"जादवपुर की संस्कृति से समस्या उन्हीं को होनी चाहिए, जिन्होंने अंग्रेजों की गुलामी की है। जब हम सांप्रदायिकता और अस्पृश्यता की राजनीति से मुक्ति की बात करते हैं, तो भाजपा-आरएसएस को परेशानी होती है। मैं उनसे कहना चाहती हूं
जन समाचार मंच
"जादवपुर की संस्कृति से समस्या उन्हीं को होनी चाहिए, जिन्होंने अंग्रेजों की गुलामी की है। जब हम सांप्रदायिकता और अस्पृश्यता की राजनीति से मुक्ति की बात करते हैं, तो भाजपा-आरएसएस को परेशानी होती है। मैं उनसे कहना चाहती हूं

हम निष्पक्ष नहीं हैं, मेहनतकश लोगों के पक्ष में है
— अयंतिका नाथ, सुभाष पारियाल (बारासात)
"सत्ता को भी झुकना पड़ता है, बस उसे झुकाने की शक्ति होनी चाहिए। युवा पीढ़ी ही वह शक्ति है।" राज्य के वामपंथी छात्र और युवा ऐसा ही मानते हैं। बुद्धदेव भट्टाचार्य कल्चरल सेंटर (BBCC) की पहल पर उत्तर 24 परगना के बारासात स्थित रवींद्र भवन में 'जेन-जी' (Gen-Z) को लेकर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम और चर्चा सभा 'प्रोजोम्नेर डाक' आयोजित की गई।
गुरुवार शाम 4 बजे कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मंच संचालक के रूप में दीप्सिता धर और आफरीन बेगम उपस्थित थीं। भारत की जनवादी नौजवान सभा(DYFI) राज्य अध्यक्ष अयनांशु सरकार, स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया की अखिल भारतीय संयुक्त सचिव आईशी घोष, राज्य अध्यक्ष प्रणय कार्जी, मुखपत्र 'छात्रसंग्राम' के संपादक सौविक दास बक्सी, उत्तर 24 परगना के जिला सचिव आकाश कर और जादवपुर विश्वविद्यालय की छात्र नेता एषणा सेन ने अपनी बात रखी।
राज्य में नई सरकार बन चुकी है, लेकिन पिछली सरकार के कार्यकाल में बंद हुए 8,000 स्कूलों में से एक भी अभी तक नहीं खोला गया है। शोधकर्ताओं की स्कॉलरशिप से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है, और राज्य के विश्वविद्यालय सरकारी अनुदान की कमी के कारण लगातार प्रभावित हो रहे हैं। दूसरी ओर, फेरीवालों (हॉकर्स) को हटाने से लेकर जादवपुर विश्वविद्यालय के आंतरिक लोकतांत्रिक ढांचे पर भाजपा-आरएसएस द्वारा किए जा रहे हमलों की इस कार्यक्रम में कड़ी निंदा की गई।
एसएफआई नेता एषणा सेन ने कहा कि 1905 के बंग-भंग विरोधी आंदोलन से ही जादवपुर विश्वविद्यालय की एक ऐतिहासिक भूमिका रही है। वर्तमान में यह एक विश्वस्तरीय शोध केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। उसी जादवपुर में देश के विभाजन के बाद शरणार्थी कॉलोनियां बनी थीं। इन शरणार्थियों की रोज़ी-रोटी की मांगों को लेकर चलाए गए आंदोलनों में विश्वविद्यालय के वामपंथी छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन का एक प्रमुख चेहरा रहीं आईशी घोष ने कहा, "नई शिक्षा नीति को लागू करके मोदी सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी मॉडल थोपने की कोशिश कर रही है। लेकिन भारत के संविधान द्वारा स्वीकृत जन-शिक्षा के ढांचे को नष्ट करना आसान नहीं है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चला 37 दिनों का छात्र आंदोलन इस बात का प्रमाण है। उस आंदोलन के परिणाम से मोदी सरकार को यह समझ जाना चाहिए कि 'आरएसएस स्कूल' का मॉडल देश की शिक्षा व्यवस्था पर थोपकर शिक्षा को मुट्ठी भर वर्ग के हाथों में कैद करने की चाहे कितनी भी कोशिश की जाए, वह विफल ही होगी।"
