जन समाचार मंच





दिल्ली-एनसीआर के श्रमिकों के साथ एकजुटता में
पिछले कुछ हफ्तों में, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में औद्योगिक श्रमिकों ने काम की परिस्थितियों और वेतन से जुड़ी अपनी जायज मांगों को लेकर व्यापक विरोध-प्रदर्शन किए हैं। हालांकि श्रमिकों में असंतोष लंबे समय से सुलग रहा था, लेकिन ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण हाल ही में बढ़ी महंगाई और रसोई गैस की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि पुराने श्रम कानूनों की जगह नए 'लेबर कोड' (श्रम संहिता) लाने से भी श्रमिकों के बीच नाराजगी पैदा हुई है।
श्रमिकों और उनके प्रतिनिधियों के साथ सहानुभूति दिखाने के बजाय, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली की सरकारों ने कठोर दमन का रास्ता चुना है। मीडिया और सोशल मीडिया पर पुलिस हिंसा, अवैध हिरासत, बिना कानूनी प्रक्रिया के गिरफ्तारी और गिरफ्तार लोगों को उनके परिवार या कानूनी मदद जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखने की कई खबरें सामने आई हैं। राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय नेताओं, सांसदों, ट्रेड यूनियन नेताओं और प्रतिष्ठित नागरिकों को विरोध स्थलों पर जाने से भी रोका गया है। दक्षिणपंथी दुष्प्रचार मशीनरी प्रदर्शनकारियों को 'अर्बन नक्सल' और 'देशद्रोही' बताकर बदनाम करने में जुट गई है।
हम इन खबरों से बेहद विचलित हैं। असहनीय कामकाजी और जीवन स्थितियों के खिलाफ विरोध करना इस देश के किसी भी नागरिक का अधिकार है। यह अधिकार भारत के संविधान द्वारा दिया गया है और यह किसी राजनीतिक दल की दया पर निर्भर नहीं है। लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब नागरिक बिना किसी डर के अपनी शिकायतें रख सकें, शांतिपूर्ण विरोध कर सकें और उनके कार्यों को अपराधी न ठहराया जाए।
श्रमिकों की जायज मांगों और उनके संघर्ष के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हुए, हम केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश, हरियाणा व दिल्ली की राज्य सरकारों से मांग करते हैं कि:
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अपलोडर: VKA-ENGEAL • प्रकाशित: 27 अप्रैल 2026 • 3 मिनट पठन
1857 के विद्रोह में एक महत्वपूर्ण और दिलचस्प पहलू है, हिंदू–मुस्लिम एकता। हिंदू और मुस्लिम दोनों ही वर्गों पर ब्रिटिश शासन की नीतियां आर्थिक, धार्मिक और सामाजिक रूप से प्रतिकूल थीं। दोनों समुदायों को कर, जमीन संबंधी दमन और धार्मिक हस्तक्षेप का सामना करना पड़ा। इस साझा अनुभव ने एकता की आधारशिला रखी। यह भी महत्वपूर्ण था कि बंगाल की आर्मी में विभिन्न जातियों से सम्बंधित हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मो के सैनिक थे। यह हिन्दू मुस्लिम एकता का आधार बना जो इससे पहले नहीं देखा गया था। जैसे हिन्दू और मुस्लिम सिपाही एक साथ मिल कर लड़े उसी तरह हिन्दू और मुस्लिम तालुकदार और राजा भी एकजुट हुए। सामान्य नागरिक, हिन्दू और मुस्लिम दोनों ने मिल कर बहादुरी के साथ अंग्रेजो के खिलाफ लड़े और अंग्रेजों के दमन का सामना लिया।
02 जुलाई 2026

" फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं है; यह यादों, प्रतिशोध, उम्मीदों और एक नया इतिहास लिखने का एक कभी न खत्म होने वाला नाटक है।"
सीपीआई (एम) के पूर्व सांसद और केंद्रीय कमेटी के सदस्य
18 जून 2026

दुनिया भर में बाल श्रमिकों का सबसे बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र (खेती-बाड़ी) में कार्यरत है। कुल बाल श्रमिकों में से लगभग 60 प्रतिशत बच्चे कृषि कार्यों से जुड़े हैं। इसके अलावा, सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) में लगभग 27 प्रतिशत और खनन (माइनिंग), निर्माण (कंस्ट्रक्शन) समेत अन्य उद्योगों में लगभग 13 प्रतिशत बच्चे काम करते हैं।
13 जून 2026

पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ?
नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू- काश्मीर, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में फैल गया था पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है । प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।
केशव कुमार भट्टड़ • 12 मई 2026

सीबीआई ने आरोपी की पहचान पीवी कुलकर्णी के रूप में की है। जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी न केवल रसायन शास्त्र (Chemistry) के प्रोफेसर थे, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'एनटीए' के एक प्रभावशाली अधिकारी भी थे। इसी पद पर रहने के कारण प्रश्नपत्रों तक उनकी आसान पहुंच थी।
केशव कुमार भट्टड़ • 15 मई 2026

पश्चिम बंगाल के रानीगंज से हाल ही में महापंडित राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति गायब कर दिए जाने पर प्रोफेसर जेता सांकृत्यायन की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आई है। जेता सांकृत्यायन अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे हैं। राहुल सांकृत्यायन और उनकी पत्नी डॉ. कमला सांकृत्यायन (जो स्वयं एक लेखिका और विद्वान थीं) के बेटे हैं। उन्होंने उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय (North Bengal University) और सिक्किम यूनिवर्सिटी (गंगटोक) में लंबे समय तक अर्थशास्त्र विभाग में अपनी सेवाएं दी हैं। प्रो. जेता सांकृत्यायन अपने पिता महापंडित राहुल सांकृत्यायन के साहित्यिक और ऐतिहासिक योगदान को संजोने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
केशव कुमार भट्टड़ • 17 जुलाई 2026
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