता नहीं होती, टेलीकास्ट रुकने का डर नहीं सताता। लेकिन अपने भाई समान सह-कलाकार को अंतिम विदाई देने के लिए आधा घंटा शूटिंग रोकने का निर्देश देते ही बैंकिंग कम होने का डर हावी हो जाता है, टेलीकास्ट रुकने का खतरा दिखता है और निर्माताओं को बड़े नुकसान की आशंका होने लगती है। इसलिए, कोई निर्देश फिर नहीं आता। अपने कार्यजगत से एक अभिनेता की क्या यही कुल उपलब्धि है? क्या यही है वह 'हमारा एक परिवार' जहाँ अक्सर 'गलतफहमियाँ' होती हैं और फिर चाय-समोसा खाकर सुलझ भी जाती हैं? क्या यही है 'हमारा टालीवुड'? हे कलाकार—याद रखना तुम 'कलाकार' हो। तुम रिक्शा या ऑटो नहीं चलाते, न ही तुम सब्जी बेचते हो कि तुम्हारी यूनियन तुम्हारी मौत पर दुकानें बंद रखेगी। तुम मात्र 'दो कौड़ी के कलाकार' हो। ज्यादा मत बोलो। जाओ जाकर नाचो, गाना गाओ, अभिनय करो। तुम मन का आनंद ठीक से दिखाओ। सीने में हजार दर्द दबाकर, लिपस्टिक और पाउडर पोतकर तुम प्रेम का अभिनय अच्छे से करो, वरना तुम्हारा 'काम कम हो जाएगा', तुम 'रिप्लेस' (replace) कर दिए जाओगे। तुम डरते रहो। याद रखना तुम्हारे पीछे ही लाइन में खड़े हैं और भी कई कलाकार, तुम्हें रिप्लेस करने के लिए। वे सब रटने में माहिर हैं, इसलिए वे भी सब 'कलाकार' हैं। हजारों डॉक्टर हाजरा जैसे हजारों कलाकार। इसलिए डरे रहो, चुप रहो। तुम पतंग बनकर आसमान में उड़ो, हम तालियाँ बजाएँगे। भूलकर भी यह मत पूछना कि क्यों उड़ रहे हो, कौन उड़ा रहा है, लटाई किसके हाथ में है। जान भी जाओ तो चुप रहना, वरना 'बैन' (ban) हो जाओगे। तुम्हारे 'परिवार' के लोग, तुम्हारे 'रिश्तेदार' फिर तुम्हारे साथ नहीं खड़े होंगे, तुम्हारे साथ काम नहीं करना चाहेंगे, चाय-समोसे में हिस्सा नहीं देंगे। इसलिए तुम चुपचाप उड़ते रहो, उड़कर दूर चले जाओ, और दूर, बहुत दूर, जहाँ तुम्हें कोई छू न सके। हम 'ड्रोन शॉट' में तुम्हारी उड़ान कैद कर लेंगे। अगर तुम डगमगाकर गिर पड़े, तब हम कह देंगे कि हमने नहीं कहा था, तुम ही उड़ना चाहते थे, हमारी स्क्रिप्ट में यह नहीं था, तुम ही अड़े थे। हम तब तुम्हें 'महान कलाकार' कहेंगे, 'परफेक्शनिस्ट' कहेंगे, और महान कलाकार बनने के लालच में तुम और दूर उड़ जाओगे, फिर तुमसे कभी मुलाकात नहीं होगी। हम फिर व्यस्त हो जाएंगे डांस रिहर्सल में—सामने ही फिर कोई 'अवॉर्ड शो' जरूर आ जाएगा।

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प्रकाशित: 10 अप्रैल 2026 • 3 मिनट पठन

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