बुधैली स्टेट सहित पूरे पूर्णिया जिले में कॉ अजीत सरकार के नेतृत्व में पार्टी एवं किसान सभा ने जो भूमि आन्दोलन चलाये उसके फलस्वरूप हजार एकड़ से अधिक सीलिंग से फाजिल जमीन का वितरण दलितों, महादलितों एवं अल्पसंख्यकों के बीच हो पाया ।
जन समाचार मंच
बुधैली स्टेट सहित पूरे पूर्णिया जिले में कॉ अजीत सरकार के नेतृत्व में पार्टी एवं किसान सभा ने जो भूमि आन्दोलन चलाये उसके फलस्वरूप हजार एकड़ से अधिक सीलिंग से फाजिल जमीन का वितरण दलितों, महादलितों एवं अल्पसंख्यकों के बीच हो पाया ।

शहीद कॉमरेड अजीत सरकार को लाल सलाम!
अजीत सरकार का जन्म पूर्णिया शहर के दुर्गाबाड़ी इलाके में एक प्रतिष्ठित बांग्लाभाषी परिवार में दिनांक 23 नवम्बर 1947 को हुआ था। स्वर्गीय जीतेन्द्र चन्द्र सरकार एवं स्वर्गीय प्रीतिरानी सरकार के वे तीसरे सन्तान थे । उनके बाकी तीन भाईयों का नाम है, स्वर्गीय कल्याण चन्द्र सरकार, बिपिन चन्द्र सरकार एवं प्रदीप सरकार ।
कसबा स्थित उच्च विद्यालय से मैट्रिक उत्तीर्ण होने के बाद उन्होने इन्टर डी एस कॉलेज, कटिहार से किया । फिर छपरा महाविद्यालय से वह स्नातक हुये । पूर्णिया स्थित ब्रज मोहन ठाकुर विधि महाविद्यालय से कानून की डिग्री भी हासिल की ।
अपने कॉलेज जीवन से ही वह छात्र आन्दोलन से जुड़े थे एवं भारत का छात्र फेडरेशन के सक्रिय कार्यकर्ता थे । पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही वे धीरे धीरे सघन रूप से अपने जिला के भूमिसंघर्ष, किसान आन्दोलन, जमिन्दारों के जुल्म के खिलाफ लड़ाईयों से जुड़ते चले गये । इन्ही दिनों उनका विवाह हुआ । उनकी पत्नी माधबी सरकार आगे चल कर खुद भी सीपीआई(एम) की ओर से पूर्णिया का विधायक बनी थी । अजीत एवं माधबी के तीन सन्तानें हैं श्रीमती रीमा सरकार, श्रीमती प्रियंका सरकार एवं श्री अमित सरकार ।
वर्ष 1978- 79 में कॉ अजीत सरकार ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की । वर्ष 1980 में बिहार में विधानसभा के चुनाव हुये । कॉ अजीत सरकार पूर्णिया से विधायक के रूप में चुने गये । उसके बाद से लगातार चार बार वह पूर्णिया से विधायक बने और मृत्यु तक विधायक ही रहे ।
तत्कालीन पुर्णिया जिला स्थित बुधैली स्टेट में आदिवासी भूमिहीनो मे जमीन्दार के जुल्म के खिलाफ क्षोभ बढ़ रहा था । सीपीआई(एम) के नेतृत्व में वहाँ जबर्दस्त आन्दोलन खड़ा हुआ । कॉमरेड अजीत सरकार उस आन्दोलन में जनता के सबसे प्रिज्ञय, अग्रणी नेता के रूप में उभर कर आये । उस समय बुधैली स्टेट की पहरेदारी करने वाले पप्पु यादव ने एक आन्दोलनकारी परिवार का बच्चा राजेन्द्र हेम्ब्रम की, गोली दाग कर हत्या कर दी । उस हत्या के बाद आन्दोलन और उग्र हो उठा । वर्ष 1992 में एक आन्दोलनकारी साथी फागू बास्की शहीद हुये । वर्ष 1993 में पूरे बिहार राज्य में वाम दलों का भूमि आन्दोलन संयुक्त रूप ले लिया । जलालगढ़ में कॉ सगीर मियाँ एवं कॉ शुकरु मियाँ आन्दोलन के शहीद हुये । बुधैली स्टेट सहित पूरे पूर्णिया जिले में कॉ अजीत सरकार के नेतृत्व में पार्टी एवं किसान सभा ने जो भूमि आन्दोलन चलाये उसके फलस्वरूप हजार एकड़ से अधिक सीलिंग से फाजिल जमीन का वितरण दलितों, महादलितों एवं अल्पसंख्यकों के बीच हो पाया ।
14 जून 1998 को पूर्णिया के सुभाषनगर इलाके में कॉ अजीत सरकार सहित हरेन्द्र शर्मा (गाड़ीचालक) एवं कॉ अस्फाकुर रहमान की नृशंस हत्या की गई ।
शहादत के अठ्ठाईस वर्षों के बाद भी कॉमरेड अजीत सरकार पूर्णिया जिला में बसे लाखों आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक, भूमिहीन किसान, खेतमज़दूर व गरीब जनता के बीच न सिर्फ सबसे प्रिय नाम बल्कि जुल्म, अन्याय के खिलाफ संघर्ष के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं ।
शहीद कॉमरेड अजीत सरकार को लाल सलाम !
(विद्युत पाल साहित्यकार तथा 'बिहार हेराल्ड" पत्रिका के सम्पादक हैं।)
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प्रकाशित: 14 जून 2026 • 3 मिनट पठन

प्रश्न करना /
राजद्रोह /
आंदोलन करना /
देशद्रोह /
हक़ मांगना /
राष्ट्रद्रोह /
बना दिया ।
इन सबके बावजूद /
लोग डर नहीं रहे /
छोटे-छोटे बच्चे /
खिलाफत को /
उतारू हैं ।
16 सितंबर 2026

मंगलवार दोपहर गड़वेता के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी।
16 सितंबर 2026

हम तो /
नारी शक्ति के समक्ष /
नतमस्तक हैं ।
हम सभी /
एक स्त्री से ही तो /
जनमे हैं ।
उसी के संरक्षण में /
हमारा स्वर्णिम /
बालपन बीता है ।
12 सितंबर 2026

हिंदी क्षेत्र के वामपंथी आंदोलन के शलाका पुरुष गणेश शंकर विद्यार्थी के संस्मरणों पर केंद्रित पुस्तक ‘मार्क्सवाद : मेरा संघर्ष पथ’ का हाल ही में प्रकाशन हुआ है। 1 सितंबर को पटना के जमाल रोड स्थित सीपीआई(एम) कार्यालय में पार्टी पोलित ब्यूरो सदस्य अशोक धवले के हाथों लोकार्पण किया जा रहा है। यह पुस्तक गणेश शंकर विद्यार्थी ('गणेश दा') के लगभग आठ दशकों लंबे राजनीतिक और वैचारिक जीवन का दस्तावेज है। एक समृद्ध जमींदार परिवार में जन्म लेने के बावजूद, उन्होंने सामंती व्यवस्था के खिलाफ वर्गीय चेतना को अपनाया और बिहार में कम्युनिस्ट आंदोलन व स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीपीआई(एम) के बिहार राज्य सचिव के रूप में उन्होंने कठिन दौर में पार्टी का नेतृत्व किया और भूमि आंदोलनों से गरीबों को जोड़ा। अपने अंतिम समय तक वे मार्क्सवादी अध्ययन, आंदोलन और संगठन के प्रति पूरी तरह समर्पित रहे।
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