सोनम वांगचुक को बंधक बनाकर रखने के बाद भी मोदी सरकार जंतर-मंतर का विरोध प्रदर्शन नहीं रोक सकी है। उस परिसर में कम से कम 21 लोग अनशन पर बैठे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य चेहरे अभिजीत दिपके, एसएफआई (SFI) के अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एम साजी, संयुक्त सचिव आयशी घोष पिछले एक दिन से अनशन कर रहे हैं।
शनिवार सुबह से सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है। उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मा ने बताया कि रविवार को भी वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया। पुलिस और अस्पताल प्रशासन की ओर से उन पर भारी दबाव बनाया जा रहा है। सोमवार को होने वाले संसद मार्च में वांगचुक को शामिल नहीं होने दिया जाएगा। इसलिए, उनकी अनुपस्थिति में इस मार्च का नेतृत्व खुद गीतांजलि आंग्मा करेंगी।
रविवार को अस्पताल से भेजे गए एक हस्तलिखित पर्चे (नोट) के जरिए वांगचुक ने जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों को लड़ाई जारी रखने का संदेश दिया है। उन्होंने लिखा, "20 जुलाई द्वितीय स्वतंत्रता संग्राम! लक्ष्य- भयमुक्त भारत, अन्यायमुक्त भारत। संसद मार्च में सभी लोग समूह बनाकर आएं। इस अभियान को सफल बनाएं। सफदरजंग अस्पताल में अवैध रूप से कैद रहने के दौरान मैं अपनी पत्नी गीतांजलि के माध्यम से यह संदेश भेज रहा हूँ।"
विशेष रूप से रविवार रात को गीतांजलि आंग्मो ने बताया कि सोमवार को विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अस्पताल आकर उनसे मुलाकात करेंगे और संसद में 'नीट घोटाले' का मुद्दा उठाने का आश्वासन देंगे, जिसके बाद वांगचुक अपना अनशन तोड़ देंगे। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए यह बात कही।
भेष बदलकर आकर सोनम वांगचुक का अपहरण करने और उन्हें अवैध रूप से बंधक बनाकर रखने की घटना के खिलाफ उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मा ने रविवार को अदालत का दरवाजा खटखटाया है। दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की विशेष सुनवाई हुई। गीतांजलि ने अपने पति को सफदरजंग अस्पताल से गुड़गांव के एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित (शिफ्ट) करने की अपील की। हालांकि, न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की एकल पीठ ने फिलहाल इस मामले में कोई अंतरिम आदेश देने या हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि सोनम वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के कारण ही सरकार द्वारा उन्हें अस्पताल ले जाया गया है। इस कदम को 'मनमाना' नहीं कहा जा सकता। न्यायाधीश ने बताया कि सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टर वांगचुक के स्वास्थ्य पर कड़ी नजर रख रहे हैं। उनकी सहमति से ही उन्हें तरल पदार्थ और ओआरएस दिया जा रहा है, इसलिए उनके साथ कोई जबरदस्ती नहीं की जा रही है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि वांगचुक की पत्नी, भाई और बहनोई को चौबीसों घंटे उनके पास रहने की अनुमति दी गई है और अस्पताल में उनके लिए एक कमरे की व्यवस्था भी की गई है। हालांकि, अदालत ने केंद्र सरकार, सफदरजंग अस्पताल और दिल्ली पुलिस को इस याचिका के जवाब में 3 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।
हालांकि अदालत की ओर से दावा किया गया है कि अस्पताल में कोई जबरदस्ती नहीं की जा रही है, लेकिन वांगचुक ने अपने हाथ से लिखे संदेश में आरोप लगाया है कि उन्हें 'अवैध रूप से बंधक' बनाकर रखा गया है। शनिवार से चारों तरफ भारी पुलिस बल तैनात कर सफदरजंग अस्पताल को व्यावहारिक रूप से जेल में तब्दील कर दिया गया है। सुनवाई के दौरान गीतांजलि आंग्मा की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि देश के एक स्वतंत्र नागरिक के रूप में वांगचुक को अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने अस्पताल में उनके कमरे के बाहर पुलिस की मौजूदगी का भी कड़ा विरोध किया। दूसरी ओर, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने दावा किया कि अदालत के पिछले निर्देशों का पालन करते हुए, वांगचुक के चिंताजनक वाइटल पैरामीटर्स (Vital Parameters) को देखकर प्रशासन उन्हें अस्पताल में भर्ती करने के लिए मजबूर हुआ। सरकार उनके स्वास्थ्य को लेकर बेहद सतर्क है।
इसी बीच, डॉक्टरों की ओर से वांगचुक की शारीरिक स्थिति को लेकर सकारात्मक संदेश दिया गया है। एम्स (AIIMS) दिल्ली के डॉक्टर डॉ. अक्षय कुमार ने बताया, "वांगचुक पूरी तरह होश में हैं और सामान्य रूप से बातचीत कर रहे हैं। उनका रक्तचाप, ऑक्सीजन का स्तर और पल्स रेट बिल्कुल सामान्य है।" यानी डॉक्टरों और पुलिस प्रशासन के बयानों में साफ विसंगति है। सरकारी वकीलों का दावा है कि वांगचुक की शारीरिक स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें उठाकर अस्पताल ले जाने और वहां रोकने की आवश्यकता पड़ी थी। जबकि सरकार द्वारा नियुक्त डॉक्टर कह रहे हैं कि वांगचुक के स्वास्थ्य की स्थिति सकारात्मक है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठ रहा है कि यदि रक्तचाप, ऑक्सीजन का स्तर और पल्स रेट सामान्य ही है, तो वांगचुक को जंतर-मंतर वापस क्यों नहीं भेजा जा रहा है? कई लोगों ने सवाल उठाया है कि इसे इलाज कहा जाए या अवैध रूप से बंधक बनाकर रखना?
