हम तो /
नारी शक्ति के समक्ष /
नतमस्तक हैं ।
हम सभी /
एक स्त्री से ही तो /
जनमे हैं ।
उसी के संरक्षण में /
हमारा स्वर्णिम /
बालपन बीता है ।
जन समाचार मंच
हम तो /
नारी शक्ति के समक्ष /
नतमस्तक हैं ।
हम सभी /
एक स्त्री से ही तो /
जनमे हैं ।
उसी के संरक्षण में /
हमारा स्वर्णिम /
बालपन बीता है ।

-हूबनाथ
यदि हमारे किसी
आचरण या कृत्य से
किसी को भी
ठेस पहुंची हो
तो हम
दोनों हाथ जोड़कर
माफ़ी मांगते हैं
हमारा उद्देश्य
किसी महिला का
अपमान करना
या उनकी उपेक्षा करना
कभी नहीं रहा
हम तो
नारी शक्ति के समक्ष
नतमस्तक हैं
हम सभी
एक स्त्री से ही तो
जनमे हैं
उसी के संरक्षण में
हमारा स्वर्णिम
बालपन बीता है
स्त्री ही हमारे अस्तित्व की
मूल आधार है
उसकी उपेक्षा
और अपमान
तो हम
सोच भी नहीं सकते
दरअसल
हमारी मूल समस्या
हमारे ही साधु-संत हैं
अंततः
वे सभी पुरुष ही हैं
हालांकि
अधिकांश
अत्यंत
उच्च विद्याविभूषित
प्रकांड पंडित हैं
किंतु
आप तो जानते ही हैं
कि वर्तमान शिक्षा
और सच्चरित्रता का
कोई संबंध ही नहीं है
दूसरे
हमारा खान-पान भी
राजसी है
दूध दही फल मेवे
रबड़ी मिठाई
शुद्ध देसी घी के बिना
भोजन ही नहीं होता
आप तो जानते ही हैं
1906 में गांधीजी ने
दूध लेना बंद कर दिया
क्योंकि
इससे ब्रह्मचर्य में
बाधा उत्पन्न होती है
अब हम लोग
गांधी तो नहीं हैं न!
इसलिए
सावधानी
बरतनी पड़ती है
प्रवचन के समय
माताएं जहां बैठती हैं
उनके और वक्ता के बीच
हम परदा लगा देते हैं
होना तो यह चाहिए
कि हम नारी मात्र को
माता मान लें
जैसा
नरसी भगत कहते थे
और माता से कैसा परदा
पर
कहने मात्र से तो
स्त्री माता नहीं हो जाती न !
ग़ालिब ने कहा ही है
हाथों में नहीं जुंबिश
आंखों में तो दम है
रहने दो अब भी
सागरो-मीना मेरे आगे
तो इस निगोड़ी कामना का
क्या करें!
इसीलिए
न चाहते हुए भी
हमने नारी को
नरक की खान
मुक्ति में बाधक
अपवित्र आदि कहा
और कई
धार्मिक संस्थानों में
उसका प्रवेश
प्रतिबंधित कर दिया
उसकी एक सीमा
तै कर दी
किंतु
असल में
वह हमारी सीमा थी
स्त्री की नहीं
आप तो जानते हैं
मत्स्येंद्रनाथ जैसा सिद्ध भी
तिरियाफांस से
बच न सका
तो हमारी क्या औकात
हम तो सिद्ध भी नहीं
सिर्फ़ प्रसिद्ध हैं
दूसरी बड़ी समस्या
हमारा वैभवशाली
भव्य दिव्य राजशाही
तामझाम है
यह तो सर्वविदित है
कि जहां सादगी और
सात्विकता नहीं होती
वहां न तो धार्मिकता
होती है
न आध्यात्मिकता
भव्यता साधने में ही
सारा सामर्थ्य समाप्त
हो जाता है
दुनिया में सबसे बड़ा
दुनिया में सबसे भव्य
दुनिया में सबसे श्रेष्ठ
के मोह में
हम संसार का
आठवां आश्चर्य
बनते जा रहे हैं
और इसी में धन्यता
और सार्थकता
अनुभव कर रहे हैं
जिस बधिया ज्ञान की
साधना में रत हैं
उससे कुछ भी
श्रेष्ठ नहीं जनमता
दिल की तसल्ली के लिए
आपदाओं में
मुसीबतों में
थोड़ी-बहुत मदद करके
कर्तव्य की इतिश्री
कर लेते हैं
समाज से जितना ले रहे हैं
उसका दस लाखवां अंश भी
न चुकाते हैं
न चुकाने की इच्छा ही
होती है
हम तो बस
अपना साम्राज्य बढ़ाने में ही
डूबे हुए हैं
जैसे पुराने ज़माने में
विश्वविजयी योद्धा
निकला करते थे
हालांकि
योद्धा होने के
साहस और सामर्थ्य
दोनों से हीन हैं
मेरे ख़याल से
हमारी विवशता
और यथार्थता से
परिचित हो जाने के
पश्चात
निश्चय ही
आप हमें क्षमा कर दोगे
इसी विश्वास के साथ
जय जगत!
लेखक परिचय: लगभग 20 पुस्तकों के अनुवाद एवं संपादन का काम कर चुके लेखक हूबनाथ 'बाजा', 'हमारी बेटी' और 'अंतर्ध्वनि' फिल्मों में संवाद लेखन कर चुके है। आपकी 'कौए', 'लोअर परेल', 'अकाल' व 'मिट्टी' नाम से काव्य संग्रह सहित 'ललित निबंध', 'सिनेमा समाज साहित्य' समेत अनेक किताबें प्रकाशित है। आप मुंबई में रहते है।]
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अपलोडर: VKA-N9LYCE • प्रकाशित: 12 सितंबर 2026 • 3 मिनट पठन

प्रश्न करना /
राजद्रोह /
आंदोलन करना /
देशद्रोह /
हक़ मांगना /
राष्ट्रद्रोह /
बना दिया ।
इन सबके बावजूद /
लोग डर नहीं रहे /
छोटे-छोटे बच्चे /
खिलाफत को /
उतारू हैं ।
16 सितंबर 2026

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गत सोमवार, 7 सितंबर की रात भाजपा ने सीपीआई(एम) के जलपाईगुड़ी जिला कार्यालय पर हमला बोला। वहाँ तोड़फोड़ की गई और आग लगाने की कोशिश की गई। पार्टी का झंडा जलाया गया और शहीद वेदी को क्षतिग्रस्त किया गया। सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने इसका प्रतिरोध किया, जिसमें वे घायल भी हुए। भाजपा नेताओं समेत हमलावर अपराधी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं।
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अपराजिता • 30 जुलाई 2026

जो लोग/
गाली से भी बदतर हैं/
उन्हें शिकायत है/
कि लड़कियां/
गाली दे रही हैं।
दरअसल/
लड़कियां/
वह सब कुछ/
सूद समेत लौटा रही हैं।
राजीव कुमार पाण्डेय • 29 अगस्त 2026
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