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लूला की जीत फासीवाद और ट्रम्प की हार है ~ आंद्रे सिंट्रा और सीज़र ज़ावियर ~

केशव कुमार भट्टड़•31 अक्टूबर 20268 मिनट पठन10 बार पढ़ा गया

जनता की ताकत और युवाओं के संघर्ष ने ब्राजील में अमेरिकी परस्त उग्र दक्षिणपंथ को करारी शिकस्त दी। ब्राजील के राष्ट्रपति लुई इनासिओ लूला डा सिल्वा ने अस्सी वर्ष की आयु में चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है, जिसमें उन्होंने ट्रंप प्रशासन समर्थित उग्र दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लेवियो बोल्सनारो को पराजित किया। इस कड़े मुकाबले में छात्रों, मजदूरों और युवाओं ने निर्णायक भूमिका निभाते हुए भारी संख्या में मतदान किया और प्रशासनिक बाधाओं को दरकिनार कर इसे फासीवादी ताकतों के खिलाफ जनता की एक महान विजय बना दिया। अपने विजय भाषण में लूला ने देश की संप्रभुता, शिक्षा, स्वास्थ्य, अपराध नियंत्रण और स्वतंत्र तकनीकी विकास पर जोर दिया। हालांकि, नई संसद में दक्षिणपंथियों की बढ़ती ताकत को देखते हुए संपादकों ने भविष्य में कड़े संघर्ष और निरंतर जन-आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।

लूला की जीत फासीवाद और ट्रम्प की हार है ~ आंद्रे सिंट्रा और सीज़र ज़ावियर ~


लूला की यह जीत मूल रूप से फासीवाद और ट्रम्प की हार है

~ आंद्रे सिंथ्रा और सीज़र ज़ावियर ~


ब्राजील के राष्ट्रपति लुई इनासिओ लूला डा सिल्वा ने चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। रविवार को पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए उन्होंने उग्र दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लेवियो बोल्सनारो को हरा दिया। फ्लेवियो, ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सनारो के बड़े बेटे हैं। देश के इतिहास में यह सबसे कड़ा चुनावी मुकाबला था। स्थानीय समयानुसार रात 9 बजकर 9 मिनट पर चुनाव के अंतिम नतीजे साफ हो गए। लूला को 51.75 प्रतिशत और बोल्सनारो को 48.25 प्रतिशत वोट मिले। लूला ने 45 लाख से अधिक वोटों के अंतर से यह जीत हासिल की है।


अस्सी वर्ष के लूला ब्राजील के इतिहास में पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो चार बार राष्ट्रपति चुने गए हैं। पिछले सात राष्ट्रपति चुनावों में वामपंथियों की यह छठी जीत है, लेकिन यह मुकाबला सबसे ज्यादा कठिन था।


यदि पहले दौर के चुनाव में किसी उम्मीदवार को बहुमत नहीं मिलता है, तो दूसरा दौर (रन-ऑफ) कराया जाता है। इसके तीन हफ्ते पहले हुए पहले दौर के मतदान में बोल्सनारो आगे थे। तब उन्हें 47.03 प्रतिशत और लूला को 45.16 प्रतिशत वोट मिले थे। हालांकि, यह कठिन परिस्थिति बाद में बदल गई। दोनों चरणों के बीच के समय में लूला के पक्ष में 1 करोड़ 10 लाख से अधिक नए वोट जुड़े। मतदान का प्रतिशत बढ़ने के कारण ही यह संभव हो पाया। रविवार रात पत्रकारों से बातचीत करते हुए लूला ने कहा, "हमारे देश के इतिहास में इस बार चुनाव में अनुपस्थिति (वोट न डालने वाले) का प्रतिशत सबसे कम रहा है।"


ट्रम्प की भी हार

इस जीत का महत्व केवल ब्राजील तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर दूर-दूर तक महसूस किया जाएगा। बोल्सनारो के बेटे के पक्ष में ट्रम्प प्रशासन ने खुलकर समर्थन किया था। फ्लेवियो के भाई और सांसद एदुआर्दो अमेरिका में ही रहते हैं। चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि फ्लेवियो को गिरफ्तार किया जा सकता है और चुनाव हारने पर उन्हें अमेरिका भाग जाना चाहिए।

रविवार रात को प्रकाशित एक संपादकीय में ब्राजील की कम्युनिस्ट पार्टी (पीसीडीओबी) के मुखपत्र 'वरमेलहो' के संपादकों ने लिखा, "डोनाल्ड ट्रम्प की नव-फासीवादी सरकार, जिसने बेशर्मी से फ्लेवियो बोल्सनारो का समर्थन किया था, उसे भी करारी हार का सामना करना पड़ा है।" उन्होंने लिखा कि ट्रम्प के नेतृत्व में कैरेबियन से लेकर दक्षिण अमेरिका तक उग्र दक्षिणपंथ की जो लहर फैली थी, व्हाइट हाउस ने यह मान लिया था कि उनकी अगली जीत ब्राजील में होगी और इस बात का जश्न भी शुरू हो गया था।