दूसरी ओर, सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा बुलाए गए संसद भवन मार्च के लिए दिल्ली पुलिस व्यावहारिक रूप से युद्ध स्तर पर तैयारी कर रही है। पूरी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व रूप से कड़ी कर दी गई है। सोमवार के संसद भवन मार्च को विफल करने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। रविवार से ही दिल्ली शहर के दक्षिणी, मध्य और उत्तरी हिस्सों को कड़ी सुरक्षा के घेरे में ले लिया गया है। जंतर-मंतर, पार्लियामेंट स्ट्रीट, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस और शंकर चौक जैसे महत्वपूर्ण इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और केंद्रीय बलों की विशेष टीमों को तैयार रखा गया है।
दिल्ली पुलिस ने सीजेपी (CJP) के इस विरोध मार्च को कोई अनुमति नहीं दी है। इसका मतलब यह है कि मार्च निकलते ही उसे रोककर अंधाधुंध गिरफ्तारियां की जा सकती हैं, ऐसी आशंका जताई जा रही है। संसद भवन क्षेत्र में किसी भी तरह के जुलूस या सभा को रोकने के लिए प्रशासन अड़ा हुआ है। शहर के हर महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार पर मल्टी-लेयर बैरिकेड्स लगाए गए हैं। इसके साथ ही नाका-चेकिंग, राहगीरों पर अतिरिक्त निगरानी और 24 घंटे पुलिस गश्त जारी है। हर गाड़ी की सघन तलाशी ली जा रही है। महत्वपूर्ण मोड़ों पर अतिरिक्त पुलिस पिकेट लगाने के साथ-साथ आपातकालीन स्थितियों के लिए रिजर्व पुलिस बल को भी तैयार रखा गया है। पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए सीसीटीवी निगरानी भी कई गुना बढ़ा दी गई है।
सोनम वांगचुक को बंधक बनाकर रखने के बाद भी मोदी सरकार जंतर-मंतर का विरोध प्रदर्शन नहीं रोक सकी है। उस परिसर में कम से कम 21 लोग अनशन पर बैठे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य चेहरे अभिजीत दिपके, एसएफआई (SFI) के अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एम साजी, संयुक्त सचिव ऐशी घोष पिछले एक दिन से अनशन कर रहे हैं। वामपंथी छात्र संगठन 'आइसा' के नेता नेहा, अमीन और मनीष पिछले 21 दिनों से अनशन पर हैं। इन तीनों छात्र नेताओं की शारीरिक स्थिति बेहद चिंताजनक है। शनिवार सुबह सादे कपड़ों में आई पुलिस ने उन्हें भी वांगचुक की तरह उठाकर ले जाने की कोशिश की थी। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने मानव श्रृंखला बनाकर उनका रास्ता रोक दिया। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी, एसएफआई, आइसा सहित विभिन्न संगठनों के कई और कार्यकर्ता व समर्थक भी अनशन पर बैठ गए हैं।
जंतर-मंतर परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इस इलाके में प्रवेश करने वाली सभी सड़कें बंद कर दी गई हैं। चारों तरफ बैरिकेड्स लगाकर घेराबंदी कर दी गई है। डराने-धमकाने के लिए शनिवार सुबह से ही धरना स्थल पर कई वॉटर कैनन (जल तोप) गाड़ियां लाई गई हैं। सड़क के किनारे एक के बाद एक प्रिजन वैन (कैदी वाहन) खड़ी करके रखी गई हैं।
शनिवार को ही दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को यह परिसर खाली करने की चेतावनी दी थी। शाहीन बाग की तर्ज पर रात में बुलडोजर से धरना मंच को तोड़कर प्रदर्शनकारियों की अंधाधुंध गिरफ्तारी की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि, देश भर में कॉकरोच जनता पार्टी और वांगचुक के प्रति समर्थन की व्यापकता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने इस 'कार्रवाई' को करने का जोखिम नहीं उठाया। लेकिन प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा हिस्सा रात के अंधेरे का फायदा उठाकर पुलिसिया हमले की संभावना को अभी भी खारिज नहीं कर रहा है।
प्रशासन के भारी दबाव के बावजूद प्रदर्शनकारियों का मनोबल नहीं टूटा है। इसके विपरीत, युवा पीढ़ी का एक बड़ा हिस्सा वांगचुक के 'द्वितीय स्वतंत्रता संग्राम' के आह्वान से प्रेरित हुआ है। जंतर-मंतर के प्रदर्शन और 20 जुलाई के संसद भवन मार्च में भाग लेने के लिए विभिन्न राज्यों से हजारों युवा दिल्ली की ओर रवाना हो चुके हैं।
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साभार: गणशक्ति
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