रतनलाल ब्राम्हण ने मार्क्सवाद को किताबों में नहीं,बल्कि जीवन में पढ़ा, संघर्षों में समझा और जीवन में उतारा - समन पाठक | वाम की आवाज़ | जन समाचार मंच