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"श्रमिकों के साथ सहानुभूतिपूर्वक बात करें और विरोध-प्रदर्शनों को केवल 'कानून-व्यवस्था' का मामला न समझें।"- 300 से अधिक नागरिकों ने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश, हरियाणा व दिल्ली की राज्य सरकारों से की अपील

डॉ. अशोक सिंह•27 अप्रैल 20263 मिनट पठन17 बार पढ़ा गया
दिल्ली-एनसीआर में श्रमिकों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार की मांग करने वाली एक याचिका पर 300 से अधिक नागरिकों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें प्रमुख कलाकार और बुद्धिजीवी शामिल हैं। हस्ताक्षर करने वालों में अभिनेता और प्रकाशक सुधन्वा देशपांडे, संगीतकार और लेखक टी.एम. कृष्णा, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह, नृत्यांगना मल्लिका साराभाई, कवि के. सच्चिदानंदन, उपन्यासकार गीता हरिहरन, फिल्म निर्माता आनंद पटवर्धन, थिएटर निर्देशक एम.के. रैना, और पत्रकार नेहा दीक्षित सहित कई अन्य लोग शामिल हैं। पुराने श्रम कानूनों की जगह नए 'लेबर कोड' (श्रम संहिता) लाने से भी श्रमिकों के बीच नाराजगी पैदा हुई है।
"श्रमिकों के साथ सहानुभूतिपूर्वक बात करें और विरोध-प्रदर्शनों को केवल 'कानून-व्यवस्था' का मामला न समझें।"-  300 से अधिक नागरिकों ने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश, हरियाणा व दिल्ली की राज्य सरकारों से की अपील

दिल्ली-एनसीआर में श्रमिकों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार की मांग करने वाली एक याचिका पर 300 से अधिक नागरिकों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें प्रमुख कलाकार और बुद्धिजीवी शामिल हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली की सरकारों से अपील की है कि वे "श्रमिकों के साथ सहानुभूतिपूर्वक बात करें और इन विरोध-प्रदर्शनों को केवल 'कानून-व्यवस्था' का मामला न समझें।"

हस्ताक्षर करने वालों में अभिनेता और प्रकाशक सुधन्वा देशपांडे; संगीतकार और लेखक टी.एम. कृष्णा; अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह; नृत्यांगना मल्लिका साराभाई; कवि के. सच्चिदानंदन; उपन्यासकार गीता हरिहरन; फिल्म निर्माता आनंद पटवर्धन; थिएटर निर्देशक एम.के. रैना; और पत्रकार नेहा दीक्षित सहित कई अन्य लोग शामिल हैं।

याचिका का पूरा पाठ:

दिल्ली-एनसीआर के श्रमिकों के साथ एकजुटता में

पिछले कुछ हफ्तों में, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में औद्योगिक श्रमिकों ने काम की परिस्थितियों और वेतन से जुड़ी अपनी जायज मांगों को लेकर व्यापक विरोध-प्रदर्शन किए हैं। हालांकि श्रमिकों में असंतोष लंबे समय से सुलग रहा था, लेकिन ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण हाल ही में बढ़ी महंगाई और रसोई गैस की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि पुराने श्रम कानूनों की जगह नए 'लेबर कोड' (श्रम संहिता) लाने से भी श्रमिकों के बीच नाराजगी पैदा हुई है।

श्रमिकों और उनके प्रतिनिधियों के साथ सहानुभूति दिखाने के बजाय, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली की सरकारों ने कठोर दमन का रास्ता चुना है। मीडिया और सोशल मीडिया पर पुलिस हिंसा, अवैध हिरासत, बिना कानूनी प्रक्रिया के गिरफ्तारी और गिरफ्तार लोगों को उनके परिवार या कानूनी मदद जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखने की कई खबरें सामने आई हैं। राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय नेताओं, सांसदों, ट्रेड यूनियन नेताओं और प्रतिष्ठित नागरिकों को विरोध स्थलों पर जाने से भी रोका गया है। दक्षिणपंथी दुष्प्रचार मशीनरी प्रदर्शनकारियों को 'अर्बन नक्सल' और 'देशद्रोही' बताकर बदनाम करने में जुट गई है।

हम इन खबरों से बेहद विचलित हैं। असहनीय कामकाजी और जीवन स्थितियों के खिलाफ विरोध करना इस देश के किसी भी नागरिक का अधिकार है। यह अधिकार भारत के संविधान द्वारा दिया गया है और यह किसी राजनीतिक दल की दया पर निर्भर नहीं है। लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब नागरिक बिना किसी डर के अपनी शिकायतें रख सकें, शांतिपूर्ण विरोध कर सकें और उनके कार्यों को अपराधी न ठहराया जाए।

श्रमिकों की जायज मांगों और उनके संघर्ष के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हुए, हम केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश, हरियाणा व दिल्ली की राज्य सरकारों से मांग करते हैं कि:

  • श्रमिकों के साथ सहानुभूतिपूर्वक बातचीत करें और उनके विरोध को केवल 'कानून-व्यवस्था' का मुद्दा न मानें।
  • इन विरोध-प्रदर्शनों के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए सभी श्रमिकों, उनके नेताओं, कलाकारों और बुद्धिजीवियों को तुरंत रिहा करें।
  • एक निष्पक्ष और प्रभावी व्यवस्था (Mechanism) बनाएं जिसके जरिए श्रमिक और उनके प्रतिनिधि अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों के साथ बातचीत कर सकें।

.

.

  • भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के फेसबुक पेज से साभार

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"श्रमिकों के साथ सहानुभूतिपूर्वक बात करें और विरोध-प्रदर्शनों को केवल 'कानून-व्यवस्था' का मामला न समझें।"- 300 से अधिक नागरिकों ने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश, हरियाणा व दिल्ली की राज्य सरकारों से की अपील

प्रकाशित: 27 अप्रैल 2026 • 3 मिनट पठन

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