साम्प्रदायिकता के जरिए लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है। मेहनतकश लोग — किसान, मजदूर, आम आदमी — एकजुट होकर संघर्ष करते हैं, लेकिन साम्प्रदायिक जहर उनके बीच फूट डालकर उन्हें विभाजित कर देता है।
जन समाचार मंच
साम्प्रदायिकता के जरिए लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है। मेहनतकश लोग — किसान, मजदूर, आम आदमी — एकजुट होकर संघर्ष करते हैं, लेकिन साम्प्रदायिक जहर उनके बीच फूट डालकर उन्हें विभाजित कर देता है।

सीपीआई(एम) महासचिव एम ए बेबी का संदेश: कोलकाता में हिंदी न्यूज़ पोर्टल 'वाम की आवाज़' से विशेष बातचीत में।

सीपीआई(एम) महासचिव एम ए बेबी का संदेश
'दोस्तों, बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। भाजपा की सरकार बन गई है। इस नई स्थिति में वामपंथी विचारधारा के लोग चिंतित हैं, क्योंकि बंगाल की प्रगतिशील परंपरा पर हमला हो रहा है।'
कोलकाता, 16 जून। मंगलवार को सायं 'वाम की आवाज़' के कोलकाता कार्यालय में सीपीआई(एम) के महासचिव कॉमरेड एम ए बेबी ने दौरा किया। 'वाम की आवाज़' के संपादक मंडल के सदस्य राजीव पांडेय ने उनसे हिंदी में खुलकर बात की।
सवालों के जवाब में कॉमरेड बेबी ने साफ कहा कि बंगाल में भाजपा की बहुमत वाली सरकार पूरे इतिहास में पहली बार बनी है। इससे पहले भाजपा ने ममता बनर्जी की पार्टी के साथ तालमेल कर कुछ सीटें जीती थीं, लेकिन अब भाजपा अकेले सत्ता में है। यह बंगाल की प्रगतिशील संस्कृति और मेहनतकश लोगों के लिए बड़ी चुनौती है।
आरएसएस-भाजपा का फासीवादी चरित्र
कॉमरेड बेबी ने हिंदी भाषा पर अपनी कमज़ोर पकड़ को स्वीकार करते हुए भी हिंदी में ही बातचीत जारी रखी। उन्होंने बताया कि भाजपा की विचारधारा का सूत्रधार आरएसएस है, जिसका मूल चरित्र फासीवादी और मनुवादी है। यह साधारण हिंदू लोगों के भले के लिए नहीं, बल्कि ब्राह्मणवादी वर्चस्व के लिए काम करती है।
एम ए बेबी ने कहा कि साम्प्रदायिकता के जरिए लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है। मेहनतकश लोग — किसान, मजदूर, आम आदमी — एकजुट होकर संघर्ष करते हैं, लेकिन साम्प्रदायिक जहर उनके बीच फूट डालकर उन्हें विभाजित कर देता है।
उन्होंने याद दिलाया कि आजादी के समय नोआखाली जैसे दंगों में कितना खून बहा था। आज भी वही खतरा है। वामपंथी शक्तियों का काम है कि लोगों को एकजुट करें, वर्ग संघर्ष को आगे बढ़ाएं और साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई लड़ें।
वामपंथ का रास्ता: संघर्ष और एकता
कॉमरेड एम ए बेबी ने जोर देकर कहा कि लाल झंडे के नीचे मेहनतकश लोगों के मुद्दों पर संघर्ष करना होगा। उन्होंने खास तौर पर युवाओं से अपील की कि वे स्थानीय भाषा बांग्ला के साथ और हिंदी में लोगों से जुड़ें, जिसको जैसे समझाना आसान हो। उन्होंने हिंदी भाषा के महत्व को स्वीकार करते हुए अपनी सीमित हिंदी के बावजूद हिंदी में बातचीत की, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग समझ सकें।
उन्होंने कहा कि “संघर्ष का रास्ता अपनाना होगा। जहाँ आम आदमी की समस्या है, वहां लाल झंडे के साथ पहुँचना होगा।”
हिंदी में बोलने का मौका देने के लिए कॉमरेड एम ए बेबी ने 'वाम की आवाज़' का आभार जताते हुए कहा कि भाजपा-आरएसएस की सत्ता मेहनतकश जनता पर दोहरी मार है — आर्थिक लूट और सांस्कृतिक फासीवाद। वामपंथी शक्तियां इस हमले के खिलाफ एकजुट होकर लड़ रही हैं। बंगाल की प्रगतिशील विरासत — रवींद्रनाथ टैगोर, ताराशंकर बंदोपाध्याय की परंपरा — को बचाने और आगे बढ़ाने का समय है। हमें किसानों, खेत और कारखाना मजदूरों को एकजुट करने के लिए काम करना होगा। हमारा काम लोगों को जोड़ना है लेकिन बीजेपी का रास्ता लोगों को बाँटना है, यह बात जनता को समझानी होगी।
लाल सलाम!
जय मेहनतकश जनता! संघर्ष जारी रहेगा।

इस अवसर पर 'वाम की आवाज़' हिंदी न्यूज़ पोर्टल के संपादक मंडल के सदस्य राजीव पांडेय के साथ "मार्क्सवादी पथ' पत्रिका (बांग्ला) के सह-संपादक शांतनु दे,' लेफ्ट व्यूज' (कोलकाता) के सौभिक घोष, संदीपन चक्रवर्ती उपस्थित थे।
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अपलोडर: VKA-N9LYCE • प्रकाशित: 17 जून 2026 • 4 मिनट पठन

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