वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 | Tuesday, 13 October 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंराज्य

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

राज्य

अल्पसंख्यकों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाकर रखना चाहती है संघ-भाजपा: मोहम्मद सलीम

राजीव कुमार पाण्डेय•29 जून 20264 मिनट पठन19 बार पढ़ा गया

धार्मिक अल्पसंख्यकों को संकट में डालने के लिए आरएसएस की योजना के अनुसार तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की संयुक्त गतिविधियों के क्रियान्वयन को समझाते हुए सलीम ने कहा कि देश के विभाजन का दंश झेलने के बावजूद पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक विभाजन नहीं था। लेकिन पंद्रह वर्षों में ममता बनर्जी के कुशासन के खिलाफ लोगों में जो गुस्सा पैदा हुआ था, भाजपा ने उसे तृणमूल विरोधी गुस्से के बजाय मुस्लिम विरोधी सांप्रदायिक गुस्से में बदल दिया।

अल्पसंख्यकों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाकर रखना चाहती है संघ-भाजपा: मोहम्मद सलीम

अतीत में वाजपेयी-आडवाणी के दौर में जो भाजपा का गुप्त एजेंडा था, अब मोदी-शाह के शासन में वह खुलकर सामने आ गया है। भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के नागरिक अधिकार छीनकर उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाकर आरएसएस-भाजपा रखना चाहती हैं।। रविवार को 'आवाज' राज्य कमेटी की ओर से कोलकाता के हरेकृष्ण कोनार स्मृति भवन में आयोजित 'अल्पसंख्यकों के अधिकार और सुरक्षा का सवाल' विषय पर आयोजित सेमिनार में में सीपीआई(एम) के राज्य सचिव और 'आवाज' के सलाहकार मोहम्मद सलीम ने यह बात कही।

इजरायल के शासकों के साथ भारत के शासक दल की वैचारिक समानता का उल्लेख करते हुए सलीम ने कहा कि आर्थिक समस्याओं का समाधान किए बिना घुसपैठिए, रोहिंग्या, बांग्लादेशी जैसी बातें कहकर देश के भीतर ही एक हिस्से को दूसरे हिस्से के सामने 'दुश्मन' के रूप में पेश किया जा रहा है। जनसांख्यिकी परिवर्तन रोकने के नाम पर 'पुशबैक' (वापस भेजने) की धमकी दी जा रही है। बड़ी संख्या में पुशबैक करना बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं है, कुछ लोगों को ऐसा करने की कोशिश में ही सरकार के पसीने छूट रहे हैं । असली बात यह है कि आरएसएस भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के नागरिक अधिकार छीनकर उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाकर रखना चाहता है। इजरायल ने जिस तरह फिलिस्तीनियों को अपनी ही जमीन पर बेगाना बना रखा है, उसी तरह आरएसएस-भाजपा भारत के अल्पसंख्यकों के नागरिक अधिकार छीनना चाहती है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इस हमले के खिलाफ प्रतिरोध की लड़ाई को किसी एक समुदाय की लड़ाई के रूप में न देखकर, सभी के नागरिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई के रूप में देखने की अपील सलीम ने की। उन्होंने कहा कि यह केवल चुनावी जंग से नहीं होगा। सभी को साथ लेकर राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संघर्ष खड़ा करना होगा। सांप्रदायिक नफरत के प्रचार से वे हमारे मन के मानवीय पहलुओं को दानवीय बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हॉकरों को हटाने की समस्याओं को न देखकर, लोगों को हिंदू-मुस्लिम, बंगाली-गैर-बंगाली दिखाकर उन्हें क्रूरता की ओर धकेला जा रहा है। इसलिए इसके प्रतिरोध में सांस्कृतिक पहल की भी आवश्यकता है।

इस अवसर पर 'आवाज' के तत्वावधान में आयोजित सेमिनार में पूर्व सांसद व अधिवक्ता बिकास रंजन भट्टाचार्य, सीपीआई (एम) के विधायक मोस्ताफिजुर रहमान और 'आवाज' के राज्य सचिव रुहुल अमीन गाजी ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के राज्य अध्यक्ष सैदुल हक ने की।

सभा में विकास भट्टाचार्य ने कहा कि एनआरसी (एसआईआर) में केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि कई गरीब हिंदू लोग भी संकट में पड़े हैं। अब नागरिकता पर सवाल उठाकर उनके नागरिक अधिकार छीनने की कोशिश हुई, तो राजनीतिक लड़ाई के साथ-साथ हमारी कानूनी लड़ाई भी जारी रहेगी। मुस्तफीजुर रहमान ने कहा कि सभी गरीब लोगों के अधिकारों की रक्षा के संघर्ष को तेज करके ही अल्पसंख्यकों के अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। फासीवादियों के खिलाफ लड़ाई सबको एकजुट करके ही लड़नी होगी।