लूला ने अपने चुनाव प्रचार में राष्ट्रीय संप्रभुता को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया था। चुनाव से कुछ दिन पहले रियो डी जेनेरियो के कोपाकबाना समुद्र तट पर एक विशाल जनसभा में लूला ने कहा था कि ब्राजील के सामने दो रास्ते हैं— "एक व्यक्ति ब्राजील के झंडे को चूमता है, और दूसरा अमेरिका के झंडे को। मतदाताओं को इन दोनों में से किसी एक को चुनना होगा।"

चुनावी नतीजों ने साबित कर दिया कि संगठित मजदूर वर्ग और युवा मिलकर ट्रम्प समर्थित उग्र दक्षिणपंथी उम्मीदवार को हरा सकते हैं। और जब हालात सबसे ज्यादा गंभीर और जटिल लग रहे हों, तब भी ऐसा किया जा सकता है।


छात्रों ने जलाई थी चिंगारी

पहले दौर के फीके नतीजों के बाद, अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में छात्रों ने कमान अपने हाथ में ली। 'नेशनल यूनियन ऑफ स्टूडेंट्स' ने देशव्यापी अभियान की घोषणा की, जिसके बैनर पर लिखा था— "सड़क पर भी, ऑनलाइन भी, छात्र लूला के साथ हैं।" ब्राजील की कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी 'यूनियन ऑफ सोशल युवा' (यूनियन ऑफ सोशलिस्ट यूथ) ने भी इस संघर्ष की रीढ़ की हड्डी के रूप में काम किया।

मजदूर संघ, सामाजिक आंदोलन, कलाकार और बुद्धिजीवी भी इस लड़ाई में कूद पड़े। दूसरे दौर के मतदान से पहले लूला के समर्थन में आयोजित रैलियों में डेढ़ करोड़ से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। साओ पाउलो की मुख्य सड़क पर लूला की आखिरी रैली में लगभग 20 लाख समर्थक जुटे थे।

ऑनलाइन प्रचार भी किसी से कम नहीं था। सांसद आंद्रे जानोस ने एक व्हाट्सएप चैनल शुरू किया जिसका नाम रखा 'लूला की सेना'। इसके फॉलोअर्स की संख्या बढ़कर 1 करोड़ 80 लाख (10.8 मिलियन) हो गई। यह वीडियो, ऑडियो और संगठनात्मक निर्देश पाने का मुख्य केंद्र बन गया। हालांकि, इस प्रचार को मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की मूल कंपनी) जैसी बड़ी कंपनियों से भी टक्कर लेनी पड़ी। मेटा ने लूला के प्रचार खातों और उनके पक्ष में बनी सामग्री को ब्लॉक कर दिया था, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को पूरी छूट दी गई थी। यहाँ तक कि चुनाव के दिन भी मेहनतकश वर्ग के मतदाताओं को मतदान करने से रोकने के लिए तरह-तरह की बाधाएं डाली गईं।

प्रशासनिक रुकावटें और जनसैलाब

ब्राजील में लोगों के मतदान केंद्रों तक पहुँचने का एक बड़ा जरिया सरकारी बसें होती हैं। अदालत ने सभी शहरों को निर्देश दिया था कि वे अपनी सभी बसें चलाएं ताकि लोग वोट डालने जा सकें। लेकिन साओ पाउलो और साल्वाडोर (उत्तर-पूर्व का एक बड़ा शहर) के दक्षिणपंथी मेयरों ने उस दिन अदालत के इस आदेश को नहीं माना।


साल्वाडोर में 900 से अधिक बसों को डिपो में ही रोक कर रखा गया था। क्षेत्रीय चुनाव अदालत ने शहर के परिवहन निदेशक को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मतदान का समय बढ़ाकर शाम 7 बजे तक कर दिया, लेकिन तब तक अधिकांश मतदान केंद्र बंद हो चुके थे।

इन तमाम बाधाओं के बावजूद लूला को रोका नहीं जा सका।

मेहनतकश जनता का कार्यक्रम

साओ पाउलो में अपनी जीत के भाषण में लूला और उनके साथी उप-राष्ट्रपति जेरार्डो अल्कमिन ने इस जीत का पूरा श्रेय मतदाताओं को दिया। उन्होंने कहा, "इस चुनाव में न तो मैं जीता हूँ और न ही अल्कमिन जीते हैं; जीती है शालीनता, देशहमती, लोकतंत्र और वह भविष्य जो आप अपने बच्चों के लिए चाहते हैं।"

