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आर्टेमिस 2 मिशन: अंतरिक्ष यात्रियों की धरती पर वापसी
11 अप्रैल 2026
आर्टेमिस-2 मिशन के तहत अंतरिक्ष में गए एस्ट्रोनॉट्स अपनी यात्रा पूरी कर धरती पर लौट आए हैं.
इस मिशन के तहत तीन अमेरिकी अंतरिक्षयात्रियों रीड वाइसमैन, क्रिस्टीन कोच, विक्टर ग्लोवर और कनाडाई अंतरिक्षयात्री जेरेमी हेनसेन ने चांद का चक्कर लगाया.
अंतरिक्ष यात्रियों को ला रहे कैप्सूल ने भारतीय समयानुसार सुबह क़रीब साढ़े पांच बचे प्रशांत महासागर में 'स्प्लैस्ड डाउन' किया.

मिशन आर्टेमिस-2 के अंतरिक्ष यात्री
तीन अमेरिकी अंतरिक्षयात्री रीड वाइसमैन, क्रिस्टीन कोच, विक्टर ग्लोवर और कनाडाई अंतरिक्षयात्री जेरेमी हेनसेन
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अपलोडर: VKA-FD9RRG • प्रकाशित: 16 अप्रैल 2026 • 1 मिनट पठन

पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य का साहित्य और सिनेमा के प्रति गहरा और ऐतिहासिक योगदान रहा है। उन्होंने ऋत्विक घटक के दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेज को सहेजकर प्रकाशित करवाया तथा 'रूपकला केंद्र' जैसी संस्था के माध्यम से युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिलाया। जादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों का उत्साहवर्धन करने से लेकर कोलकाता फिल्म फेस्टिवल में विश्वस्तरीय सिनेमा को बढ़ावा देने तक, वे सदैव तत्पर रहे। राजनीति की व्यस्तताओं के बीच भी कला, विचारों और आम जनता की रुचि को बेहतर बनाने के प्रति उनका यह समर्पण अतुलनीय था। सौम्य राजनीतिक व्यक्तित्व के धनी बुद्धदेव भट्टाचार्य के आम जनता की रुचियों को समृद्ध करने के लिए सदैव तत्पर रहने वाले एक सचेतन पहलू को याद कर रहें हैं प्रो. संजय मुखोपाध्याय। पढ़ें मूल बांग्ला देशहितैषी (06.09.2024) में छपे आलेख ''आम जनता की पसंद और सोच को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था' का हिन्दी अनुवाद।
28 अगस्त 2026

फिल्म 'चिटगाँव’ चमत्कृत करती है| मास्टर दा सूर्य सेन की भूमिका में एकमात्र मनोज वाजपई को छोड़कर कोई भी ‘स्टार’ अभिनेता या अभिनेत्री इस फिल्म में नहीं है| फिल्म में ‘झुंकु ’, सुबोध रॉय के बचपन का नाम, की भूमिका में दिलजाद हवाले ने सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया है| एक बुझी-बुझी-सी आँखों वाला किशोर जिसकी दोनों आँखों में दुनिया भर का अबोध-आश्चर्य भरा है – उन्ही आँखों से वह समाज को बदलने का सपना देखता है| किशोरी क्रांतिकारी प्रीतिलता की भूमिका में वेगा तमोटिया ने प्रभावित किया| कोई व्यावसायिक मसाला, लटके झटके भी नहीं है| फिल्म में कैमरे का काम और संगीत का व्यवहार खूब ही जोरदार तरीके से लिया गया है| दर्शक के हिसाब से यह फिल्म हिंदी फिल्म जगत में मील का पत्थर है| इस तरह की शुद्ध देश-प्रेम से भरपूर संपूर्ण अंतिम फिल्म कौन सी थी, कब देखी, याद नहीं| सामाजिक दायित्व-बोध न होने पर ऐसी फ़िल्में बनाना असंभव है|
27 अगस्त 2026

सुबोध राय (झुंकु राय) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे युवा क्रांतिकारियों में से एक थे। मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्होंने मास्टरदा सूर्यसेन के नेतृत्व में 1930 के चटगांव शस्त्रागार छापे और जलालाबाद युद्ध में वीरतापूर्वक भाग लिया। कम उम्र में सेलुलर जेल (काला पानी) की कठिन सजा काटने के बाद भी उनका राष्ट्रप्रेम डिगा नहीं। आजादी के बाद उन्होंने पेंशन या अन्य सरकारी सुविधाएं लेने से इनकार कर सादगीपूर्ण जीवन बिताया। उनका निष्कलंक और त्यागमय जीवन भावी पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। चटगांव आंदोलन पर बनी बॉलीवुड फिल्म 'Chittagong' (2012) की कहानी मुख्य रूप से युवा झुंकु राय (सुबोध राय) के जीवन और उनके दृष्टिकोण पर ही आधारित है।
26 अगस्त 2026

