छतरपुर/पन्ना के अजयगढ़ क्षेत्र के बनहरी टपरियन में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों का धरना, 15 दिनों में मांगों के निराकरण के प्रशासनिक आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है। कलेक्टर हर्ष सिंह के दौरे और ग्रामीणजनों की समस्याओं की सुनवाई के बाद आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर ने मांगों का ज्ञापन सौंपकर यह घोषणा की।
माकपा नेत्री बृंदा करात ने 26 अक्टूबर की शाम पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रशासनिक दमन और भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की थी और इस आंदोलन को भोपाल से लेकर दिल्ली तक ले जाने का आह्वान किया था। वृंदा करात के नेतृत्व में सीपीआई (एम) का प्रतिनिधि मण्डल 26 और 27 अक्टूबर को केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से प्रभावित आंदोलनकारियों और विस्थापितों के साथ एकजुटता व्यक्त करने आंदोलन स्थल पर पहुंचा था।
माकपा नेता वृंदा करात के नेतृत्व में सीपीआई (एम) का प्रतिनिधि मण्डल 26 और 27 अक्टूबर को केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से प्रभावित आंदोलनकारियों और विस्थापितों के साथ एकजुटता व्यक्त करने आंदोलन स्थल पर पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर विस्थापन में अनियमितताओं, कानून के उल्लंघन, मुआवजे में भ्रष्टाचार, दमनकारी रवैये और झूठे मुकदमों को वापस लेकर दिव्या अहिरवार की रिहाई की माँग की थी । कलेक्टर ने जनसुनवाई कर सभी विस्थापितों का पक्ष सुनने, उच्चस्तरीय कमेटी से जाँच कराने और झूठे मुकदमों की समीक्षा का आश्वासन दिया था। उसी के तहत वे आज गांव पहुंचे थे और जनसुनवाई तथा कार्रवाई शुरू हुई - जसविंदर सिंह, सचिव, सीपीआई (एम), मध्यप्रदेश
केन-बेतवा लिंक परियोजना
बनहरी टपरियन में प्रशासन का आश्वासन
ग्रामीणों ने स्थगित किया धरना
~मध्यप्रदेश से जसविंदर सिंह~
मध्यप्रदेश: छतरपुर/पन्ना, 1 नवंबर 2026. : केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय सिंचाई परियोजना, रूंज और मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना के कारण विस्थापित होने वाले परिवारों के संघर्ष ने एक नया मोड़ ले लिया है। विस्थापन, उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांगों को लेकर अजयगढ़ क्षेत्र के बनहरी टपरियन गांव में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच, कलेक्टर हर्ष सिंह ने रविवार को आंदोलन स्थल का दौरा किया। जिला प्रशासन द्वारा 15 दिनों के भीतर मांगों के निराकरण का आश्वासन दिए जाने के बाद, आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर ने मांगों का ज्ञापन सौंपकर फिलहाल धरना स्थगित करने की घोषणा की है।

प्रमुख बिंदु:
प्रशासनिक संवाद और आश्वासन: कलेक्टर हर्ष सिंह ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर धरने पर बैठे ग्रामीणजनों की समस्याओं को विस्तार से सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि 15 दिनों के भीतर उचित मांगों पर कार्रवाई कर समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
मुआवजा और सत्यापन प्रक्रिया: शासन के निर्देशों के तहत विस्थापित परिवारों को अतिरिक्त मुआवजा राशि वितरित करने का कार्य जारी है। राजस्व और जल संसाधन विभाग की टीमें शेष पात्र परिवारों के बैंक खाता सत्यापन और दस्तावेज जुटाने में जुटी हैं।
पुनर्वास स्थल पर बुनियादी सुविधाएं: प्रशासन ने दावा किया है कि नवीन बसावट स्थलों पर प्रभावित परिवारों के लिए मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
धरना स्थगित
कलेक्टर से हुई चर्चा के बाद आंदोलनकारियों ने अपना धरना समाप्त करने की घोषणा करते हुए धरना स्थल से सामान हटा लिया।
क्या है मामला ?
केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण पन्ना और छतरपुर के दर्जनों गाँव डूब क्षेत्र व टाइगर रिजर्व के बफर जोन में आ रहे हैं, जिससे हजारों आदिवासी परिवार उजड़ने की कगार पर हैं। बिना उचित-मुआवजे और पुनर्वास के हो रहे इस जबरन विस्थापन के खिलाफ ग्रामीण 'चिता आंदोलन' चला रहे हैं। सत्ता की भयावह बर्बरता - बेधड़क पुलिसिया मार और झूठे मुकदमों में जेल - के बावजूद केन-बेतवा क्षेत्र के हजारों निहत्थे आदिवासी और ग्रामीण अपने जल, जंगल, जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए अंतिम साँस तक संघर्ष करने को संकल्पित हैं।
वे महीनों से 'चिता आंदोलन' चला रहे हैं। परियोजना के लिए प्रशासन और पुलिस द्वारा घरों को तोड़ने, झूठे मुकदमे लादने तथा महिलाओं और युवाओं पर भारी दमन ढाया जा रहा है। इसी क्रम में माकपा नेत्री बृंदा करात ने 26 अक्टूबर की शाम पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रशासनिक दमन और भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने इस आंदोलन को भोपाल से लेकर दिल्ली तक ले जाने का आह्वान किया। पत्रकार वार्ता में उनके साथ मध्यप्रदेश सीपीआई (एम) के सचिव जसविंदर सिंह और आंदोलन के नेता अमित भटनागर मौजूद थे। वृंदा करात के नेतृत्व में सीपीआई (एम) का प्रतिनिधि मण्डल 26 और 27 अक्टूबर को केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से प्रभावित आंदोलनकारियों और विस्थापितों के साथ एकजुटता व्यक्त करने आंदोलन स्थल पर पहुंचा था।
प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर विस्थापन में अनियमितताओं, कानून के उल्लंघन, मुआवजे में भ्रष्टाचार, दमनकारी रवैये और झूठे मुकदमों को वापस लेकर दिव्या अहिरवार की रिहाई की माँग की थी । कलेक्टर ने जनसुनवाई कर सभी विस्थापितों का पक्ष सुनने, उच्चस्तरीय कमेटी से जाँच कराने और झूठे मुकदमों की समीक्षा का आश्वासन दिया था।


जसविंदर सिंह सीपीआई(एम) मध्यप्रदेश के राज्य सचिव और केंद्रीय कमेटी के सदस्य हैं।
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