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यही वक्त है बिल्कुल यही वक्त है : हूबनाथ

राजीव कुमार पाण्डेय•22 जुलाई 20262 मिनट पठन50 बार पढ़ा गया

इंद्रधनुषी शब्दों के

रंग-बिरंगे मायाजाल को

उसी तरह चीर कर

जैसे अंडे में से 

निकलता है चूज़ा

वैसे ही

बाहर निकलने का वक्त है

यही वक्त है  बिल्कुल यही वक्त है : हूबनाथ

यही वक्त है

बिल्कुल यही वक्त है

अपनी उंगलियों से

रंग तितलियों के पोंछ

उन्हें स्याही में डुबोने का

यह सही वक्त है

इंद्रधनुषी शब्दों के

रंग-बिरंगे मायाजाल को

उसी तरह चीर कर

जैसे अंडे में से 

निकलता है चूज़ा

वैसे ही

बाहर निकलने का वक्त है

यही वक्त है

जब हर चीज़ को

उसके सही नाम से

बुलाया जाना चाहिए 

बीच चौराहे पर

चीखते हुए 

चोर को चोर

हत्यारे को हत्यारा

पाखंडी को पाखंडी

बलात्कारी को बलात्कारी

कमीने को कमीना

कहने का

यही सही वक्त है

बहुत दिनों तक

रामनामी में छुरे लपेटकर

और धर्मग्रंथों में

कामशास्त्र की 

पोथी छिपाकर 

घूमने वाले चंटों 

लंपटों को 

पंडित ज्ञानी कहकर

बहुत भोग चुके

महामूर्खमार्तंड को

महामार्गदर्शक

मानकर

जो हिमालय जैसी 

भूल की थी

उसे सुधारने का

यही वक्त है

यही सही वक्त है

कि अब निर्भय होकर 

गुंडे को गुंडा कहें

केंचुए को केंचुआ

और जेबकतरे को

सिर्फ़ जेबकतरा कहें

कुछ और नहीं 

जो अब तक कहते आए हैं

यही वक्त है

यह तै करने का

कि जब आप 

ग़लत चीज़ों को 

उनके सही नाम से

नहीं पुकारते हो

तो वह संज्ञा 

नष्ट हो जाती है

जिसका इस्तेमाल 

ग़लत चीज़ों के लिए 

किया गया था

जैसे

नष्ट हो गई 

कुछ महत्वपूर्ण संज्ञाएं

जैसे

राष्ट्र 

जैसे देशभक्ति

ईश्वर 

संसद

संविधान 

विकास 

न्याय

ज्ञान 

शिक्षा

प्रज्ञा 

ये सभी संज्ञाएं 

बजबजाकर 

दुर्गंध फेंक रही हैं 

इसलिए 

बची रहे भाषा

बचे रहें शब्द 

अपने सही अर्थों में

इसलिए 

अब बिल्कुल देर

 नहीं करनी है

सभी को

निकलना होगा

घर से बाहर 

चौराहे पर खड़े होकर

एक साथ चिल्ला कर

चोर को चोर 

और मूर्ख को मूर्ख

कहना ही होगा

इससे पहले

कि हम शब्दों के असली अर्थ 

भूल जाएं 

हमें निकल पड़ना चाहिए 

- हूबनाथ

[लेखक परिचय: लगभग 20 पुस्तकों के अनुवाद एवं संपादन का काम कर चुके लेखक "हूबनाथ" 'बाजा', 'हमारी बेटी' और 'अंतर्ध्वनि' फिल्मों में संवाद लेखन कर चुके है। आपकी 'कौए', 'लोअर परेल', 'अकाल' व 'मिट्टी' नाम से काव्य संग्रह सहित 'ललित निबंध', 'सिनेमा समाज साहित्य' समेत अनेक किताबें प्रकाशित है। आप मुंबई में रहते है।]

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यही वक्त है बिल्कुल यही वक्त है : हूबनाथ

प्रकाशित: 22 जुलाई 2026 • 2 मिनट पठन

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