संविधान पर भाजपा द्वारा किए जा रहे वैचारिक हमले का मुकाबला करने की रणनीति पर प्रणय कार्यी ने चर्चा की। खाली पदों पर भर्ती और स्थायी नौकरियों की मांग को लेकर आंदोलन संगठित करने पर अयनांग्शु सरकार ने विचार रखे। मीडिया की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भारत का लोकतंत्र विषय पर आकाश कर तथा बंगाल में वामपंथ की निरंतर परंपरा पर सौविक दास बक्सी ने बात की।
जंतर-मंतर से जादवपुर तक—शिक्षा-भ्रष्टाचार और देशव्यापी छात्र आंदोलन की लहर पर आधारित एक वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) के प्रदर्शन के साथ 'प्रोजोम्नेर डाक' की शुरुआत हुई। इसके बाद इप्टा उत्तर 24 परगना जिला समिति की ओर से 'कांडारी होशियार' शीर्षक से एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया और अरात्रिका सिन्हा ने संगीत प्रस्तुत किया। रौनक चक्रवर्ती ने 'स्कूल बचाओ, मूल बचाओ' शीर्षक से एक रैप गाना पेश किया।
कार्यक्रम का समापन संविधान की प्रस्तावना के पाठ और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
समापन भाषण में दीप्सिता धर ने कहा, "जादवपुर की संस्कृति से समस्या उन्हीं को होनी चाहिए, जिन्होंने अंग्रेजों की गुलामी की है। जब हम सांप्रदायिकता और अस्पृश्यता की राजनीति से मुक्ति की बात करते हैं, तो भाजपा-आरएसएस को परेशानी होती है। मैं उनसे कहना चाहती हूं कि क्लिकबाइट की राजनीति के खिलाफ रीचबाईट की राजनीति खड़ी हो चुकी है। व्यंग्य और हास्य के जरिए ही युवा सरकार की इस विभाजनकारी राजनीति पर सवाल उठा रहे हैं। वे प्यार समझते हैं। अगर उन पर अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश की जाएगी, तो वे उसका जवाब ठीक उसी तरह देंगे जैसे उन्होंने जंतर-मंतर के आंदोलन में दिया था। और ठीक इसी जगह वामपंथ की जीत होगी, क्योंकि हम प्यार की बात करते हैं। वामपंथ अपराजित है, क्योंकि मेहनतकश लोगों के प्यार में हम ही हैं। जेन-जी के साथ भी हम प्यार में हैं, और लड़ाई-संघर्ष में भी साथ हैं।"
हाल ही में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने वामपंथियों को चेतावनी दी थी कि अगर दुर्गा पूजा को 'शरदोत्सव' कहा गया, तो भाजपा पूजा पंडालों के बाहर वामपंथियों को बुक स्टॉल नहीं लगाने देगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दीप्सिता धर ने कहा, "हम चाहे 'शरदोत्सव' कहें या 'दुर्गा पूजा', पंडालों के बाहर किताबों के स्टॉल तो लगेंगे ही। ज़रूरत पड़ी तो इस बार मुख्यमंत्री के रिश्वत लेने वाले वीडियो के साथ हम शरदोत्सव के बुक स्टॉलों पर मौजूद रहेंगे।"
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साभार: गणशक्ति
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अपलोडर: VKA-N9LYCE • प्रकाशित: 11 सितंबर 2026 • 4 मिनट पठन

प्रश्न करना /
राजद्रोह /
आंदोलन करना /
देशद्रोह /
हक़ मांगना /
राष्ट्रद्रोह /
बना दिया ।
इन सबके बावजूद /
लोग डर नहीं रहे /
छोटे-छोटे बच्चे /
खिलाफत को /
उतारू हैं ।
16 सितंबर 2026

मंगलवार दोपहर गड़वेता के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी।
16 सितंबर 2026

हम तो /
नारी शक्ति के समक्ष /
नतमस्तक हैं ।
हम सभी /
एक स्त्री से ही तो /
जनमे हैं ।
उसी के संरक्षण में /
हमारा स्वर्णिम /
बालपन बीता है ।
12 सितंबर 2026

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026
श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।
श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026
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