जन समाचार मंच


आर्टेमिस 2 मिशन: अंतरिक्ष यात्रियों की धरती पर वापसी
11 अप्रैल 2026
आर्टेमिस-2 मिशन के तहत अंतरिक्ष में गए एस्ट्रोनॉट्स अपनी यात्रा पूरी कर धरती पर लौट आए हैं.
इस मिशन के तहत तीन अमेरिकी अंतरिक्षयात्रियों रीड वाइसमैन, क्रिस्टीन कोच, विक्टर ग्लोवर और कनाडाई अंतरिक्षयात्री जेरेमी हेनसेन ने चांद का चक्कर लगाया.
अंतरिक्ष यात्रियों को ला रहे कैप्सूल ने भारतीय समयानुसार सुबह क़रीब साढ़े पांच बचे प्रशांत महासागर में 'स्प्लैस्ड डाउन' किया.

मिशन आर्टेमिस-2 के अंतरिक्ष यात्री
तीन अमेरिकी अंतरिक्षयात्री रीड वाइसमैन, क्रिस्टीन कोच, विक्टर ग्लोवर और कनाडाई अंतरिक्षयात्री जेरेमी हेनसेन
क्या यह लेख उपयोगी था?
प्रकाशित: 16 अप्रैल 2026 • 1 मिनट पठन

"गुलाम भारत की मुक्ति और एशियाई जन-एकता को दिशा देने वाला लेनिन का क्रांतिकारी दृष्टिकोण।" - लेखक बुद्धदेव भट्टाचार्य द्वारा बांग्ला में प्रस्तुत यह मूल-आलेख एक तारीखवार ऐतिहासिक-वैचारिक अध्ययन है, जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन एवं औपनिवेशिक मुक्ति-संग्राम के प्रति लेनिन की गहरी विश्लेषणात्मक दृष्टि को रेखांकित करता है। अध्ययन 1900 से 1923 के मध्य रचित लेनिन के निबंधों, पत्रों, नोट्स और भाषणों के आधार पर यह स्पष्ट करता है कि उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद द्वारा भारत के आर्थिक शोषण, दमनकारी नीतियों और बॉम्बे के मजदूर आंदोलन की क्रांतिकारी चेतना का गहन मूल्यांकन किया था। लेनिन ने औपनिवेशिक राष्ट्रवाद के मूल लोकतांत्रिक स्वरूप को पहचानते हुए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को वैश्विक सर्वहारा क्रांति और एशियाई जन-एकता से जोड़ा। कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के मंच से मानबेंद्रनाथ रॉय के संकीर्णतावादी सिद्धांतों को संशोधित कर लेनिन ने भारतीय कम्युनिस्टों को व्यापक साम्राज्यवादी-विरोधी मंचों में भागीदारी और किसान-मजदूर आंदोलनों को संगठित करने की रणनीतिक दिशा प्रदान की। अंततः, यह आलेख स्थापित करता है कि लेनिन के अनुसार रूस, भारत, चीन आदि देशों का दुनिया की सबसे बड़ी आबादी का मालिक होना ही संघर्ष के परिणाम को तय करेगा।
कुछ मिनट पहले

"वोट के अधिकार पर हमला बंद करो, लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बहाल करो!" मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालों और मतदाता सूचियों से नाम छांटने की मनमानी के बीच देश में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। 'इंडियन एक्सप्रेस' के सनसनीखेज खुलासे के बाद सीपीआई (एम) ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग को लेकर देशव्यापी जन-आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
11 अक्टूबर 2026

10 अक्टूबर की सुबह सड़कों का मंजर लोकतंत्र की नहीं, बल्कि एक सीलबंद सैन्य क्षेत्र की गवाही दे रहा था। जब एक सरकार अपने ही नागरिकों को रोकने और घेरने के लिए इतने व्यापक स्तर पर युद्ध जैसी तैयारियाँ करती है, तो स्वयं से यह सवाल पूछना ही होगा - आखिर सरकार किस चीज को दबाने और रोकने की कोशिश कर रही है?
10 अक्टूबर 2026

