इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण बात है—इज़राइल के फ़िलिस्तीनी-अरब नागरिकों की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी, वामपंथी आंदोलन की भूमिका और यहूदी-अरब एकजुटता की संभावनाएँ। रिकॉर्ड मतदान के बल पर इज़राइली राजनीति में निर्णायक ताकत बने अरब दल। नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य दांव पर।
हालिया चुनाव परिणामों ने इज़राइल की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। हदाश
(डेमोक्रेटिक फ्रंट फॉर पीस एंड इक्वालिटी) और इज़राइल की कम्युनिस्ट पार्टी के लिए संसदीय राजनीति में नए अवसर खुले हैं। कम्युनिस्ट इस वामपंथी-प्रगतिशील गठबंधन (डेमक्रैटिक फ्रन्ट फॉर पीस एण्ड इक्वालिटी, हदास) की सबसे बड़ी ताकत हैं, जो लगातार यहूदी-अरब एकजुटता, कब्ज़े और रंगभेद के विरोध तथा शांति, समानता और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करते रहे हैं। 'जॉइंट लिस्ट' की चुनावी सफलता ने इज़राइल के संसदीय संतुलन और भविष्य के निर्माण में अरब मतदाताओं के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया है।
सरकार गठन पर अनिश्चितता और अरब दलों का दबदबा
इज़राइल का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, इस पर अब भी सस्पेंस बरकरार है। ट्रंप और मोदी के सहयोगी बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता में लौटेंगे या उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़ेनकोट बाज़ी मारेंगे—यह तो समय ही बताएगा। हालांकि, इस राजनीतिक गतिरोध का सबसे बड़ा हासिल अरब पार्टियों का शानदार प्रदर्शन रहा है। इज़राइल के फ़िलिस्तीनी नागरिकों ने रिकॉर्ड संख्या में मतदान किया, जिसके दम पर अरब-बहुसंख्यक दलों को अभूतपूर्व सफलता मिली। यदि विपक्षी दल अवसर दें, तो ये अरब पार्टियां नई सरकार के गठन की दिशा तय करने की स्थिति में हैं।
120 सदस्यीय संसद (नेसेट) में स्थिति इस प्रकार है:
नेतन्याहू का धुर दक्षिणपंथी गठबंधन (लिकुड नेतृत्व): 53 सीटें (अकेले लिकुड को 27 सीटें)।
आइज़ेनकोट का ज़ायोनिस्ट गठबंधन (याशर नेतृत्व): 48 सीटें (अकेले याशर को 21 सीटें)।
सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा: 61 सीटें।
चूंकि कोई भी दल बहुमत के करीब नहीं है, दो प्रमुख अरब गुट—'जॉइन्ट लिस्ट' [पहला हदाश मोर्चा - मूल कम्युनिस्ट पार्टी 'माकी'- इज़राइल की ऐतिहासिक अरब-यहीूदी संयुक्त कॉम्युनिस्ट पार्टी, युवा (बाँकी), महिला (तांदी), द्रूज इनिशिएटिव कमेटी, स्वतंत्र प्रगतिशील कार्यकर्ताओं , प्रगतिशील यहूदी-अरब समूहों का संयुक्त मोर्चा , और ताल पार्टी - अहमद तिबी के नेतृत्व वाली एक धर्मनिरपेक्ष अरब पार्टी एवं बलाद पार्टी - सामी अबू शेहादेह के नेतृत्व में इज़राइल के भीतर फिलिस्तीनी नागरिकों के अधिकारों की वकालत करने वाला एक राष्ट्रवादी दल— के साथ साझा बड़ा मोर्चा ] , जिसका मुख्य चेहरा युसेफ जबारीन है - 11 सीटें, तथा दूसरा गुट 'संयुक्त अरब लिस्ट' ('Ra'am' 'आरएएम' - 8 सीटें), जिसका मुख्य चेहरा मंसूर अब्बास है — यह इज़राइल की एक सामाजिक रूप से रूढ़िवादी और धार्मिक रूप से प्रेरित इस्लामिक पार्टी है, जो जॉइन्ट लिस्ट का हिस्सा नहीं है और इसने अलग से चुनाव लड़ा था —निर्णायक भूमिका में आ गए हैं।
