जन समाचार मंच

कोलकाता: हमले और धमकियों के बल पर वामपंथी युवा आंदोलन को झुकाया नहीं जा सकता। रविवार को कोलकाता के धर्मतल्ला में आयोजित 'इंकलाब समावेश' के मंच से युवा आंदोलन के वर्तमान और पूर्व नेताओं ने यह साफ संदेश दिया। डीवाईएफआई के पूर्व अखिल भारतीय महासचिव मोहम्मद सलीम ने जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि वामपंथी युवा आंदोलन के कार्यकर्ता किसी बहकावे या भेड़चाल में शामिल न होकर अपने लक्ष्य पर टिके रहकर राजनीति कर रहे हैं। चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, वे अपने सिद्धांतों पर अडिग रहकर सभी के लिए काम, शिक्षा, स्वास्थ्य और लोकतांत्रिक अधिकारों की माँग को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं। यह बिना नीति-सिद्धांत वाली तृणमूल-कांग्रेस जैसी संस्था नहीं है कि चुनाव आयोग के जरिए पार्टी का नाम या चुनाव चिन्ह जब्त होते ही लड़ाई का मैदान खाली हो जाए।

कोलकाता के धर्मतल्ला चौराहे पर विशाल जनसैलाब को सम्बोधित करते हुए डीवाईएफआई पश्चिम बंगाल के पूर्व सचिव आभास रायचौधरी और मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा कि युवाओं को डरा-धमकाकर नहीं रोका जा सकता। इससे पहले 20 सितंबर 2022 को इसी धर्मतल्ला में डीवाईएफआई ने 'इंसाफ सभा' आयोजित की थी, जिसे ममता बनर्जी की तत्कालीन सरकार की पुलिस नहीं रोक सकी थी। और अब शुभेंदु अधिकारी की सरकार की पुलिस भी इस 'इंकलाब समावेश' को नहीं रोक पाई। जब युवा एकजुट होकर सड़कों पर उतरते हैं, तो डराने वालों को भागने का रास्ता नहीं मिलता।
युवा समाज को एकजुट होकर सड़कों पर उतरने का आह्वान करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि जो पुलिस पिछले 15 सालों से बुआ-भतीजे (ममता-अभिषेक) की चाटुकारिता कर रही थी, वही अब अपनी वफादारी बदलकर शुभेंदु अधिकारी की हो गई है। अगर भीड़ कम होती तो ये पुलिस वाले लाठियाँ भाँजने आ जाते। लेकिन दिल्ली की 'डबल इंजन' सरकार के खिलाफ कोलकाता के धर्मतल्ला की सड़कों पर उतरी नई पीढ़ी अब बीजेपी से जवाब माँग रही है कि चुनाव से पहले किए गए वादे कहाँ गए?
रही बात 'इंकलाब' के नारे की, तो डीवाईएफआई नेताओं ने शहीद भगत सिंह के 'इंकलाब जिंदाबाद' के ऐतिहासिक नारे को याद करते हुए डीवाईएफआई को उस विरासत का सच्चा उत्तराधिकारी बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग 'इंकलाब' और 'आजादी' जैसे नारों पर आपत्ति जताते हैं, स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका गद्दारी की रही है। डीवाईएफआई नेताओं ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस इन नारों से इसलिए डरते हैं क्योंकि ये नारे सभी के लिए शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करते हैं। जो लोग स्कूल बंद कर रहे हैं और नौकरियों में भ्रष्टाचार कर रहे हैं, वही इन नारों से भयभीत हैं।
" केंद्र की बीजेपी सरकार ने आम जनता के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है। लेकिन वे बंगाल की मिट्टी और संस्कृति को नहीं समझते। उत्तर भारत से बाहरी लोगों को लाकर बंगाल की संस्कृति को नष्ट नहीं किया जा सकता। वामपंथी धर्म के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि राजनीति में धर्म के इस्तेमाल और धर्म के नाम पर लोगों को बाँटने के खिलाफ हैं। युवाओं ने शिक्षा और रोजगार की जो मांग उठाई है, वह हर नागरिक के लिए है, किसी खास धर्म के लिए नहीं। देश की जनता के एकजुट आंदोलन के कारण ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के निर्देश पर ही उनके सहयोगी आबिद हसन सफरानी ने 'जय हिंद' का नारा दिया था, जिसने भारत के सभी धर्मों के लोगों को एक सूत्र में पिरोया।"

पुलिस की बर्बरता के कारण सुदीप्त गुप्त और मईदुल इस्लाम शहीद हुए, लेकिन वामपंथियों ने मैदान नहीं छोड़ा। आज बंगाल में बीजेपी सरकार के आने के बाद से ही लोगों की आजीविका पर हमले किए जा रहे हैं, हाकरों को हटाया जा रहा है और छोटे कारोबारियों को निशाना बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री कानून व्यवस्था का हवाला दे रहे हैं, लेकिन यह राज्य किसी की पैतृक संपत्ति नहीं है। लोगों को हिंदू-मुस्लिम में बाँटने की जो राजनीति हो रही है, वामपंथी उसमें फँसने वाले नहीं हैं।

चैतन्य महाप्रभु, लालन फकीर, रामकृष्ण परमहंस और रवींद्रनाथ की इस बंगाल की धरती पर बीजेपी को तृणमूल-कांग्रेस ही लेकर आई थी। आज वे वामपंथियों पर हमले कर रहे हैं, लेकिन विधानसभा में केवल एक वामपंथी विधायक होने के बावजूद पूरे राज्य में बीजेपी के खिलाफ असली लड़ाई वामपंथी ही लड़ रहे हैं। उन्होंने युवा कार्यकर्ताओं से राज्य के किसानों, मजदूरों और कमजोर वर्गों के साथ खड़े होने का आह्वान किया।

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि शुभेंदु अधिकारी दरअसल ममता बनर्जी के ही पदचिन्हों पर चल रहे हैं। हाल ही में सीपीआई(एम) कार्यालय पर बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए हमले पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने राज्य में गृह युद्ध जैसे हालात बनाने के बजाय कानून का शासन बहाल करने की मांग की और चेतावनी दी कि अगर शुभेंदु अधिकारी सत्ता के नशे में ममता बनर्जी के रास्ते पर चलेंगे, तो उनका अंजाम भी ममता बनर्जी जैसा ही होगा।
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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति
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अपलोडर: VKA-43UUB7 • प्रकाशित: 21 सितंबर 2026 • 5 मिनट पठन

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