वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
सोमवार, 02 नवंबर 2026 | Monday, 02 November 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंराज्य

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

राज्य

मप्र: केन-बेतवा लिंक परियोजना: प्रशासन झुका, धरना स्थगित

केशव कुमार भट्टड़•02 नवंबर 20264 मिनट पठन49 बार पढ़ा गया

छतरपुर/पन्ना के अजयगढ़ क्षेत्र के बनहरी टपरियन में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों का धरना, 15 दिनों में मांगों के निराकरण के प्रशासनिक आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है। कलेक्टर हर्ष सिंह के दौरे और ग्रामीणजनों की समस्याओं की सुनवाई के बाद आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर ने मांगों का ज्ञापन सौंपकर यह घोषणा की।

माकपा नेत्री बृंदा करात ने 26 अक्टूबर की शाम पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रशासनिक दमन और भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की थी और इस आंदोलन को भोपाल से लेकर दिल्ली तक ले जाने का आह्वान किया था। वृंदा करात के नेतृत्व में सीपीआई (एम) का प्रतिनिधि मण्डल 26 और 27 अक्टूबर को केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से प्रभावित आंदोलनकारियों और विस्थापितों के साथ एकजुटता व्यक्त करने आंदोलन स्थल पर पहुंचा था।

मप्र: केन-बेतवा लिंक परियोजना: प्रशासन झुका, धरना  स्थगित


माकपा नेता वृंदा करात के नेतृत्व में सीपीआई (एम) का प्रतिनिधि मण्डल 26 और 27 अक्टूबर को केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से प्रभावित आंदोलनकारियों और विस्थापितों के साथ एकजुटता व्यक्त करने आंदोलन स्थल पर पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर विस्थापन में अनियमितताओं, कानून के उल्लंघन, मुआवजे में भ्रष्टाचार, दमनकारी रवैये और झूठे मुकदमों को वापस लेकर दिव्या अहिरवार की रिहाई की माँग की थी । कलेक्टर ने जनसुनवाई कर सभी विस्थापितों का पक्ष सुनने, उच्चस्तरीय कमेटी से जाँच कराने और झूठे मुकदमों की समीक्षा का आश्वासन दिया था। उसी के तहत वे आज गांव पहुंचे थे और जनसुनवाई तथा कार्रवाई शुरू हुई - जसविंदर सिंह, सचिव, सीपीआई (एम), मध्यप्रदेश


केन-बेतवा लिंक परियोजना

बनहरी टपरियन में प्रशासन का आश्वासन

ग्रामीणों ने स्थगित किया धरना

~मध्यप्रदेश से जसविंदर सिंह~

मध्यप्रदेश: छतरपुर/पन्ना, 1 नवंबर 2026. : केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय सिंचाई परियोजना, रूंज और मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना के कारण विस्थापित होने वाले परिवारों के संघर्ष ने एक नया मोड़ ले लिया है। विस्थापन, उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांगों को लेकर अजयगढ़ क्षेत्र के बनहरी टपरियन गांव में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच, कलेक्टर हर्ष सिंह ने रविवार को आंदोलन स्थल का दौरा किया। जिला प्रशासन द्वारा 15 दिनों के भीतर मांगों के निराकरण का आश्वासन दिए जाने के बाद, आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर ने मांगों का ज्ञापन सौंपकर फिलहाल धरना स्थगित करने की घोषणा की है।

प्रमुख बिंदु:

प्रशासनिक संवाद और आश्वासन: कलेक्टर हर्ष सिंह ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर धरने पर बैठे ग्रामीणजनों की समस्याओं को विस्तार से सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि 15 दिनों के भीतर उचित मांगों पर कार्रवाई कर समस्याओं का समाधान किया जाएगा।

मुआवजा और सत्यापन प्रक्रिया: शासन के निर्देशों के तहत विस्थापित परिवारों को अतिरिक्त मुआवजा राशि वितरित करने का कार्य जारी है। राजस्व और जल संसाधन विभाग की टीमें शेष पात्र परिवारों के बैंक खाता सत्यापन और दस्तावेज जुटाने में जुटी हैं।

पुनर्वास स्थल पर बुनियादी सुविधाएं: प्रशासन ने दावा किया है कि नवीन बसावट स्थलों पर प्रभावित परिवारों के लिए मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

धरना स्थगित

कलेक्टर से हुई चर्चा के बाद आंदोलनकारियों ने अपना धरना समाप्त करने की घोषणा करते हुए धरना स्थल से सामान हटा लिया।


क्या है मामला ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण पन्ना और छतरपुर के दर्जनों गाँव डूब क्षेत्र व टाइगर रिजर्व के बफर जोन में आ रहे हैं, जिससे हजारों आदिवासी परिवार उजड़ने की कगार पर हैं। बिना उचित-मुआवजे और पुनर्वास के हो रहे इस जबरन विस्थापन के खिलाफ ग्रामीण 'चिता आंदोलन' चला रहे हैं। सत्ता की भयावह बर्बरता - बेधड़क पुलिसिया मार और झूठे मुकदमों में जेल - के बावजूद केन-बेतवा क्षेत्र के हजारों निहत्थे आदिवासी और ग्रामीण अपने जल, जंगल, जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए अंतिम साँस तक संघर्ष करने को संकल्पित हैं।