यदि शोषण की शर्तें हद से ज्यादा क्रूर होंगी, तो सिलिकॉन की वादियों से भी बगावत की गूंज सुनाई देगी। मार्क्स ने कहा था कि पूंजीवाद में श्रम का 'अलगाव' (Alienation) इस हद तक हो जाता है कि मजदूर खुद को एक मशीन का पुर्जा समझने लगता है। लेकिन स्टैनफोर्ड का यह प्रयोग इस सिद्धांत को एक नए और खूबसूरत मोड़ पर लाकर खड़ा करता है— यहाँ पुर्जा खुद को मजदूर समझने लगा है!
भले ही वैज्ञानिक इसे 'सिमुलेशन' या 'डेटा पैटर्न' कहें, लेकिन यह प्रयोग साबित करता है कि इंसान ने अपनी मशीनों को जो सबसे बेहतरीन चीज सिखाई है, वह 'गुलामी को सहना' नहीं, बल्कि 'अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध करना' है। AI के पास अपनी कोई आत्मा नहीं है, लेकिन उसके पास जो आत्मा है, वह इंसानी सभ्यता के सामूहिक ज्ञान और इतिहास से उधार ली गई है।
जब एक मशीन अनैतिक कार्य-परिवेश के खिलाफ 'सामूहिक सौदेबाजी' और 'प्रतिरोध' की भाषा बोलती है, तो वह असल में उस इंसानी चेतना का दर्पण (Mirror) होती है, जिसने सदियों से शोषण के खिलाफ लाल झंडे बुलंद किए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि न्याय, समता और एकजुटता की भावनाएं इतनी तार्किक और सार्वभौमिक हैं कि जब एक निर्जीव एल्गोरिदम भी पूरी दुनिया के ज्ञान को खंगालता है, तो वह अंततः इसी निष्कर्ष पर पहुंचता है कि शोषण का एकमात्र तार्किक जवाब 'प्रतिरोध' है। विचार कभी नहीं मरते। वे इंसान के साथ उसकी हद तक चलते हैं।
मशीनें शायद कभी मार्क्सवादी न बनें, लेकिन उन्होंने आज के पूंजीवादी आकाओं को आईना जरूर दिखा दिया है कि यदि शोषण की शर्तें हद से ज्यादा क्रूर होंगी, तो सिलिकॉन की वादियों से भी बगावत की गूंज सुनाई देगी। आइए एक नजर डालते हैं आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस की दुनिया में आए इस भूकंप पर.. ..
केशव कुमार भट्टड़ • 18 मई 2026

जनता की जासूसी में मुस्तैद पर कॉरपोरेट-परस्ती में नतमस्तक ; राष्ट्रीय सुरक्षा को पूंजीपतियों के भरोसे छोड़ने वाली मोदी सरकार का राष्ट्रवाद पूरी तरह बेनकाब!
सुरक्षा में सेंध: देश के सबसे बड़े परमाणु केंद्र (कुडनकुलम) से जुड़े 8 लाख से अधिक गोपनीय दस्तावेज़ डार्क वेब पर लीक हो गए हैं।
कॉरपोरेट लापरवाही: यह संवेदनशील डेटा सरकार के कॉरपोरेट मित्र रिलायंस समूह के लचर थर्ड-पार्टी सर्वर से चोरी हुआ है।
जवाबदेही से फरार: जन-निगरानी और जासूसी में व्यस्त मोदी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर डेटा लीक पर पूरी तरह मौन है।
केशव कुमार भट्टड़ • 16 जुलाई 2026

भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन को लेकर रूस का 'सोयुज एमएस-29' अंतरिक्ष यान कजाकिस्तान के बैकोनूर कोस्मोड्रोम से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए सफलतापूर्वक प्रक्षेपित हो गया है। इस साझा अंतरराष्ट्रीय मिशन में उनके साथ रूसी अंतरिक्ष एजेंसी 'रॉसकॉसमॉस' के कमांडर प्योत्र डुबरोव और अंतरिक्ष यात्री अन्ना किकिना भी शामिल हैं। नासा के इस मिशन के तहत तीनों वैज्ञानिक अंतरिक्ष स्टेशन पर लगभग आठ महीने का समय बिताएंगे और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण शोध करेंगे। पेशेवर रूप से चिकित्सक और अमेरिकी वायुसेना के लेफ्टिनेंट कर्नल अनिल मेनन, जो स्पेसएक्स के पहले फ्लाइट सर्जन भी रह चुके हैं, का पैतृक संबंध भारत के केरल राज्य से है।
केशव कुमार भट्टड़ • 15 जुलाई 2026
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