लूला ने जो एजेंडा पेश किया उसका मुख्य केंद्र मेहनतकश परिवार हैं: हाई स्कूल तक हर बच्चे के लिए पूरे दिन सरकारी स्कूल की सुविधा, कम आय वाले परिवारों के किशोरों को पढ़ाई जारी रखने के लिए नकद सहायता का विस्तार, कॉलेज के छात्रों के लिए नई योजनाएं, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा (सार्वजनिक चिकित्सा) का निरंतर विकास, कैंसर के इलाज की अधिक सुविधाएं और बुजुर्गों तथा महिलाओं के लिए मजबूत नीतियां।

अपराध से निपटने में केंद्र सरकार की बड़ी भूमिका का वादा करते हुए उन्होंने कहा, "जो लोग मेहनत करते हैं, हम उन्हें सुरक्षा देंगे। अपराधियों की जगह जेल में होगी।"

उन्होंने बड़ी तकनीकी कंपनियों को नियंत्रित करने की बात भी कही। उन्होंने कहा, "जो बड़ी कंपनियां अरबों डॉलर कमाती हैं लेकिन देश को कोई टैक्स नहीं देतीं, और जो हमारे चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश करती हैं, उन्हें हम छोड़ नहीं सकते।" तकनीकी स्वतंत्रता के मामले में उन्होंने कहा, "हम चीन या अमेरिका की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) पर निर्भर नहीं रहना चाहते। हम खुद अपनी ब्राजीलियाई तकनीक विकसित करना चाहते हैं।"


अंत में एकता का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, "जो राष्ट्रपति चुना गया है, किसी को भी उसके आगे चापलूसी करने की जरूरत नहीं है। लेकिन वह सभी पर शासन करने के लिए चुना गया है।"


मध्य-दक्षिणपंथी पूर्व गवर्नर अल्कमिन लूला के गठबंधन में उदारवादी और व्यापारिक नेताओं को साथ लेकर आए थे। उन्होंने लूला से कहा, "यह दूसरी बार है जब आपने ब्राजील के लोकतंत्र की रक्षा की है।"

'वरमेलहो' के संपादकों ने इस परिणाम को "ब्राजील की जनता की जीत" बताया है। इस जीत का नेतृत्व युवाओं ने किया। उन्होंने उस उग्र दक्षिणपंथी ताकत को हराया जो देश को "लालची अमेरिकी साम्राज्यवाद के हाथों" बेचना चाहती थी। संपादकों ने कहा कि लूला उनके असली नेता हैं क्योंकि उन्होंने ट्रम्प के सामने घुटने नहीं टेके।

संपादकों ने लिखा कि पार्टी (पीसीडीओबी) अपने कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के साथ "संघर्ष की सबसे आगे की पंक्ति" में थी, क्योंकि यह ब्राजील के वर्तमान और भविष्य के लिए सबसे जरूरी कदम था।

उन्होंने चेतावनी दी कि आगे बहुत कठिन काम बाकी हैं। नई कांग्रेस में दक्षिणपंथी और उग्र दक्षिणपंथी ताकतें मजबूत हुई हैं और उन्होंने कई बड़े राज्यों के गवर्नर पद जीते हैं। नए औद्योगिकीकरण, अच्छे रोजगार और अधिकारों के विस्तार जैसे एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए लूला को एक बड़ा शासक गठबंधन बनाना होगा और लगातार सड़कों पर तथा ऑनलाइन जन-आंदोलन जारी रखना होगा।

लेकिन रविवार का दिन उस जनता का था जिसने "ना" कह दिया। संपादकों के शब्दों में, ब्राजील की जनता— जिसकी ताकत युवा हैं— ने साफ और जोर से कह दिया है: "यहाँ यह सब नहीं चलेगा।"


यह लेख मूल रूप से
पुर्तगाली भाषा में 'वर्मेलो' (Vermelho) पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

पोर्टल का लिंक

( https://vermelho.org.br/)

संबंधित आलेख पढ़ें: ब्राजील: उग्र दक्षिणपंथ की करारी हार। 'लूला' की ऐतिहासिक वापसी

आंद्रे सिंट्रा

'वर्मेलो' (Vermelho) के संपादक और ब्राजील की कम्युनिस्ट पार्टी (पीसीडीओबी) के सदस्य हैं।

सीज़र ज़ावियर

पत्रकार और राजनीतिक लेखक हैं, जो 'वर्मेलो' (Vermelho) के अलावा ब्राजील के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के लिए लिखते हैं।



साभार बांग्ला पत्रिका 'मार्क्सवादी पथ'। प्रकाशन की तिथि: 29 अक्टूबर 2026

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लूला की जीत फासीवाद और ट्रम्प की हार है ~ आंद्रे सिंट्रा और सीज़र ज़ावियर ~

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