गत सोमवार, 7 सितंबर की रात भाजपा ने सीपीआई(एम) के जलपाईगुड़ी जिला कार्यालय पर हमला बोला। वहाँ तोड़फोड़ की गई और आग लगाने की कोशिश की गई। पार्टी का झंडा जलाया गया और शहीद वेदी को क्षतिग्रस्त किया गया। सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने इसका प्रतिरोध किया, जिसमें वे घायल भी हुए। भाजपा नेताओं समेत हमलावर अपराधी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की आँखों की किरकिरी बन चुकी सीपीआई(एम) के कार्यालयों को खुद मुख्यमंत्री हमले का निशाना बनवा रहे हैं। जलपाईगुड़ी में सीपीआई(एम) का जिला कार्यालय 'सुबोध सेन भवन', जहाँ भाजपा के असामाजिक तत्वों ने रात के अंधेरे में हमला किया था, उसी कार्यालय में शुक्रवार को बैठकर आयोजित पत्रकार वार्ता में पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि यह भाजपा का कोई छोटा-मोटा या अचानक किया गया हमला नहीं है। सीपीआई(एम) अन्याय का विरोध कर रही है और श्रमजीवी (मेहनतकश) लोगों के अधिकारों की बात उठा रही है, इसीलिए मुख्यमंत्री भाजपा के डकैतों के गिरोह को उतारकर सीपीआई(एम) के कार्यालयों पर हमला करवा रही हैं। इस रास्ते पर हिटलर और मुसोलिनी सफल नहीं हो सके, और ये भी नहीं होंगे।
गत सोमवार, 7 सितंबर की रात भाजपा ने सीपीआई(एम) के जलपाईगुड़ी जिला कार्यालय पर हमला बोला। वहाँ तोड़फोड़ की गई और आग लगाने की कोशिश की गई। पार्टी का झंडा जलाया गया और शहीद वेदी को क्षतिग्रस्त किया गया। सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने इसका प्रतिरोध किया, जिसमें वे घायल भी हुए। भाजपा नेताओं समेत हमलावर अपराधी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं।
इस स्थिति में शुक्रवार को मोहम्मद सलीम क्षतिग्रस्त पार्टी कार्यालय पहुँचे और घायलों से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने जिला सचिव पीयूष मिश्र, पार्टी नेता सलील आचार्य, जितेन दास, कौशिक भट्टाचार्य, बिप्लब झा सहित अन्य नेताओं के साथ पत्रकार वार्ता की।
सलीम ने कहा कि सीपीआई(एम) जनता से आर्थिक मदद लेकर और लोगों के श्रम से तिनका-तिनका जोड़कर अपने पार्टी दफ़्तरों का निर्माण करती है। जो लोग व्यक्ति-केंद्रित और परिवार-केंद्रित राजनीति करते हैं, कम्युनिस्ट पार्टी की राजनीति उनके जैसी नहीं होती। कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यालयों से श्रमजीवी और पीड़ित लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन खड़े करने का काम होता है। इसीलिए भाजपा को जलन हो रही है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सवाल उठा रहे हैं कि पार्टी दफ़्तर क्यों है? ममता बनर्जी से ही उन्होंने यह राजनीति सीखी है। ममता बनर्जी भी यही कहा करती थीं। बाद में देखा गया कि उन्हीं के अवैध मकान हैं और वे सरकार से नोटिस पा रहे हैं। सीपीआई(एम) को ऐसे नोटिस नहीं लेने पड़ते। वहीं दूसरी ओर, भाजपा ने कॉरपोरेट के पैसों से हर जगह करोड़ों रुपये खर्च करके पाँच सितारा होटलों जैसे दफ़्तर बनाए हैं। यह पैसा कहाँ से आया, इसका वे कोई हिसाब भी नहीं देते।
सीपीआई(एम) को ही भाजपा द्वारा हमले का मुख्य निशाना चुने जाने का कारण बताते हुए सलीम ने कहा, "एसआईआर (SIR) में नाम कटने, अन्नपूर्णा योजना, बेरोजगारी, महंगाई, फसलों के दाम न मिलने, बाढ़ और कटाव जैसी समस्याओं पर वामपंथियों के अलावा और कौन बोल रहा है? भाजपा ने कहा था कि सत्ता में आकर वे भ्रष्टाचार खत्म करेंगे और लूट का पैसा गरीबों को लौटाएंगे। अब वे सब भूल चुके हैं और हर समय सीपीआई(एम) का ही विरोध कर रहे हैं। हमें उनका यह डर अच्छा लग रहा है। शहीदों के नाम पर शपथ लेकर हम इन हमलों का प्रतिरोध करेंगे। देशभर में नई पीढ़ी अन्याय के खिलाफ विरोध की भाषा में जवाब दे रही है, और जलपाईगुड़ी में भी विरोध हो रहा है। पार्टी के जिला कार्यालय पर हमले के खिलाफ सभी वामदल और नागरिक समाज मुखर होकर विरोध कर रहे हैं। हिटलर और मुसोलिनी मिट गए, ये भी मिट जाएंगे।"
तमाम हमलावरों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग करते हुए पीयूष मिश्र ने कहा कि भाजपा अपराधियों को बढ़ावा दे रही है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन को अपराधियों पर सख्ती बरतनी होगी, वरना जलपाईगुड़ी में पेशेवर अपराधियों का राज कायम हो जाएगा।
उत्तर बंगाल में जातियों और समुदायों के नाम पर भाजपा की विभाजनकारी राजनीति का विरोध करते हुए मोहम्मद सलीम ने पत्रकारों से कहा, "भाजपा और तृणमूल ने यहाँ जातीय पहचान के नाम पर जनता के एक हिस्से को दूसरे हिस्से से अलग करने की कोशिश की है। कामतापुरी के नाम पर बंटवारा किया और अनंत महाराज को आगे बढ़ाया। लेकिन इससे राजबंशी समुदाय के गरीब लोगों का क्या भला हुआ? उल्टे प्राकृतिक संसाधनों की बेरोक-टोक लूट का रास्ता साफ हो गया। हम कह रहे हैं कि जीवन और आजीविका की मांगों को लेकर सभी जातियों के लोगों को एकजुट होना होगा। महाराज के समय अस्पृश्यता और भेदभाव के खिलाफ एक समाज सुधारक के रूप में पंचानन बर्मा ने आवाज़ उठाई थी। और आज भाजपा एक ऐसे बाबा को लेकर आई है जो अस्पृश्यता थोपना चाहता है। यही इनकी राजनीति है। संयुक्त आंदोलन को कमजोर करने और विभाजन की राजनीति के लिए वे अपने झोले से एक के बाद एक सांप निकाल रहे हैं; इस साजिश को कभी सफल मत होने दीजिए।"
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साभार:- गणशक्ति
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