'जॉइन्ट लिस्ट' गठबंधन ने 8.82% मतों के साथ इजराइली संसद (नेसेट) में 11 सीटें हासिल की हैं। पिछली संसद (हदाश–Ta'al ताल गुट के पास 5 सीटें थीं) के मुकाबले यह एक बड़ी छलांग है।

राजनीतिक समीकरण और संभावित विकल्प
नेतन्याहू ने चुनाव प्रचार के दौरान ही साफ़ कर दिया था कि वे किसी भी स्थिति में अरब समर्थित दलों की मदद नहीं लेंगे। दूसरी ओर, यदि आइज़ेनकोट अपने गठबंधन की 48 सीटों में अरब गुटों (जॉइन्ट लिस्ट की 11 और संयुक्त अरब सूची की 8 सीटें) की 19 सीटें - जोड़ लेते हैं, तो आंकड़ा 67 तक पहुँच जाता है, जो नेतन्याहू के लंबे शासन का अंत कर सकता है। अब आइज़ेनकोट कुछ शर्तों के बदले में इन दलों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं। इन शर्तों में इज़राइल को यहूदी राष्ट्र का दर्जा देना और हमास को चरमपंथी (आतंकवादी) घोषित करना भी शामिल है। यह रणनीति कामयाब होने पर इज़राइल में पिछले कई सालों से चला आ रहा बेंजामिन नेतन्याहू का शासन खत्म हो जाएगा और एक नई सरकार सत्ता में आ जाएगी।
जहाँ 'जॉइन्ट लिस्ट' कैबिनेट में शामिल नहीं होकर बेंजामिन नेतन्याहू की धुर-दक्षिणपंथी सरकार को सत्ता से बाहर रखने के लिए विपक्षी गठबंधन को बाहर से संसदीय समर्थन दे सकते हैं। वहीं, 'जॉइन्ट लिस्ट' से अलग रुख अपनाते हुए, 'मंसूर अब्बास की पार्टी ' अपने अरब समाज के विकास और बजट की शर्तों पर विपक्षी गठबंधन (चेंज ब्लॉक) के साथ सीधे तौर पर सरकार (कैबिनेट) में शामिल होने के लिए तैयार हो सकती है।
हालाँकि विश्लेषकों का मानना है कि आइज़ेनकोट के गठबंधन से कुछ दलों का टूटकर नेतन्याहू के साथ जाना भी संभव है। कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में नेतन्याहू को बहुमत जुटाने के लिए 28 दिनों का समय मिलेगा (जिसे 2 सप्ताह और बढ़ाया जा सकता है), और इसका फायदा उठाते हुए नेतन्याहू हवा का रुख अपनी तरफ मोड़ने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे। यदि गठबंधन की वार्ता विफल रहती है, तो राष्ट्रपति किसी अन्य नेता का चयन कर उसे अवसर दे सकते हैं। यदि वह भी असफल रहे, तो संसद सदस्य तीसरे नेता के लिए याचिका दे सकते हैं, तथा इसके भी विफल रहने पर देश को पुनः नए चुनावों का सामना करना पड़ेगा।
यहूदी-अरब साझेदारी का आह्वान
'जॉइन्ट लिस्ट' के अध्यक्ष प्रोफेसर यूसुफ जबारीन ने स्पष्ट किया कि उनका गठबंधन नेतन्याहू की धुर दक्षिणपंथी सरकार को हटाने में सहयोग के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू अरब समुदाय के खिलाफ दुष्प्रचार और नफरत फैलाने का काम लगातार कर रहे हैं। इसीलिए हम स्पष्ट कर रहे हैं: या तो भेदभाव, बहिष्कार और दबदबे का यह सिलसिला चलता रहेगा—या फिर यहूदियों और अरबों के बीच एक सच्ची भागीदारी की शुरुआत होगी।

इज़राइल की 20% आबादी फ़िलिस्तीनी है। अरब नागरिकों का मतदान प्रतिशत 2012 के 55% से बढ़कर इस बार 80% से अधिक हो गया है।