पश्चिम बंगाल की सरकार में भाजपा के सत्तारूढ़ होने से बदले राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस आरएसएस का एक राजनीतिक प्रोजेक्ट था। पंद्रह वर्षों तक तृणमूल कांग्रेस ने सब कुछ तहस-नहस करके और लूट-खसोट मचाकर आरएसएस का रास्ता साफ किया और उनके प्रोजेक्ट को लागू किया। अब तृणमूल कांग्रेस गायब हो रही है, पार्टी के विधायक और सांसद पाला बदल रहे हैं। और भाजपा सरकार को तो असल में तृणमूल के ही पूर्व नेता चला रहे हैं। नरेंद्र मोदी और अमित शाह की नजरों में नम्बर बढ़ाने के लिए वे और ज्यादा हिंदुत्व की आक्रामकता दिखा रहे हैं।

धार्मिक अल्पसंख्यकों को संकट में डालने के लिए आरएसएस की योजना के अनुसार तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की संयुक्त गतिविधियों के क्रियान्वयन को समझाते हुए सलीम ने कहा कि देश के विभाजन का दंश झेलने के बावजूद पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक विभाजन नहीं था। लेकिन पंद्रह वर्षों में ममता बनर्जी के कुशासन के खिलाफ लोगों में जो गुस्सा पैदा हुआ था, भाजपा ने उसे तृणमूल विरोधी गुस्से के बजाय मुस्लिम विरोधी सांप्रदायिक गुस्से में बदल दिया। एक तरफ ममता बनर्जी ने हिजाब पहनकर इमाम बरकती और सिद्दीकुल्लाह चौधरी को साथ लेकर मुसलमानों को धोखा दिया, तो दूसरी तरफ भाजपा ने मीडिया के जरिए शाहजहां और जहांगीर जैसे चेहरों को लुटेरी तृणमूल कांग्रेस के मुख्य चेहरे के रूप में प्रचारित किया। जबकि अनुब्रत मंडल, पार्थ चटर्जी और ज्योतिप्रिय मल्लिक जैसे नेता जो इन लुटेरों के असली आका थे, उन्हें नहीं दिखाया गया। इसका कारण भ्रष्टाचार को खत्म करना नहीं, बल्कि सांप्रदायिक विभाजन ही भाजपा का मुख्य लक्ष्य है।

.

.

साभार:बांग्ला दैनिक गणशक्ति

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

अल्पसंख्यकों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाकर रखना चाहती है संघ-भाजपा: मोहम्मद सलीम

प्रकाशित: 29 जून 2026 • 4 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

361 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

358 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

338 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

333 क्लिक

5

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

330 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
साहित्य-संस्कृति

प्रश्नोपनिषद - 2: हूबनाथ

प्रश्न करना /

राजद्रोह /

आंदोलन करना /

देशद्रोह /

हक़ मांगना /

राष्ट्रद्रोह /

बना दिया ।

इन सबके बावजूद /

लोग डर नहीं रहे /

छोटे-छोटे बच्चे /

खिलाफत को /

उतारू हैं ।

16 सितंबर 2026

राज्य

गड़वेता-शालबनी के 7 पार्टी दफ्तरों में बीजेपी का उपद्रव, लेनिन की मूर्ति तोड़ी गई

मंगलवार दोपहर गड़वेता के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी।

16 सितंबर 2026

साहित्य-संस्कृति

माफीनामा: हूबनाथ

हम तो /

नारी शक्ति के समक्ष /

नतमस्तक हैं ।

हम सभी /

एक स्त्री से ही तो /

जनमे हैं ।

उसी के संरक्षण में /

हमारा स्वर्णिम /

बालपन बीता है ।

12 सितंबर 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
राज्य

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है। एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन लेफ्ट फ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का। यह उससे कहीं ज्यादा हैं। लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026

राज्य

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

सोशल मीडिया पर समाज के सभी वर्गों के लोग भाजपा सरकार के इस दिशा-निर्देश को लेकर गुस्सा जताने लगे हैं। सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और सिंडिकेट को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के साथ काम शुरू करने का वादा करने वाली सरकार अचानक कर्मचारियों के पीछे क्यों हाथ धोकर पड़ गई है?

श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

राज्य

राष्ट्र तुम किसके हो ? - शमीक लाहिड़ी

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।

श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement