वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 | Tuesday, 13 October 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंराष्ट्रीय

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

राष्ट्रीय

98 हजार से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

अपराजिता•22 अगस्त 20264 मिनट पठन18 बार पढ़ा गया

केवल शौचालय बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि वहाँ पानी का नल/कनेक्शन होना चाहिए। शौचालयों का निर्माण और रखरखाव इस प्रकार किया जाना चाहिए कि छात्राओं की गोपनीयता और गरिमा बनी रहे। साथ ही दिव्यांग विद्यार्थियों की आवश्यकताओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, स्कूलों में साबुन और पानी से हाथ धोने की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए थे।

साथ ही, लड़कियों को मुफ्त में ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल (Oxo-biodegradable) सेनेटरी नैपकिन और स्कूलों में आपातकालीन आपूर्ति सहित मासिक धर्म संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया था कि मासिक धर्म लड़कियों के स्कूल आने में कोई बाधा न बने।

98 हजार से अधिक स्कूलों में

लड़कियों के लिए शौचालय नहीं,

सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

नई दिल्ली।देश के सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए उपयोग योग्य शौचालयों की कमी कितनी गंभीर है, यह बात सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में सामने आई है। नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने सोमवार को शीर्ष अदालत को बताया कि देश के 98 हजार से अधिक स्कूलों में अभी भी लड़कियों के लिए उपयोग योग्य शौचालय नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए याचिका को उसी पीठ के पास भेजने का निर्देश दिया है, जिसने इस साल के अंत में मासिक धर्म स्वच्छता को जीवन और शिक्षा के मौलिक अधिकार से जोड़ा था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई शुरू हुई। दीपक कंसल नाम के व्यक्ति ने केंद्र, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खिलाफ यह जनहित याचिका दायर की है। उनके वकील ने अदालत का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा, "नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में स्कूलों में लड़कियों के लिए उपयोग योग्य शौचालय अभी भी मौजूद नहीं हैं।"

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस विषय से सम्बंधित एक विस्तृत फैसला पहले ही दे चुका है। उन्होंने वकील से उस फैसले के निर्देशों की समीक्षा करने और वर्तमान आवेदन पर अगली कार्रवाई के बारे में सूचित करने को कहा। इसके बाद पीठ ने कहा कि 30 जनवरी को न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ द्वारा दिए गए फैसले में इस सम्बंध में कई महत्वपूर्ण निर्देश शामिल थे। इसलिए, इस नई याचिका की सुनवाई भी उसी पीठ के समक्ष होना उचित है।

शीर्ष अदालत ने दोहराया कि याचिका में उठाए गए मुद्दे अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जनवरी के उस ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मासिक धर्म स्वच्छता सुनिश्चित करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का ही एक हिस्सा है। इसके साथ ही शिक्षा के अधिकार को इस तरह लागू किया जाना चाहिए कि मासिक धर्म जैसी स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रिया के कारण किसी भी छात्रा को स्कूल जाना न छोड़ना पड़े।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी थी कि शिक्षा केवल स्कूल में प्रवेश लेने का औपचारिक अधिकार नहीं है, बल्कि शिक्षा प्राप्त करने और उसे पूरा करने के लिए आवश्यक वातावरण सुनिश्चित करना भी राज्य का कर्तव्य है। इसी रुख के तहत शीर्ष अदालत ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग और उपयोग योग्य शौचालय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने स्पष्ट किया था कि केवल शौचालय बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि वहाँ पानी का नल/कनेक्शन होना चाहिए। शौचालयों का निर्माण और रखरखाव इस प्रकार किया जाना चाहिए कि छात्राओं की गोपनीयता और गरिमा बनी रहे। साथ ही दिव्यांग विद्यार्थियों की आवश्यकताओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, स्कूलों में साबुन और पानी से हाथ धोने की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए थे।

साथ ही, लड़कियों को मुफ्त में ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल (Oxo-biodegradable) सेनेटरी नैपकिन और स्कूलों में आपातकालीन आपूर्ति सहित मासिक धर्म संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया था कि मासिक धर्म लड़कियों के स्कूल आने में कोई बाधा न बने।

लेकिन उस फैसले के महीनों बाद भी स्थिति में सुधार न होने पर सरकार की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अदालत में पेश किए गए नीति आयोग के आंकड़े देश के स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे और विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा में लम्बे समय से चले आ रहे भेदभाव की तस्वीर पेश करते हैं। इस साल मई में जारी नीति आयोग की रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में 18,592 सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए उपयोग योग्य शौचालय नहीं थे, जबकि इसी अवधि के दौरान 61,540 स्कूलों में कोई भी उपयोग योग्य शौचालय नहीं था।

.