युसेफ जबारीन ने पुरजोर तरीके से कहा है, ‘हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि जो कोई भी नेतन्याहू की इस हिंसक सरकार के सामने एक प्रभावी और वास्तविक विकल्प खड़ा करना चाहता है, उसे हमसे बातचीत करनी होगी—ताकि इज़राइल की जनता ने जिस बदलाव की उम्मीद की है, उसका मार्ग प्रशस्त किया जा सके। हाँ, नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करने की राह बनाने के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं।’
अरबी भाषा के टेलीविजन चैनल ‘अल-गद’ से बातचीत के दौरान जबारीन ने कहा कि जॉइन्ट लिस्ट सरकार की नीतियों में आमूल-चूल (जमीनी) परिवर्तन चाहती है —जैसे अरब नागरिकों को समानता, संगठित अपराध पर लगाम, अरब नगरपालिकाओं को पर्याप्त बजट, आवास अधिकार और इसके साथ ही, उन्होंने फिलिस्तीनी नेतृत्व के साथ बातचीत का एक नया राजनीतिक क्षितिज खोलने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया।
वहीं, जॉइन्ट लिस्ट की ओर से नवनिर्वाचित इज़रायली कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद ऑफर कसीव ने देश में फिर से चुनाव होने की संभावना के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने 'आर्मी रेडियो' से बातचीत में कहा, ‘एक और चुनाव होने का सीधा मतलब बेंजामिन नेतन्याहू को तोहफा देना होगा। अब गेंद पूरी तरह 'चेंज ब्लॉक' (विपक्षी गठबंधन) के पाले में है।’
गाजा में सैन्य अभियानों की आलोचना करने के कारण अक्टूबर 2023 के मध्य में संसद (नेसेट) में कम्युनिस्ट पार्टी के एकमात्र यहूदी सदस्य कसीव को 45 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया था। उसी वर्ष नवंबर की शुरुआत में, युद्ध-विरोधी प्रदर्शन का आह्वान करने के आरोप में कम्युनिस्ट पार्टी के एक अन्य प्रमुख नेता और पूर्व सांसद मोहम्मद बराकाह को नाज़रेथ में हिरासत में ले लिया गया था। हमेशा की तरह इस कार्रवाई के पीछे पुलिस का तर्क था कि ‘इससे अशांति या उकसावा फैल सकता है’। इसके बाद दिसंबर 2023 में, पार्टी की एक और सांसद तथा पार्टी के मुखपत्र 'अल-इत्तिहाद' अखबार की संपादक आयदा तोमा-सुलेमान को भी दो महीने के लिए निलंबित कर दिया गया था। आयदा का ‘अपराध’ सिर्फ यह था कि उन्होंने इज़रायली सेना के हाथों निर्दोष लोगों के मारे जाने की आलोचना की थी।
जन-प्रदर्शन और जन-आंदोलन
तेल अवीव के हसीला पार्क, यरुशलम के पेरिस स्क्वायर और हाइफा के यूनेस्को पार्क व स्क्वायर में हजारों यहूदी और अरब नागरिक एकजुट हुए और उन्होंने एक संयुक्त 'यहूदी-अरब सरकार' बनाने की मांग की। इस मौके पर युसेफ जबारीन ने कहा, ‘आज का दिन ऐतिहासिक है। हमने साबित कर दिया है कि हम एक ऐसी राजनीतिक ताकत हैं जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और हमारी आवाज के बिना यहां किसी भी भविष्य का निर्माण मुमकिन नहीं है।’
