सीपीआई(एम) के पोलितब्यूरो सदस्य एम. ए. बेबी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री वास्तव में यह मानते हैं कि हमारे युवाओं के भविष्य से बढ़कर कुछ नहीं है, तो जिस मंत्री के कार्यकाल में इन प्रश्नपत्रों के लीक होने और उससे जुड़े भ्रष्टाचार की घटनाएं हुई हैं, उस शिक्षा मंत्री को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए। इससे कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं है। धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा!
नीट के 21 परीक्षार्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने और प्रश्नपत्र लीक होने के ढाई महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद, गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा, "हमारी युवा पीढ़ी का कल्याण और उनका भविष्य हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है। यही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जो लोग हमारे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने की कोशिश करेंगे, उनमें से किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।" इसके बाद उन्होंने बताया कि प्रश्नपत्र लीक मामले में शामिल लोगों के खिलाफ त्वरित और सख्त सजा सुनिश्चित करने के लिए हमने फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला किया है।
मोदी के इस बयान से कोई समाधान नहीं निकला, बल्कि उन्हें तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा है। सीजेपी (CJP) की ओर से साफ कर दिया गया है कि प्रधानमंत्री के इस बयान में जवाबदेही तय करने की कोई बात नहीं है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा। सीजेपी ने शुक्रवार को देशव्यापी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन के प्रवक्ता पोरव दास ने लिखा है, "हर जिले को जंतर-मंतर बना दें।" एसएफआई (SFI) ने पहले ही शुक्रवार को देशव्यापी छात्र हड़ताल और विरोध प्रदर्शन का आह्वान कर रखा है।
प्रधानमंत्री के बयान के तुरंत बाद, सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने एक्स पर पोस्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा। संगठन के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा, "यह अच्छी बात है कि डेढ़ महीने से चल रहे आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री ने इस मामले पर ध्यान दिया है। शायद उनके विदेश दौरे खत्म हो गए हैं और वह देश लौट आए हैं।" रांका ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने के बाद दोषियों को क्या सजा मिल रही है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता; इससे पेपर लीक की समस्या का समाधान नहीं होगा। असली सवाल यह है कि प्रश्नपत्र लीक हो क्यों रहा है? इस सवाल का जवाब देना होगा। यह घटना बार-बार इसलिए हो रही है क्योंकि जो लोग इस व्यवस्था को चला रहे हैं, वे न तो जवाबदेह हैं और न ही कुशल। इसलिए ये कदम किसी भी तरह से पर्याप्त नहीं हैं।
रांका ने कहा कि इस मामले को लेकर जनता का गुस्सा अब धीरे-धीरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ केंद्रित हो रहा है और अधिक से अधिक प्रदर्शनकारी उनके खिलाफ नारे लगा रहे हैं। उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक हम जंतर-मंतर छोड़कर नहीं जाएंगे।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी देश भर के युवाओं के इतने बड़े विरोध प्रदर्शन और मांग को व्यावहारिक रूप से नजरअंदाज कर रहे थे। सोनम वांगचुक के लंबे अनशन को भी उनकी सरकार ने तवज्जो नहीं दी थी। उल्टे, उन्हें जंतर-मंतर से एक तरह से अगवा कर लिया गया और अस्पताल में नजरबंद कर दिया गया। लेकिन संघ-भाजपा को इस बात का अंदाजा नहीं था कि 20 जुलाई को संसद अभियान के दौरान देश की युवा पीढ़ी सरकार को इस तरह का झटका देगी। उस आंदोलन पर लाठीचार्ज कर उसे दबाने की कोशिश के तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने के बाद पूरे देश में गुस्से की आग दोगुनी हो गई है। छात्रों का यह आंदोलन पूरे देश में एक जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए, उन्होंने (प्रधानमंत्री ने) 'युवा पीढ़ी के कल्याण और भविष्य' की बात कर एक भावनात्मक माहौल बनाने की कोशिश की, लेकिन उनकी वह बात अब बेमानी हो चुकी है।
इससे पहले भी मोदी दो बार लगभग यही बातें कह चुके हैं। ठीक दो साल पहले इसी जुलाई महीने में संसद में खड़े होकर मोदी ने प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ जो कदम उठाने की बात कही थी, उनका आज का बयान भी लगभग वैसा ही है। 2 जुलाई को मोदी ने कहा था, "जो लोग युवा समाज के भविष्य के साथ खिलवाड़ करेंगे, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में देश भर में लगातार गिरफ्तारियां की जा रही हैं। केंद्र सरकार पहले ही एक सख्त कानून बना चुकी है। पूरी परीक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत व सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।"
अगले दिन राज्यसभा में भी इसी तरह का बयान देते हुए उन्होंने कहा था, "मैं देश के युवाओं को आश्वस्त करता हूँ कि जिन्होंने आपके साथ धोखा किया है, उन्हें यह सरकार किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगी। इस देश के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को सख्त से सख्त सजा सुनिश्चित करने के लिए एक के बाद एक कदम उठाए जा रहे हैं।" उन्होंने यह घोषणा प्रश्नपत्र लीक के कारण लगातार नीट और यूजीसी-नेट परीक्षाओं के रद्द होने के बाद की थी। उसके पिछले वर्ष यानी 21 नवंबर 2023 को राजस्थान में विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मोदी ने कहा था, "आईये मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि प्रश्नपत्र लीक में जो कोई भी शामिल होगा, उसे जेल के अंदर भेजा जाएगा। यही मोदी की गारंटी है।" इसके परिणामस्वरूप, मोदी द्वारा दी गई सजा के आज के इस आश्वासन पर केवल कटाक्ष और उपहास ही हुआ है।
मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट के तुरंत बाद, भाजपा के नेता और मंत्री अन्य मुद्दों की तरह इस पर भी ढोल पीटने में जुट गए। गृह मंत्री अमित शाह, जिनके नियंत्रण वाली दिल्ली पुलिस के शर्मनाक रवैये ने सरकार की मंशा पहले ही साफ कर दी थी, उन्होंने पोस्ट किया, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह महत्वपूर्ण कदम उन लोगों के खिलाफ एक मील का पत्थर साबित होगा जो प्रश्नपत्र लीक के जरिए युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।" इसी तरह जितेंद्र सिंह, किरेन रिजिजू, भाजपा अध्यक्ष से लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं तक ने सोशल मीडिया पर इसे लेकर पोस्ट करना शुरू कर दिया। हालांकि, उन्हें पूरे देश के युवाओं के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा है।
विपक्षी दलों की ओर से भी आज मोदी पर तीखा हमला बोला गया। सीपीआई(एम) के पोलितब्यूरो सदस्य एम. ए. बेबी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री वास्तव में यह मानते हैं कि हमारे युवाओं के भविष्य से बढ़कर कुछ नहीं है, तो जिस मंत्री के कार्यकाल में इन प्रश्नपत्रों के लीक होने और उससे जुड़े भ्रष्टाचार की घटनाएं हुई हैं, उस शिक्षा मंत्री को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए। इससे कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं है। धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा! सीपीआई (एम-एल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा, "सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बजाय ठोस कार्रवाई कीजिए।" उन्होंने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग की। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह बहुत देर से किया गया एक मामूली प्रयास है और छात्र इस तरह के आधे-अधूरे कदमों को स्वीकार नहीं करेंगे।
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