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कामरेड कांति बहुत उम्मीद जगाती हैं - डॉ विक्रम सिंह

अपराजिता•07 अगस्त 20263 मिनट पठन82 बार पढ़ा गया

कॉमरेड कांति बहुत उम्मीद जगाती हैं। केवल इसलिए नहीं कि वे एक लड़की हैं, और न ही केवल इसलिए कि वे ग्रामीण भारत में देश की मीडिया और सोशल मीडिया की तामझाम से दूर आंदोलन को आगे बढ़ा रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत है, अपने विचारों और अपने आंदोलन के प्रति उनकी स्पष्टता, प्रतिबद्धता और अडिग विश्वास।

कामरेड कांति बहुत उम्मीद जगाती हैं

_ डॉ विक्रम सिंह

पिछले दिनों छात्र-नौजवानों के आंदोलनों से कई अच्छे नेता उभरकर सामने आए हैं। कोई अपने भाषणों से ख्याति पा रहा है, कोई अपनी रीलों से, तो कोई अपने लड़ाकूपन से। गौर करें तो इनमें से ज्यादातर लोग सोशल मीडिया के जरिए उभरकर सामने आए हैं और देखते ही देखते पूरे देश में प्रसिद्ध हो गए हैं। ये सभी अच्छे नेता दिखाई देते हैं और लोगों की आशाओं का बोझ भी उनके कंधों पर है।

लेकिन ठीक इसी समय बिहार में एक आंदोलन चल रहा था, जिसका नेतृत्व एक गुमनाम लड़की, मीडिया और सोशल मीडिया की चमक-दमक से दूर, बड़ी ही शिद्दत के साथ कर रही थी। मजेदार बात यह है कि अपने क्षेत्र में कॉलेज खुलवाने के लिए उसने स्थानीय लोगों को लामबंद किया, आंदोलन खड़ा किया और बिना किसी समझौते के उसका नेतृत्व करते हुए उसे चरणबद्ध तरीके से लगातार तीखा और व्यापक बनाती चली गई।

यह नेत्री हैं स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की बिहार राज्य अध्यक्षा कॉमरेड कुमारी कांति। वैसे बिहार जैसे राज्य में किसी छात्र संगठन का राज्य अध्यक्ष होना ही अपने आप में बड़ी बात है। पूरे देश ने जंतर-मंतर पर पुलिस की निर्दयता और हिंसा देखी, लेकिन बिहार के इस आंदोलन में कॉमरेड कांति और उनके 45 साथियों को 40 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। गौरतलब है कि कांति की दो बहनें, गायत्री और सावित्री, भी उनके साथ जेल में थीं।

जेल जाना बहुत रोमांचक ढंग से पेश किया जाता है, लेकिन वास्तव में यह बेहद कठिन अनुभव होता है। हर दिन जमानत की उम्मीद रहती है कि आज जमानत मिलेगी और अपने साथियों के बीच, आंदोलन में वापस लौट पाएंगे। लेकिन जब जमानत नामंजूर होने की खबर मिलती है, तब हौसला बनाए रखने के लिए असाधारण साहस की जरूरत होती है। इसी बहादुराना साहस का परिचय कांति और उनके साथियों ने दिया।

जब साथी कांति से मिलने जेल जाते थे, तो उनके चेहरे पर भी दृढ़ संकल्प के साथ खिली मुस्कान साथियों का हौसला बढ़ाती थी। और जब वे 40 दिनों बाद जेल से बाहर आईं, तब भी उनके चेहरे पर वही हौसला और वही मुस्कान थी। शिकन तो छोड़िए, निराशा तक का दूर-दूर तक कोई निशान नहीं था।

कॉमरेड कांति बहुत उम्मीद जगाती हैं। केवल इसलिए नहीं कि वे एक लड़की हैं, और न ही केवल इसलिए कि वे ग्रामीण भारत में देश की मीडिया और सोशल मीडिया की तामझाम से दूर आंदोलन को आगे बढ़ा रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत है, अपने विचारों और अपने आंदोलन के प्रति उनकी स्पष्टता, प्रतिबद्धता और अडिग विश्वास।

ऐसे साथियों को पहचानने और उनका हौसला बढ़ाने की आज ज्यादा जरूरत है। इनके पास शायद लाखों लाइक्स नहीं होंगे, रील बनाने की कला नहीं होगी, लेकिन जूनून कम नहीं है व्यवस्था को बदलने का।

मुश्किल हालात में जमीन पर काम करती हुई कांति हमें भगत सिंह के उन साथियों की याद दिलाती हैं, जिन्होंने इतिहास के मंच पर चमकने के बजाय क्रांति की नींव को मजबूत करने का काम किया।

भगत सिंह कहा करते थे कि क्रांति की इमारत केवल उन लोगों से नहीं बनती, जो उसके शिखर पर दिखाई देते हैं। असली ताकत तो उन “नींव के पत्थरों” में होती है, जिन पर पूरी इमारत खड़ी होती है। वे स्वयं को और अपने साथियों को इसी अर्थ में नींव के पत्थर मानते थे- न कि इमारत के द्वार पर सजे हुए हीरे।

कॉमरेड कांति और उनके साथियों को लाल सलाम!

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(SFI के पूर्व अखिल भारतीय महासचिव)

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कामरेड कांति बहुत उम्मीद जगाती हैं - डॉ विक्रम सिंह

प्रकाशित: 07 अगस्त 2026 • 3 मिनट पठन

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