प्रश्न करना /
राजद्रोह /
आंदोलन करना /
देशद्रोह /
हक़ मांगना /
राष्ट्रद्रोह /
बना दिया ।
इन सबके बावजूद /
लोग डर नहीं रहे /
छोटे-छोटे बच्चे /
खिलाफत को /
उतारू हैं ।
जन समाचार मंच
प्रश्न करना /
राजद्रोह /
आंदोलन करना /
देशद्रोह /
हक़ मांगना /
राष्ट्रद्रोह /
बना दिया ।
इन सबके बावजूद /
लोग डर नहीं रहे /
छोटे-छोटे बच्चे /
खिलाफत को /
उतारू हैं ।

आपके
निर्देशानुसार
उजड्डता
और ज़हालत को
राष्ट्रीय संस्कृति का
दर्जा दे दिया
आक्रामकता
लंपटता
हिंस्रता को
अनिवार्य
जीवन-मूल्य
घोषित कर दिया
प्रश्न करना
राजद्रोह
आंदोलन करना
देशद्रोह
हक़ मांगना
राष्ट्रद्रोह
बना दिया
इन सबके बावजूद
लोग डर नहीं रहे
छोटे-छोटे बच्चे
खिलाफत को
उतारू हैं
इज़्ज़त तो
कभी थी ही नहीं
एक भय था
वह भी
कम होता जा रहा है
धर्म को
राजनीति के
लौहबूटों के नीचे
कुचल कर
पीस दिया है
अधर्म और अनीति को
भव्य मंदिरों में
स्थापित कर दिया
ऊपर से
ईश्वर की जगह
स्वयं बैठ गया
अपनी आरती गवायी
चालीसा पढ़वाया
पर कोई फर्क नहीं पड़ा
अब
आप ही राह दिखाएं
आचार्य प्रवर
प्रजा को लूट कर
मातृ भूमि को बेच कर
जो विराट धनराशि
अकूत शक्ति
अपरिमित सामर्थ्य
जुटाया है
वह सब
किस काम का
जब
मामूली तुच्छ नगण्य
मकोड़ों सरीखी प्रजा
सरे बाज़ार
कोस रही हो
गरियाये जा रही हो
सराप रही हो
कुछ कीजिए प्रभु!
शांत महाराज!
शांत!!
इतनी उद्विग्नता
उचित नहीं
प्रजा की स्मरणशक्ति
आपके चरित्र की भांति
अत्यंत कमज़ोर होती है
इस प्रजा में
किंचित मात्र भी
विवेक बुद्धि होती
तो आपका
चयन ही न हो पाता
इसलिए
बिल्कुल भी
व्यग्र न हो
महाराजाधिराज!
सिर्फ़
अपने नगरसेठों को
थैलियां
ढीली रखने को कहिएगा
वक्त पड़ने पर
श्याममुद्रा का छिड़काव
आपके समस्त
संकटों को
उसी भांति नष्ट करेगा
जैसे
जेठ का सूरज
अंधेरे को नष्ट करता है
रही बात
बेइज़्ज़ती की
तो सत्ता के
सुख के समक्ष
गालियों और श्रापों की
क्या औकात
इसे मद्यपान के दौरान के
चखने से ज़्यादा
अहमियत
मत दीजिए
आप तो जानते ही हैं
निर्लज्ज
सदा सुखी!

लेखक परिचय: लगभग 20 पुस्तकों के अनुवाद एवं संपादन का काम कर चुके लेखक हूबनाथ 'बाजा', 'हमारी बेटी' और 'अंतर्ध्वनि' फिल्मों में संवाद लेखन कर चुके है। आपकी 'कौए', 'लोअर परेल', 'अकाल' व 'मिट्टी' नाम से काव्य संग्रह सहित 'ललित निबंध', 'सिनेमा समाज साहित्य' समेत अनेक किताबें प्रकाशित है। आप मुंबई में रहते है।]
अपलोडर: VKA-N9LYCE
क्या यह लेख उपयोगी था?
अपलोडर: VKA-N9LYCE • प्रकाशित: 16 सितंबर 2026 • 2 मिनट पठन

मंगलवार दोपहर गड़वेता के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी।
16 सितंबर 2026

हम तो /
नारी शक्ति के समक्ष /
नतमस्तक हैं ।
हम सभी /
एक स्त्री से ही तो /
जनमे हैं ।
उसी के संरक्षण में /
हमारा स्वर्णिम /
बालपन बीता है ।
12 सितंबर 2026

गत सोमवार, 7 सितंबर की रात भाजपा ने सीपीआई(एम) के जलपाईगुड़ी जिला कार्यालय पर हमला बोला। वहाँ तोड़फोड़ की गई और आग लगाने की कोशिश की गई। पार्टी का झंडा जलाया गया और शहीद वेदी को क्षतिग्रस्त किया गया। सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने इसका प्रतिरोध किया, जिसमें वे घायल भी हुए। भाजपा नेताओं समेत हमलावर अपराधी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं।
12 सितंबर 2026

रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने स्पष्टत: कहा कि राममोहन राय ने भारत में आधुनिक युग का उद्घाटन किया, आज के विश्वजनीन सहयोग के जमाने की मानवता में हमारी दीक्षा उन्होंने ही सम्पन्न किया।
श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

भक्ति-आन्दोलन का जनसाधारण पर जितना व्यापक प्रभाव हुआ उतना किसी अन्य आन्दोलन का नहीं। पहली बार शूद्रों ने अपने सन्त पैदा किये, अपना साहित्य और अपने गीत सृजित किये। कबीर, रैदास, नाभा सिपी, सेना नाई, आदि-आदि महापुरुषों ने ईश्वर के नाम पर जातिवाद के विरुद्ध आवाज बुलन्द की। समाज के न्यस्त स्वार्थवादी वर्ग के विरुद्ध नया विचारवाद अवश्यम्भावी था , वह हुआ।
अपराजिता • 30 जुलाई 2026

जो लोग/
गाली से भी बदतर हैं/
उन्हें शिकायत है/
कि लड़कियां/
गाली दे रही हैं।
दरअसल/
लड़कियां/
वह सब कुछ/
सूद समेत लौटा रही हैं।
राजीव कुमार पाण्डेय • 29 अगस्त 2026
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...