वे महीनों से 'चिता आंदोलन' चला रहे हैं। परियोजना के लिए प्रशासन और पुलिस द्वारा घरों को तोड़ने, झूठे मुकदमे लादने तथा महिलाओं और युवाओं पर भारी दमन ढाया जा रहा है। इसी क्रम में माकपा नेत्री बृंदा करात ने 26 अक्टूबर की शाम पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रशासनिक दमन और भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने इस आंदोलन को भोपाल से लेकर दिल्ली तक ले जाने का आह्वान किया। पत्रकार वार्ता में उनके साथ मध्यप्रदेश सीपीआई (एम) के सचिव जसविंदर सिंह और आंदोलन के नेता अमित भटनागर मौजूद थे। वृंदा करात के नेतृत्व में सीपीआई (एम) का प्रतिनिधि मण्डल 26 और 27 अक्टूबर को केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से प्रभावित आंदोलनकारियों और विस्थापितों के साथ एकजुटता व्यक्त करने आंदोलन स्थल पर पहुंचा था।

प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर विस्थापन में अनियमितताओं, कानून के उल्लंघन, मुआवजे में भ्रष्टाचार, दमनकारी रवैये और झूठे मुकदमों को वापस लेकर दिव्या अहिरवार की रिहाई की माँग की थी । कलेक्टर ने जनसुनवाई कर सभी विस्थापितों का पक्ष सुनने, उच्चस्तरीय कमेटी से जाँच कराने और झूठे मुकदमों की समीक्षा का आश्वासन दिया था।

'वाम की आवाज' में छपी रिपोर्ट का लिंक


मध्यप्रदेश ~ बर्बर सत्ता और केन-बेतवा विस्थापितों का चिता आंदोलन ~


जसविंदर सिंह सीपीआई(एम) मध्यप्रदेश के राज्य सचिव और केंद्रीय कमेटी के सदस्य हैं।

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

मप्र: केन-बेतवा लिंक परियोजना: प्रशासन झुका, धरना स्थगित

प्रकाशित: 02 नवंबर 2026 • 4 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

365 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

364 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

341 क्लिक

4

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

334 क्लिक

5

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

334 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
शिक्षा जगत

बच्चा फेल क्यों होगा ? ~ कुमार राणा ~

पास-फेल की व्यवस्था लौटाने की बहस दरअसल शिक्षा की जिम्मेदारी से बचने की सरकारी कोशिश है। बच्चों को डराकर पढ़ाने की सोच न केवल अवैज्ञानिक है, बल्कि सामाजिक असमानता को भी बढ़ाती है। स्कूलों में शिक्षकों, संसाधनों और बेहतर शिक्षण व्यवस्था की कमी के लिए बच्चे जिम्मेदार नहीं हैं। पास-फेल हटाने के बाद निरंतर मूल्यांकन की व्यवस्था लागू न करना भी सरकार की विफलता है। दुनिया के सफल शिक्षा मॉडल बताते हैं कि हर बच्चे को पढ़ाना राज्य की जिम्मेदारी है, बच्चे को दंडित करना नहीं। सवाल पास-फेल का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही तय करने का है।

01 नवंबर 2026

अंतर्राष्ट्रीय

इजरायल चुनाव: फ़ासिज़्म पर अंकुश

इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण बात है—इज़राइल के फ़िलिस्तीनी-अरब नागरिकों की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी, वामपंथी आंदोलन की भूमिका और यहूदी-अरब एकजुटता की संभावनाएँ। रिकॉर्ड मतदान के बल पर इज़राइली राजनीति में निर्णायक ताकत बने अरब दल। नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य दांव पर।

01 नवंबर 2026

अंतर्राष्ट्रीय

लूला की जीत फासीवाद और ट्रम्प की हार है ~ आंद्रे सिंट्रा और सीज़र ज़ावियर ~

जनता की ताकत और युवाओं के संघर्ष ने ब्राजील में अमेरिकी परस्त उग्र दक्षिणपंथ को करारी शिकस्त दी। ब्राजील के राष्ट्रपति लुई इनासिओ लूला डा सिल्वा ने अस्सी वर्ष की आयु में चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है, जिसमें उन्होंने ट्रंप प्रशासन समर्थित उग्र दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लेवियो बोल्सनारो को पराजित किया। इस कड़े मुकाबले में छात्रों, मजदूरों और युवाओं ने निर्णायक भूमिका निभाते हुए भारी संख्या में मतदान किया और प्रशासनिक बाधाओं को दरकिनार कर इसे फासीवादी ताकतों के खिलाफ जनता की एक महान विजय बना दिया। अपने विजय भाषण में लूला ने देश की संप्रभुता, शिक्षा, स्वास्थ्य, अपराध नियंत्रण और स्वतंत्र तकनीकी विकास पर जोर दिया। हालांकि, नई संसद में दक्षिणपंथियों की बढ़ती ताकत को देखते हुए संपादकों ने भविष्य में कड़े संघर्ष और निरंतर जन-आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।

31 अक्टूबर 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
राज्य

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है। एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन लेफ्ट फ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का। यह उससे कहीं ज्यादा हैं। लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026

राज्य

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

सोशल मीडिया पर समाज के सभी वर्गों के लोग भाजपा सरकार के इस दिशा-निर्देश को लेकर गुस्सा जताने लगे हैं। सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और सिंडिकेट को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के साथ काम शुरू करने का वादा करने वाली सरकार अचानक कर्मचारियों के पीछे क्यों हाथ धोकर पड़ गई है?

श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

राज्य

राष्ट्र तुम किसके हो ? - शमीक लाहिड़ी

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।

श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement