भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन को लेकर रूस का 'सोयुज एमएस-29' अंतरिक्ष यान कजाकिस्तान के बैकोनूर कोस्मोड्रोम से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए सफलतापूर्वक प्रक्षेपित हो गया है। इस साझा अंतरराष्ट्रीय मिशन में उनके साथ रूसी अंतरिक्ष एजेंसी 'रॉसकॉसमॉस' के कमांडर प्योत्र डुबरोव और अंतरिक्ष यात्री अन्ना किकिना भी शामिल हैं। नासा के इस मिशन के तहत तीनों वैज्ञानिक अंतरिक्ष स्टेशन पर लगभग आठ महीने का समय बिताएंगे और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण शोध करेंगे। पेशेवर रूप से चिकित्सक और अमेरिकी वायुसेना के लेफ्टिनेंट कर्नल अनिल मेनन, जो स्पेसएक्स के पहले फ्लाइट सर्जन भी रह चुके हैं, का पैतृक संबंध भारत के केरल राज्य से है।
"धरती की सीमाओं को लांघकर अंतरिक्ष की गहराइयों में विज्ञान का परचम लहराती भारतीय मेधा।"
अंतरिक्ष विज्ञान: रूसी अंतरिक्ष यान 'सोयुज MS-29' से भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन की उड़ान
कजाकिस्तान के बैकोनूर कोस्मोड्रोम से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए सफल प्रक्षेपण
नासा (NASA) और रॉसकॉसमॉस (Roscosmos) का साझा मिशन; अंतरिक्ष में आठ महीने तक चलेगा वैज्ञानिक अनुसंधान

नई दिल्ली, 14 जुलाई। अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) के क्षेत्र में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री (Astronaut) अनिल मेनन को लेकर रूस के सोयुज एमएस-29 (Soyuz MS-29) अंतरिक्ष यान ने सफलतापूर्वक अंतरिक्ष के लिए उड़ान भर ली है। मंगलवार को कजाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक बैकोनूर कोस्मोड्रोम (Baikonur Cosmodrome) से इस अंतरिक्ष यान को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station - ISS) के लिए प्रक्षेपित (Launch) किया गया। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन के साथ इस मिशन पर रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस (Roscosmos) के कमांडर प्योत्र डुबरोव (Pyotr Dubrov) और अंतरिक्ष यात्री अन्ना किकिना (Anna Kikina) भी रवाना हुए हैं।
मिशन का तकनीकी विवरण और उद्देश्य
निर्धारित उड़ान योजना (Flight Plan) के अनुसार, प्रक्षेपण के लगभग तीन घंटे बाद सोयुज अंतरिक्ष यान अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के साथ सफलतापूर्वक जुड़ जाएगा (Docking)। आईएसएस पर पहुँचने के बाद तीनों अंतरिक्ष यात्री वहाँ लगभग आठ महीने का समय बिताएंगे। इस लंबी अवधि के मिशन के दौरान वे कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग, तकनीकी अनुसंधान (Technological Research) और भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों (Deep Space Missions) के लिए आवश्यक डेटा एकत्र करने का कार्य करेंगे। इन वैज्ञानिक प्रयोगों में मुख्य रूप से शामिल हैं: माइक्रोग्रैविटी (Microgravity) का मानव शरीर पर प्रभाव: अंतरिक्ष के शून्य गुरुत्वाकर्षण वातावरण में मानव शरीर की जैविक और शारीरिक प्रणालियों में होने वाले बदलावों का अध्ययन। बायोमेडिकल रिसर्च (Biomedical Research): अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए नई चिकित्सा तकनीकों का परीक्षण। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का विकास: भविष्य के चंद्र और मंगल अभियानों के लिए नई प्रणालियों का मूल्यांकन।

फ्लाइट सर्जन से अंतरिक्ष यात्री तक: अनिल मेनन का सफर
अनिल मेनन को नासा द्वारा वर्ष 2021 में अंतरिक्ष यात्री उम्मीदवार (Astronaut Candidate) के रूप में चुना गया था। बहुमुखी प्रतिभा के धनी मेनन पेशेवर रूप से एक चिकित्सक (Emergency Medicine Physician) होने के साथ-साथ अमेरिकी वायुसेना में लेफ्टिनेंट कर्नल भी हैं। अंतरिक्ष चिकित्सा (Space Medicine) के क्षेत्र में उनका योगदान बेहद अनूठा रहा है: उन्होंने एलन मस्क की निजी अंतरिक्ष एजेंसी स्पेसएक्स (SpaceX) के पहले 'फ्लाइट सर्जन' (Flight Surgeon) के रूप में कार्य किया है। उन्होंने स्पेसएक्स के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन (Demo-2) के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की चिकित्सा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। चिकित्सा और सैन्य विमानन (Military Aviation) के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखने वाले अनिल मेनन की यह पहली अंतरिक्ष यात्रा (Maiden Spaceflight) है।
भारत और यूक्रेन से जुड़ाव
भारतीय उपमहाद्वीप के लिए यह मिशन बेहद गौरवशाली है। अनिल मेनन का पैतृक संबंध भारत के केरल राज्य से है। उनके पिता भारतीय हैं और उनकी माता यूक्रेन की रहने वाली हैं। उनकी यह ऐतिहासिक उड़ान न केवल अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष विज्ञान में प्रवासी भारतीयों की बढ़ती वैज्ञानिक भागीदारी को भी रेखांकित करती है। सोचने वाली बात यह है कि विश्वस्तरीय भारतीय मेधा होने के बावजूद ऐसे अंतरिक्ष अभियानों में भारत कहाँ खड़ा है ?
साभार :बांग्ला दैनिक गणशक्ति । 15 जुलाई 2026
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