राज्य भर में इतिहास के विकृतिकरण के खिलाफ और खुद मुख्यमंत्री द्वारा झूठी तथा भ्रामक जानकारी फैलाने के खिलाफ कलकत्ता विश्वविद्यालय के छात्रों की विरोध सभा!
जन समाचार मंच
राज्य भर में इतिहास के विकृतिकरण के खिलाफ और खुद मुख्यमंत्री द्वारा झूठी तथा भ्रामक जानकारी फैलाने के खिलाफ कलकत्ता विश्वविद्यालय के छात्रों की विरोध सभा!

इस राज्य में बीजेपी सरकार फासीवादी तरीके से गोएबल्स के सिद्धांत को लागू करके एक ही झूठ को बार-बार दोहराकर उसे सच साबित करने की पुरजोर कोशिश कर रही है! इतिहास को मिटाकर इतिहास के विकृत पुनर्लेखन पर राज्य सरकार उतारू है। पहले कलकत्ता विश्वविद्यालय के भीतर पश्चिम बंगाल दिवस मनाने के कार्यक्रम में राज्य के नवनियुक्त उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा 'असली इतिहास' वाक्यांश की आड़ में असत्य इतिहास पेश करने की घटना! उसके बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति हसन सोहरावर्दी के नाम पर बने सोहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदल देने की घटना! एक के बाद एक हमले कलकत्ता विश्वविद्यालय, यानी पूरे पश्चिम बंगाल के इतिहास पर किए जा रहे हैं।
राज्य भर में इतिहास के विकृतिकरण के खिलाफ और खुद मुख्यमंत्री द्वारा झूठी तथा भ्रामक जानकारी फैलाने के खिलाफ कलकत्ता विश्वविद्यालय के छात्रों की विरोध सभा!
और साथ ही NEET परीक्षा में पेपर लीक की घटना के मद्देनजर देश भर में अनगिनत छात्र-छात्राएं आत्महत्या का रास्ता चुन रहे हैं। यह वास्तव में आत्महत्या नहीं, बल्कि संस्थागत हत्या है। और इस हत्या की जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, यानी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की है। धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग में, NTA को रद्द करने की मांग में और Re-NEET की अटेंडेंस शीट जारी करने की मांग में कलकत्ता विश्वविद्यालय के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका गया!
ट्रामलाइन की जमीन से बीजेपी द्वारा इस राज्य में इतिहास को खत्म करने और दूसरी तरफ देश भर में शिक्षा व्यवस्था को खत्म करने के खिलाफ पूरे छात्र समुदाय को विरोध में उतरने का संदेश दिया एसएफआई (SFI) कलकत्ता विश्वविद्यालय ने!
#SFICalcuttaUniversity
अपलोडर: VKA-N9LYCE
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अपलोडर: VKA-N9LYCE • प्रकाशित: 24 जून 2026 • 2 मिनट पठन

जो लोग/
गाली से भी बदतर हैं/
उन्हें शिकायत है/
कि लड़कियां/
गाली दे रही हैं।
दरअसल/
लड़कियां/
वह सब कुछ/
सूद समेत लौटा रही हैं।
कुछ घंटे पहले

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✊ चलो रानीगंज! - हार्दिक आह्वान - पश्चिम बंगाल लोकतांत्रिक लेखक शिल्पी संघ ,जनवादी लेखक संघ (रानीगंज आंचलिक कमेटी)
रानीगंज से महापंडित राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति गायब किए जाने के विरोध में आज (मंगलवार, 14 जुलाई 2026) पूरे पश्चिम बर्धमान जिले और राज्य के कोने-कोने से रानीगंज के "पंजाबी मोड़" की तरफ़ कूच करें! नफ़रत की राजनीति को करारा जवाब दें!
केशव कुमार भट्टड़ • 14 जुलाई 2026

संथाल विद्रोह का मुख्य केंद्र 'दामिन-इ-कोह' था। इस शब्द का अर्थ है 'पहाड़ का आंचल' या 'पहाड़ का दुपट्टा'। पहाड़ों और जंगलों से घिरे राजमहल के आस-पास के इलाके से होकर ही मध्यकाल में आक्रमणकारियों ने बंगाल में प्रवेश किया था। उस क्षेत्र की जनजातीय आबादी कृषि कार्य में अभ्यस्त नहीं थी।
राजीव कुमार पाण्डेय • 28 जून 2026
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