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प्रश्नोपनिषद - 2: हूबनाथ

राजीव कुमार पाण्डेय•16 सितंबर 20262 मिनट पठन20 बार पढ़ा गया

प्रश्न करना /

राजद्रोह /

आंदोलन करना /

देशद्रोह /

हक़ मांगना /

राष्ट्रद्रोह /

बना दिया ।

इन सबके बावजूद /

लोग डर नहीं रहे /

छोटे-छोटे बच्चे /

खिलाफत को /

उतारू हैं ।

प्रश्नोपनिषद - 2: हूबनाथ


प्रश्नोपनिषद - 2

- हूबनाथ

प्रणाम आचार्य! 

आपके 

निर्देशानुसार 

उजड्डता

और ज़हालत को

राष्ट्रीय संस्कृति का

दर्जा दे दिया 

आक्रामकता 

लंपटता

हिंस्रता को

अनिवार्य 

जीवन-मूल्य 

घोषित कर दिया 

प्रश्न करना 

राजद्रोह 

आंदोलन करना

देशद्रोह

हक़ मांगना

राष्ट्रद्रोह

बना दिया 

इन सबके बावजूद 

लोग डर नहीं रहे

छोटे-छोटे बच्चे

खिलाफत को

उतारू हैं

इज़्ज़त तो

कभी थी ही नहीं 

एक भय था

वह भी 

कम होता जा रहा है

धर्म को

राजनीति के

लौहबूटों के नीचे 

कुचल कर

पीस दिया है

अधर्म और अनीति को

भव्य मंदिरों में

स्थापित कर दिया 

ऊपर से

ईश्वर की जगह

स्वयं बैठ गया

अपनी आरती गवायी

चालीसा पढ़वाया

पर कोई फर्क नहीं पड़ा

अब

आप ही राह दिखाएं 

आचार्य प्रवर 

प्रजा को लूट कर

मातृ भूमि को बेच कर

जो विराट धनराशि 

अकूत शक्ति 

अपरिमित सामर्थ्य 

जुटाया है

वह सब 

किस काम का

जब 

मामूली तुच्छ नगण्य 

मकोड़ों सरीखी प्रजा

सरे बाज़ार 

कोस रही हो

गरियाये जा रही हो

सराप रही हो

कुछ कीजिए प्रभु!

शांत महाराज!

शांत!!

इतनी उद्विग्नता 

उचित नहीं 

प्रजा की स्मरणशक्ति

आपके चरित्र की भांति

अत्यंत कमज़ोर होती है

इस प्रजा में 

किंचित मात्र भी

विवेक बुद्धि होती

तो आपका 

चयन ही न हो पाता

इसलिए 

बिल्कुल भी 

व्यग्र न हो

महाराजाधिराज!

सिर्फ़ 

अपने नगरसेठों को

थैलियां 

ढीली रखने को कहिएगा 

वक्त पड़ने पर

श्याममुद्रा का छिड़काव 

आपके समस्त 

संकटों को

उसी भांति नष्ट करेगा

जैसे

जेठ का सूरज 

अंधेरे को नष्ट करता है

रही बात

बेइज़्ज़ती की

तो सत्ता के 

सुख के समक्ष 

गालियों और श्रापों की

क्या औकात

इसे मद्यपान के दौरान के

चखने से ज़्यादा 

अहमियत 

मत दीजिए  

आप तो जानते ही हैं

निर्लज्ज 

सदा सुखी!

लेखक परिचय: लगभग 20 पुस्तकों के अनुवाद एवं संपादन का काम कर चुके लेखक हूबनाथ 'बाजा', 'हमारी बेटी' और 'अंतर्ध्वनि' फिल्मों में संवाद लेखन कर चुके है। आपकी 'कौए', 'लोअर परेल', 'अकाल' व 'मिट्टी' नाम से काव्य संग्रह सहित 'ललित निबंध', 'सिनेमा समाज साहित्य' समेत अनेक किताबें प्रकाशित है। आप मुंबई में रहते है।]

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प्रश्नोपनिषद - 2: हूबनाथ

अपलोडर: VKA-N9LYCE • प्रकाशित: 16 सितंबर 2026 • 2 मिनट पठन

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