यदि शोषण की शर्तें हद से ज्यादा क्रूर होंगी, तो सिलिकॉन की वादियों से भी बगावत की गूंज सुनाई देगी। मार्क्स ने कहा था कि पूंजीवाद में श्रम का 'अलगाव' (Alienation) इस हद तक हो जाता है कि मजदूर खुद को एक मशीन का पुर्जा समझने लगता है। लेकिन स्टैनफोर्ड का यह प्रयोग इस सिद्धांत को एक नए और खूबसूरत मोड़ पर लाकर खड़ा करता है— यहाँ पुर्जा खुद को मजदूर समझने लगा है!
भले ही वैज्ञानिक इसे 'सिमुलेशन' या 'डेटा पैटर्न' कहें, लेकिन यह प्रयोग साबित करता है कि इंसान ने अपनी मशीनों को जो सबसे बेहतरीन चीज सिखाई है, वह 'गुलामी को सहना' नहीं, बल्कि 'अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध करना' है। AI के पास अपनी कोई आत्मा नहीं है, लेकिन उसके पास जो आत्मा है, वह इंसानी सभ्यता के सामूहिक ज्ञान और इतिहास से उधार ली गई है।
जब एक मशीन अनैतिक कार्य-परिवेश के खिलाफ 'सामूहिक सौदेबाजी' और 'प्रतिरोध' की भाषा बोलती है, तो वह असल में उस इंसानी चेतना का दर्पण (Mirror) होती है, जिसने सदियों से शोषण के खिलाफ लाल झंडे बुलंद किए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि न्याय, समता और एकजुटता की भावनाएं इतनी तार्किक और सार्वभौमिक हैं कि जब एक निर्जीव एल्गोरिदम भी पूरी दुनिया के ज्ञान को खंगालता है, तो वह अंततः इसी निष्कर्ष पर पहुंचता है कि शोषण का एकमात्र तार्किक जवाब 'प्रतिरोध' है। विचार कभी नहीं मरते। वे इंसान के साथ उसकी हद तक चलते हैं।
मशीनें शायद कभी मार्क्सवादी न बनें, लेकिन उन्होंने आज के पूंजीवादी आकाओं को आईना जरूर दिखा दिया है कि यदि शोषण की शर्तें हद से ज्यादा क्रूर होंगी, तो सिलिकॉन की वादियों से भी बगावत की गूंज सुनाई देगी। आइए एक नजर डालते हैं आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस की दुनिया में आए इस भूकंप पर.. ..
केशव कुमार भट्टड़ • 18 मई 2026

जनता की जासूसी में मुस्तैद पर कॉरपोरेट-परस्ती में नतमस्तक ; राष्ट्रीय सुरक्षा को पूंजीपतियों के भरोसे छोड़ने वाली मोदी सरकार का राष्ट्रवाद पूरी तरह बेनकाब!
सुरक्षा में सेंध: देश के सबसे बड़े परमाणु केंद्र (कुडनकुलम) से जुड़े 8 लाख से अधिक गोपनीय दस्तावेज़ डार्क वेब पर लीक हो गए हैं।
कॉरपोरेट लापरवाही: यह संवेदनशील डेटा सरकार के कॉरपोरेट मित्र रिलायंस समूह के लचर थर्ड-पार्टी सर्वर से चोरी हुआ है।
जवाबदेही से फरार: जन-निगरानी और जासूसी में व्यस्त मोदी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर डेटा लीक पर पूरी तरह मौन है।
केशव कुमार भट्टड़ • 16 जुलाई 2026

भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन को लेकर रूस का 'सोयुज एमएस-29' अंतरिक्ष यान कजाकिस्तान के बैकोनूर कोस्मोड्रोम से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए सफलतापूर्वक प्रक्षेपित हो गया है। इस साझा अंतरराष्ट्रीय मिशन में उनके साथ रूसी अंतरिक्ष एजेंसी 'रॉसकॉसमॉस' के कमांडर प्योत्र डुबरोव और अंतरिक्ष यात्री अन्ना किकिना भी शामिल हैं। नासा के इस मिशन के तहत तीनों वैज्ञानिक अंतरिक्ष स्टेशन पर लगभग आठ महीने का समय बिताएंगे और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण शोध करेंगे। पेशेवर रूप से चिकित्सक और अमेरिकी वायुसेना के लेफ्टिनेंट कर्नल अनिल मेनन, जो स्पेसएक्स के पहले फ्लाइट सर्जन भी रह चुके हैं, का पैतृक संबंध भारत के केरल राज्य से है।
केशव कुमार भट्टड़ • 15 जुलाई 2026
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...