.

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

98 हजार से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

प्रकाशित: 22 अगस्त 2026 • 4 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

361 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

358 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

338 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

333 क्लिक

5

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

330 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
राष्ट्रीय

आपातकाल के समय भी ऐसा दृश्य नहीं देखा - पवित्र सरकार

'सरकार डर गई है, वे डगमगा गए हैं। इसलिए वे फासीवादी तरीके से लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाना चाहते हैं। उन्होंने लोगों के आंदोलन पर फासीवादी शैली में हमला बोला है। सरकार चाहती तो चर्चा के लिए बैठ सकती थी, बात कर सकती थी। कुछ माँगों को स्वीकार भी किया जा सकता था। लेकिन सरकार उस रास्ते पर नहीं गई। असल में उन्हें अपनी कुर्सी की चिंता है, इसलिए यह आक्रामकता है। पहले से ही ट्रेनें रद्द कर दी गईं, मेट्रो बंद कर दी गई, उड़ानों (एयरपोर्ट) से लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। मैंने अपने जीवन में ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा, आपातकाल के समय भी नहीं देखा।'

12 अक्टूबर 2026

राज्य

कलामंदिर में अनुमति रद्द, खुले आसमान के नीचे होगा नागरिक कन्वेंशन

किसी कार्यक्रम में सरकार विरोधी भावना हो सकती है, इस आशंका से पहले से दी गई अनुमति को रद्द करना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है। उनके अनुसार, इस प्रवृत्ति में फासीवादी मानसिकता झलकता है।

11 अक्टूबर 2026

राष्ट्रीय

दिल्‍ली प्रदर्शन 10 अक्टूबर : प्रदर्शन रोकने के लिए गृह सचिव ने की बैठक, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को पीने का पानी भी नहीं दिया जा रहा।

SFI की नेत्री आइशी घोष ने एक वीडियो संदेश में बताया है कि उन्हें मुंडका पुलिस थाने में रखा गया है। उन्हें काफी समय से पीने का पानी नहीं दिया गया है। धरपकड़ के कारण सभी लोग घायल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार यह सोचकर गलतफहमी में है कि पानी या खाना न देकर और लोगों को कैद करके वह इस विरोध को दबा सकती है।

10 अक्टूबर 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
राष्ट्रीय

प्रश्नपत्र लीक:'नीट' रद्द । जिम्मेदार कौन ?

पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ?
नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू- काश्मीर, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में फैल गया था पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है । प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।

केशव कुमार भट्टड़ • 12 मई 2026

राष्ट्रीय

नीट पेपर लीक का 'मास्टरमाइंड' निकला NTA का अधिकारी

सीबीआई ने आरोपी की पहचान पीवी कुलकर्णी के रूप में की है। जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी न केवल रसायन शास्त्र (Chemistry) के प्रोफेसर थे, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'एनटीए' के एक प्रभावशाली अधिकारी भी थे। इसी पद पर रहने के कारण प्रश्नपत्रों तक उनकी आसान पहुंच थी।

केशव कुमार भट्टड़ • 15 मई 2026

राष्ट्रीय

'पहाड़' पर 'दिल्ली' का ताला: स्वायत्तता छीनने पर गरजे मोहम्मद सलीम!

'पहाड़' की ताकत 'पहाड़' के हाथों में क्यों नहीं?! अफसरों के दम पर स्वायत्तता का नाटक बंद करो!" स्वायत्तता छीने जाने पर गरजे मोहम्मद सलीम!" - दार्जिलिंग के कलामंदिर हॉल में आयोजित कार्यकर्ताओं की सभा में सीपीआई(एम) पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार स्वायत्त निकाय जीटीए (GTA) में प्रतिनिधियों के चुनाव कराने के बजाय प्रशासक बिठाकर लोकतंत्र और पहाड़ के अधिकारों का हनन कर रही है। कश्मीर से लद्दाख और दार्जिलिंग तक क्षेत्रीय स्वायत्तता को खत्म करने की साजिश का दावा करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि भाजपा न तो बहुलतावाद को मानती है और न ही विविधता का सम्मान करती है। पार्टी ने घोषणा की कि वे संविधान की छठी अनुसूची, भूमि अधिकार, चाय बागान श्रमिकों की बदहाली, पर्यावरण विनाश और नागरिकता के नाम पर हो रहे भेदभाव के मुद्दों को लेकर अक्टूबर-नवंबर में पहाड़ की जनता के बीच एक व्यापक जन-अभियान चलाएंगे।

केशव कुमार भट्टड़ • 14 सितंबर 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement