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जनता की अदालत में जनता का इतिहास: कल्लोल मजूमदार

राजीव कुमार पाण्डेय•20 जून 20263 मिनट पठन20 बार पढ़ा गया

श्यामाप्रसाद सहित मुस्लिम लीग और तत्कालीन नेतृत्व सत्ता हथियाने के लिए इस देश का विभाजन चाहता था। इस चाहत ने वास्तव में लोगों को एक कठिन परिस्थिति में धकेल दिया, जिसका खामियाजा देश विभाजन के 25-30 साल बाद भी लोग भुगतते रहे।

जनता की अदालत में जनता का इतिहास: कल्लोल मजूमदार

 "देश का विभाजन वास्तव में आम जनता के लिए अकथनीय पीड़ा का कारण बना था। साम्राज्यवाद के शह पर देश का विभाजन हुआ था। उसी को 'पश्चिम बंगाल दिवस' के रूप में अपनी सफलता मानकर मनाया जा रहा है। विकृत इतिहास का मुकाबला करने के लिए सीपीआई (एम) वास्तविक इतिहास को सामने लाएगा।"

21-24 जून तक कोलकाता में आयोजित 'मानुषेर दरबारे मानुषेर इतिहास' कार्यक्रम की व्याख्या करते हुए सीपीआई(एम) के कोलकाता जिला सचिव कल्लोल मजूमदार ने यह बात कही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को 'पश्चिम बंगाल दिवस' मनाने के एक कार्यक्रम में राज्य में आए हैं। तारकेश्वर की जनसभा में उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल पहली बार जंजीरों से मुक्त हुआ है। उनका दावा है कि हिंदू महासभा के नेता श्यामाप्रसाद मुखर्जी के योगदान को छिपाने के लिए ही अतीत में 'पश्चिम बंगाल दिवस' नहीं मनाया जाता था। तारकेश्वर की सभा में उन्होंने यह भी बताया कि 20 जून को ही यह 'पश्चिम बंगाल दिवस' क्यों मनाया जा रहा है।

कल्लोल मजूमदार ने कहा, "चुनाव जीतने के बाद 20 तारीख को केंद्र में रखकर विभाजन को विकृत तरीके से पेश करने की कोशिश की जा रही है। देश का विभाजन वास्तव में शरणार्थीयों के लिए अत्यंत दर्दनाक था। हम वामपंथियों और तत्कालीन नेताओं ने इस बात का विरोध किया था, लेकिन जब अन्य शक्तियों ने विशेष रूप से साम्राज्यवाद के शह पर माउंटबेटन का साथ दिया, तो उस समय वामपंथी विभाजन को रोक नहीं पाए।"

मजूमदार ने आगे कहा, "श्यामाप्रसाद सहित मुस्लिम लीग और तत्कालीन नेतृत्व सत्ता हथियाने के लिए इस देश का विभाजन चाहता था। इस चाहत ने वास्तव में लोगों को एक कठिन परिस्थिति में धकेल दिया, जिसका खामियाजा देश विभाजन के 25-30 साल बाद भी लोग भुगतते रहे।"

भाजपा के बयान के मुताबिक, अप्रैल 1947 में तारकेश्वर में हिंदू महासभा की प्रांतीय स्तर की बैठक हुई थी। वहाँ बंगाल का विभाजन कर पश्चिम बंगाल को भारत में शामिल करने का निर्णय लिया गया था। बाद में 20 जून को बंगाल विधानसभा के मतदान में इसे मंजूरी मिली। इसी वजह से मोदी की सभा तारकेश्वर में आयोजित की गई।

लेकिन हकीकत यह है कि 3 जून 1947 को ही तत्कालीन ब्रिटिश शासन ने देश के विभाजन के फैसले की घोषणा कर दी थी। उस समय बंगाल की प्रांतीय विधानसभा में हिंदू महासभा के एकमात्र प्रतिनिधि श्यामाप्रसाद ही थे। बंगाल विधानसभा में ब्रिटिश शासन के फैसले पर मुहर लगी थी, लेकिन 250 सदस्यों वाली विधानसभा में यह केवल श्यामाप्रसाद के कारण नहीं हुआ था। अतीत में किसी भी राजनीतिक शक्ति ने देश के विभाजन को 'सफलता' के रूप में वर्णित नहीं किया था।

मजूमदार ने इसी संदर्भ में कहा, "भाजपा इतिहास को विकृत करके लोगों के सामने लाना चाहती है। इसके विपरीत, हम वामपंथी लोगों तक असली सच्चाई पहुँचाने का काम कर रहे हैं।"

 

साभार : गणशक्ति

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जनता की अदालत में जनता का इतिहास: कल्लोल मजूमदार

प्रकाशित: 20 जून 2026 • 3 मिनट पठन

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