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देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम

अपराजिता•25 सितंबर 20264 मिनट पठन10 बार पढ़ा गया

"यह जो चुनाव हुआ, उसमें तरह-तरह की गड़बड़ियां करके और वोटर लिस्ट को ताक पर रखकर वोट कराए गए। एक शब्द में कहें तो कानून का पालन किए बिना काम हुआ है, नियम-कानून जैसा कुछ नहीं छोड़ा गया। हमने शुरुआत से ही संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात की है। असल बात यह है कि भ्रष्ट तृणमूल-कांग्रेस बीजेपी के साथ मिल गई है। शुभेंदु अधिकारी ने एक समय तृणमूल-कांग्रेस का झंडा लेकर करोड़ों रुपये खर्च किए और पुलिस व असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल करके पंचायत पर कब्जा किया था—यह बात लोग खुद कह रहे हैं। वही शुभेंदु अधिकारी अब बीजेपी में जाकर राज्य सरकार में आ गए हैं। चुनाव नतीजों के बाद कई लोगों ने सोचा था कि शायद अब भ्रष्टाचार बंद होगा। हमने तभी कहा था कि इन दोनों पार्टियों में कोई अंतर नहीं है। वही बात अब साबित हो चुकी है। तृणमूल-कांग्रेस खुलेआम बीजेपी में चली गई है। तो फिर क्या इस पार्टी से विकास की उम्मीद की जा सकती है? शुभेंदु अधिकारी और शमीक भट्टाचार्य हर दिन अपनी बात बदलते हैं। बीजेपी अपने फायदे के लिए आरएसएस के जरिए हुमायूं कबीर जैसे नेताओं को तैयार करती है। यही उनकी नीति है।"

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

रेजिनगर में चुनावी प्रचार में मोहम्मद सलीम

देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी

रेजिनगर: तृणमूल-कांग्रेस के भ्रष्टाचारी अब बीजेपी में हैं। इसलिए विकास के बजाय कटमनी (रंगदारी) और लूटपाट और बढ़ेगी, यह तय है। लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे। इस अनैतिकता को केवल लाल झंडा ही रोक सकता है। गुरुवार को मुर्शिदाबाद के रेजिनगर में एक चुनावी प्रचार सभा में सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने यह बात कही। उन्होंने आगे कहा कि

" बीजेपी के संरक्षण में देश अब अंबानी-अडानी का हो जाएगा, गरीबों पर बीजेपी का जुल्म बढ़ेगा और धार्मिक नफरत फैलेगी।"

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने कानून का पालन किए बिना काम किया है। देश में 13 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। तृणमूल या बीजेपी नहीं, बल्कि उन सभी गरीब लोगों के हक में केवल वामपंथी ही बात कर रहे हैं और करते रहेंगे। इस विधानसभा में डोमकल के सीपीआई (एम) विधायक डोमकल सहित मुर्शिदाबाद के लोगों के अधिकारों को दिलाने की कोशिश कर रहे हैं और विभिन्न मांगें उठा रहे हैं। उसी तरह रेजिनगर के सीपीआई (एम) उम्मीदवार भी चाहते हैं कि वे आम गरीब लोगों के अधिकार दिलाएं। और इसके लिए आपको लाल झंडे का समर्थन करना होगा।

इस दिन रेजिनगर के तकीपुर में यह चुनावी जनसभा हुई। मोहम्मद सलीम के अलावा सीपीआई (एम) मुर्शिदाबाद जिला कमेटी के सचिव जामिर मोल्ला, उम्मीदवार साईद, आफरीन बेगम आदि उपस्थित थे। इस दिन सुबह चुनाव प्रचार और जनसभा के प्रचार के लिए पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं ने रामपाड़ा 1 और 2 क्षेत्रों का दौरा किया तथा 3 रैलियों में भाग लिया। आगामी 6 अक्टूबर को रेजिनगर विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव है। उस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इस समय सघन और निरंतर प्रचार चल रहा है। उम्मीदवार हर इलाके का दौरा कर रहे हैं और घर-घर जा रहे हैं। इसके साथ ही साइकिल, बाइक रैली और रोड शो भी चल रहे हैं। प्रचार में स्थानीय मांगों के साथ-साथ आरएसएस-बीजेपी की सांप्रदायिक नीतियों, धार्मिक कट्टरता और तानाशाही रवैये की बात सामने आ रही है। प्रचार में एसआईआर (SIR) के कारण जानबूझकर मतदाता सूची से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश का मुद्दा भी उठ रहा है।