इसी बीच, 'जमीमी—कम्युनिटी इन एक्शन' नाम के एक संगठन ने एक ऑनलाइन याचिका (पिटीशन) शुरू की है, जिस पर 40 हजार से अधिक लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। इस याचिका में 'चेंज ब्लॉक' (विपक्षी गठबंधन) की सरकार में 'जॉइन्ट लिस्ट' और 'राम' (Ra'am) पार्टी को भी शामिल करने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है, "जो पार्टियां अरब दलों का बहिष्कार कर रही हैं, वे असल में देश की 20 प्रतिशत आबादी को—जिन्होंने भारी संख्या में मतदान किया है—शासन प्रक्रिया का हिस्सा बनने या गठबंधन में शामिल होने के अधिकार से वंचित कर रही हैं। यह पूरी तरह से एक अलोकतांत्रिक कदम है, जो मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों को खत्म करता है, उनकी आवाज दबाता है और राजनीति में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व के अधिकार पर चोट करता है। लोकतंत्र का असली मतलब यहूदियों और अरबों के बीच की साझेदारी है। इज़राइल का एक बड़ा हिस्सा इस बात को समझता है और इस साझीदारी का समर्थन करता है। इसके बावजूद, देश में नफरत और डर का माहौल इस कदर फैला दिया गया है कि कई राजनीतिक नेता अरब दलों का बहिष्कार करने की राह पर चल पड़े हैं। इसलिए, यह समय सरकार गठन की बातचीत में शामिल सभी दलों के नेताओं पर दबाव बनाने का है, ताकि वे खुलकर कह सकें: हाँ, हम यहूदी-अरब दलों की साझीदारी के पक्ष में हैं।"
चेंज ब्लॉक की संरचना और अगला कदम
'चेंज ब्लॉक' ('ज़ायनवादी विपक्षी गठबंधन') में आइज़ेनकोट की 'याशर' - 21 सीटें), यायर गोलान के नेतृत्व वाली 'डेमोक्रेट्स पार्टी' - 8 सीटें, नफ्ताली बेनेट और यायर लैपिड ('येश एटिड पार्टी') के संयुक्त नेतृत्व वाला चुनावी गठबंधन 'टुगेदर' - 12 सीटें और अविग्डोर लिबरमैन के नेतृत्व वाली 'यिसराइल बेतेनु पार्टी' - 7 सीटें शामिल हैं।
इज़राइल की संसद 'नेसेट' के सदस्य और संसद में अरब सांसदों के गठबंधन 'जॉइन्ट लिस्ट' के संसदीय ब्लॉक के प्रमुख अहमद तिबी ने कहा है-
‘नेतन्याहू और बेन-ग्वीर की सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए हम 'चेंज ब्लॉक' (विपक्षी गठबंधन) की ओर सहयोग का हाथ बढ़ा रहे हैं। इस प्रक्रिया की शुरुआत नेसेट के स्पीकर आमिर ओहाना को पद से हटाने के साथ होगी। उग्र यहूदीवादी और चरमपंथी बेन-ग्वीर अब पुलिस मंत्री (राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री) नहीं रहेंगे। उनका समय अब समाप्त हो चुका है।’
चुनाव के ये नतीजे हदाश और इज़राइल की कम्युनिस्ट पार्टी के लिए संसदीय राजनीति में एक नया अवसर लेकर आए हैं। इस वामपंथी प्रगतिशील राजनीतिक गठबंधन—'डेमोक्रेटिक फ्रंट फॉर पीस एंड इक्वालिटी' (हदाश)—के भीतर कम्युनिस्ट सबसे बड़ी ताकत हैं। उनकी राजनीतिक गतिविधियों में हमेशा से यहूदी-अरब एकजुटता, नस्लवाद व कब्जे (दखलंदाजी) का विरोध करने और शांति, समानता व सामाजिक न्याय के संघर्ष पर विशेष जोर दिया गया है। जॉइन्ट लिस्ट की इस चुनावी सफलता ने अरब मतदाताओं के बढ़ते राजनीतिक महत्व और इज़राइल के भविष्य—विशेष रूप से संसदीय संतुलन—पर उनके संभावित प्रभाव को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।
साभार बांग्ला पत्रिका मार्क्सवादी पथ। 29 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित।
(मूल आलेख में कुछ सुधार के साथ- वाम की आवाज)
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