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70 प्रतिशत मतदाता खामोश, नामी संस्था ने जारी नहीं किया एग्जिट पोल

डॉ. अशोक सिंह•01 मई 20264 मिनट पठन72 बार पढ़ा गया
जमीनी हकीकत और आंकड़ों के बीच कितना अंतर है, इसका उत्तर चुनाव परिणाम घोषित होने के दिन ही मिलेगा।

 70 प्रतिशत मतदाता खामोश, 

नामी संस्था ने जारी नहीं किया एग्जिट पोल 

पश्चिम बंगाल: विधानसभा चुनाव को लेकर मशहूर सर्वे एजेंसी 'एक्सिस माई इंडिया' (Axis My India) ने साफ कर दिया है कि वह इस साल राज्य में कोई भी एग्जिट पोल (Exit Poll) जारी नहीं करेगी। संस्था के प्रमुख और विख्यात चुनावी विश्लेषक प्रदीप गुप्ता ने गुरुवार को बताया कि राज्य में मतदान के बाद सर्वेक्षण करने के दौरान उन्हें अभूतपूर्व समस्याओं का सामना करना पड़ा है।

प्रदीप गुप्ता के शब्दों में, "हमारी पद्धति मतदाताओं से आमने-सामने बात करने की है। लेकिन पहले चरण के बाद जब हम मैदान में उतरे, तो देखा गया कि लगभग 60 से 70 प्रतिशत लोग पूरी तरह खामोश हैं। वे 'हाँ' या 'ना'—किसी भी तरह का उत्तर देने को तैयार नहीं हैं।" एनडीटीवी (NDTV) को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में जुटाए गए आंकड़े बिल्कुल भी प्रतिनिधित्वपूर्ण नहीं हैं।

उन्होंने आगे कहा, "जब केवल 20-30 प्रतिशत लोगों से ही जानकारी मिल पा रही है, तो उसके आधार पर कोई भी विश्वसनीय पूर्वानुमान देना गैर-जिम्मेदाराना होगा। चुनाव को लेकर एक तरह का डर या अनिच्छा साफ दिख रही है। इस स्थिति में आंकड़ों की सटीकता बनाए रखना संभव नहीं है।" हालांकि पहले एक और बार सर्वेक्षण की कोशिश करने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में एजेंसी ने स्पष्ट कर दिया कि वे अंतिम रूप से कोई एग्जिट पोल जारी नहीं करेंगे।

एक बयान में एक्सिस माई इंडिया ने बताया कि पश्चिम बंगाल में इस बार के सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिक्रिया देने से इन्कार कर दिया है। लगभग 70 प्रतिशत मतदाता सर्वे में शामिल ही नहीं होना चाहते थे, जो अतीत की तुलना में असामान्य है। ऐसी परिस्थिति में जुटाए गए तथ्य के  संख्यागत रूप से विकृत  होने की प्रबल आशंका है।

दूसरी ओर, 29 अप्रैल को प्रकाशित विभिन्न एग्जिट पोल के पूर्वानुमानों में स्पष्ट विभाजन देखा गया है। अधिकांश एजेंसियों ने दावा किया है कि भाजपा पहली बार पश्चिम बंगाल में सत्ता में आ सकती है। हालांकि, कुछ सर्वेक्षण एजेंसियों का कहना है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ही सत्ता बरकरार रखेगी।

मैट्रिज़ (Matrize), पी-मार्क (P-MARQ), प्रजा पोल्स और पोल्स डायरी—इन एजेंसियों ने भाजपा को आगे रखा है। दूसरी ओर, जनमत और पीपल्स पल्स के अनुसार, तृणमूल की ही वापसी होगी। परिणामस्वरूप, चुनाव परिणामों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी बीच, 'चाणक्य' के एग्जिट पोल का अनुमान है कि पश्चिम बंगाल की सत्ता भाजपा के हाथ में जा रही है।

उनके पूर्वानुमान के अनुसार, भाजपा को लगभग 192 सीटें मिल सकती हैं और तृणमूल को 100 सीटें।

हालांकि, एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर सवाल नए नहीं हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में अधिकांश सर्वेक्षणों ने कांटे की टक्कर का पूर्वानुमान लगाया था। लेकिन वास्तव में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल ने भारी जीत हासिल कर 211 सीटों पर कब्जा किया, जबकि भाजपा 77 पर ही रुक गई। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी अधिकांश एग्जिट पोल ने भाजपा को भारी बहुमत दिया था, लेकिन अंततः नरेंद्र मोदी की पार्टी को 240 से ज्यादा सीटें नहीं मिल सकीं। चुनावों के बारे में कई विशेषज्ञ एग्जिट पोल के परिणामों को अनावश्यक महत्व देने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि वैज्ञानिक आधार पर पर्याप्त नमूनों से आंकड़े जुटाकर सर्वेक्षण करने के बजाय, कई मामलों में एग्जिट पोल के नाम पर इनका उपयोग घोड़ों की खरीद-फरोख्त (विधायकों की खरीद) या शेयर बाजार को प्रभावित करने के हथियार के रूप में किया गया है। पुराने अनुभवों को देखते हुए ये सर्वे रिपोर्ट कतई भरोसेमंद नहीं हैं। इसके अलावा, सभी सर्वेक्षण एजेंसियां एक ही निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पा रही हैं, जिसका अर्थ है कि किसी न किसी का सर्वे गलत साबित होना तय है।

हकीकत में, 'एक्सिस माई इंडिया' जैसी सर्वेक्षण एजेंसी का पीछे हटना और परस्पर विरोधी सर्वेक्षण—इन दोनों ने मिलकर इस बार के पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर अनिश्चितता को और गहरा कर दिया है। जमीनी हकीकत और आंकड़ों के बीच कितना अंतर है, इसका उत्तर चुनाव परिणाम घोषित होने के दिन ही मिलेगा।

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70 प्रतिशत मतदाता खामोश, नामी संस्था ने जारी नहीं किया एग्जिट पोल

प्रकाशित: 01 मई 2026 • 4 मिनट पठन

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