मोहम्मद सलीम ने कहा,

"यह जो चुनाव हुआ, उसमें तरह-तरह की गड़बड़ियां करके और वोटर लिस्ट को ताक पर रखकर वोट कराए गए। एक शब्द में कहें तो कानून का पालन किए बिना काम हुआ है, नियम-कानून जैसा कुछ नहीं छोड़ा गया। हमने शुरुआत से ही संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात की है। असल बात यह है कि भ्रष्ट तृणमूल-कांग्रेस बीजेपी के साथ मिल गई है। शुभेंदु अधिकारी ने एक समय तृणमूल-कांग्रेस का झंडा लेकर करोड़ों रुपये खर्च किए और पुलिस व असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल करके पंचायत पर कब्जा किया था—यह बात लोग खुद कह रहे हैं। वही शुभेंदु अधिकारी अब बीजेपी में जाकर राज्य सरकार में आ गए हैं। चुनाव नतीजों के बाद कई लोगों ने सोचा था कि शायद अब भ्रष्टाचार बंद होगा। हमने तभी कहा था कि इन दोनों पार्टियों में कोई अंतर नहीं है। वही बात अब साबित हो चुकी है। तृणमूल-कांग्रेस खुलेआम बीजेपी में चली गई है। तो फिर क्या इस पार्टी से विकास की उम्मीद की जा सकती है? शुभेंदु अधिकारी और शमीक भट्टाचार्य हर दिन अपनी बात बदलते हैं। बीजेपी अपने फायदे के लिए आरएसएस के जरिए हुमायूं कबीर जैसे नेताओं को तैयार करती है। यही उनकी नीति है।"

सलीम ने आगे कहा, "चुनाव से पहले तरह-तरह के वादे थे और चुनाव के बाद बुलडोजर से बेदखली हुई। धरपकड़ और झूठे मुकदमे और बढ़ गए। यह आरएसएस की नीति है। यह आरएसएस हिंदू राष्ट्र के नाम पर अडानी और अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है। तानाशाही चलाकर उग्र धार्मिक कट्टरता पैदा की जा रही है। सिर्फ मुस्लिम विद्वेष ही नहीं, बल्कि आदिवासी, अनुसूचित जाति सहित गरीब लोगों और महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहा है। जन कल्याण के कामों में यह बीजेपी कहीं नजर नहीं आती। भूतनी के चर और मानिकचक में जो बाढ़ आई, उसमें बीजेपी के लोग तो कहीं दिखे ही नहीं।" उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "क्या वाममोर्चा के समय आरएसएस सिर उठा पाया था? क्या दंगे-फसाद पनप पाए थे? ऐसा कुछ नहीं हुआ था। स्कूल बने थे, अस्पताल बने थे और चारों तरफ से राज्य का बुनियादी ढांचा तैयार हो रहा था। और अब स्कूल बंद हो रहे हैं, लोग रोजगार खो रहे हैं, नई भर्तियां नहीं हो रही हैं। बीजेपी ने हिंदू-मुस्लिम उकसावा देकर वोटों के ध्रुवीकरण का लक्ष्य बनाया है। सीपीआई (एम) इन सभी के खिलाफ मजबूती से खड़ी है और लड़ाई लड़ रही है। इसलिए लाल झंडे को और मजबूत बनाना होगा।"

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साभार:बांग्ला दैनिक गणशक्ति

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देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम

अपलोडर: VKA-43UUB7 • प्रकाशित: 25 सितंबर 2026 • 4 मिनट पठन

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