वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 | Tuesday, 13 October 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंश्रद्धांजलि

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

श्रद्धांजलि

नहीं रही कॉमरेड प्रीति गुहा मजुमदार

राजीव कुमार पाण्डेय•19 जून 20262 मिनट पठन43 बार पढ़ा गया

सहकारिता आंदोलन के माध्यम से लंबे समय तक निरंतर एक निडर समाचार पत्र प्रकाशित करने में उन्होंने उल्लेखनीय भूमिका निभाई थी।

पश्चिम बंगाल राज्य सहकारिता बैंक की पूर्व निदेशक प्रीति गुहा मजुमदार का वामपंथी श्रमिक-कर्मचारी, महिला और छात्र-युवा आंदोलनों से गहरा नाता था। उनके निधन से सत्ययुग प्रेस के कर्मचारी और सांध्य सत्ययुग' समाचार पत्र के पत्रकार गहरे शोक में हैं।

नहीं रही कॉमरेड प्रीति गुहा मजुमदार

कॉमरेड प्रीति गुहा मजुमदार नहीं रहीं

सांध्य 'सत्ययुग' अखबार की वरिष्ठ पत्रकार, सहकारिता और श्रमिक आंदोलन की नेता कॉमरेड प्रीति गुहा मजुमदार का निधन हो गया है। हाल ही में वह विभिन्न बीमारियों से पीड़ित थीं। वृहस्पतिवार सुबह बिधाननगर के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम साँस ली। उनकी आयु 69 वर्ष थी।

कॉमरेड प्रीति गुहा मजुमदार जीवनपर्यंत माकपा (सीपीआई-एम) कोलकाता जिला समिति के अंतर्गत 'संवाद-1' शाखा की पार्टी सदस्य थीं। उनके निधन पर पार्टी के कोलकाता जिला सचिव कलोल मजुमदार ने गहरा दुख व्यक्त किया है।

कॉमरेड प्रीति गुहा मजुमदार का जन्म 1957 में दमदम में हुआ था। छात्र जीवन से ही वह वामपंथी आंदोलन से जुड़ी हुई थीं। कलकत्ता विश्वविद्यालय से बांग्ला साहित्य में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की डिग्री प्राप्त करने के बाद, उन्होंने तत्कालीन दैनिक 'सत्ययुग' समाचार पत्र में पत्रकारिता शुरू की। अस्सी के दशक के मध्य से, वह 'सत्ययुग' सहित कलकत्ता के अन्य समाचार पत्रों के श्रमिक आंदोलनों में अग्रिम पंक्ति की योद्धा थीं। बाद में, उनके सह-नेतृत्व में 2 जुलाई 1987 को 'सत्ययुग एम्प्लॉइज को-ऑपरेटिव इंडस्ट्रियल सोसाइटी लिमिटेड' का गठन हुआ। इसके साथ ही वह समाचार पत्र कर्मचारी संघ और व्यापक स्तर पर सहकारिता आंदोलन के नेतृत्व में आईं।

1990 में उन्होंने सीपीआई (एम) की सदस्यता प्राप्त की। वर्ष 2001 में सांध्य 'सत्ययुग' समाचार पत्र की शुरुआत से ही वह इससे पूरी तरह जुड़ी हुई थीं। 'सत्ययुग 'प्रेस को देश के सबसे बड़े सहकारिता संस्थानों में से एक में बदलने में उनकी भी महत्वपूर्ण भूमिका थी। सहकारिता आंदोलन के माध्यम से लंबे समय तक निरंतर एक निडर समाचार पत्र प्रकाशित करने में उन्होंने उल्लेखनीय भूमिका निभाई थी।

पश्चिम बंगाल राज्य सहकारिता बैंक की पूर्व निदेशक प्रीति गुहा मजुमदार का वामपंथी श्रमिक-कर्मचारी, महिला और छात्र-युवा आंदोलनों से गहरा नाता था। उनके निधन से सत्ययुग प्रेस के कर्मचारी और सांध्य सत्ययुग' समाचार पत्र के पत्रकार गहरे शोक में हैं। उनके परिवार में उनके पति चित्त देवनाथ सांध्य ,'सत्ययुग' समाचार पत्र के संपादक और 'सत्ययुग शिल्प समबाय' के प्रबंध निदेशक , एक बेटी और दामाद हैं। कल बारानगर के रतनबाबू श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ।

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

नहीं रही कॉमरेड प्रीति गुहा मजुमदार

प्रकाशित: 19 जून 2026 • 2 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

361 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

358 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

338 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

333 क्लिक

5

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

330 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
साहित्य-संस्कृति

प्रश्नोपनिषद - 2: हूबनाथ

प्रश्न करना /

राजद्रोह /

आंदोलन करना /

देशद्रोह /

हक़ मांगना /

राष्ट्रद्रोह /

बना दिया ।

इन सबके बावजूद /

लोग डर नहीं रहे /

छोटे-छोटे बच्चे /

खिलाफत को /

उतारू हैं ।

16 सितंबर 2026

राज्य

गड़वेता-शालबनी के 7 पार्टी दफ्तरों में बीजेपी का उपद्रव, लेनिन की मूर्ति तोड़ी गई

मंगलवार दोपहर गड़वेता के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी।

16 सितंबर 2026

साहित्य-संस्कृति

माफीनामा: हूबनाथ

हम तो /

नारी शक्ति के समक्ष /

नतमस्तक हैं ।

हम सभी /

एक स्त्री से ही तो /

जनमे हैं ।

उसी के संरक्षण में /

हमारा स्वर्णिम /

बालपन बीता है ।

12 सितंबर 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
श्रद्धांजलि

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फिल्म निर्देशक और लेखक सत्यजीत राय ने महानायक उत्तम कुमार के आकस्मिक निधन (24 जुलाई 1980) पर आनंदबाज़ार पत्रिका में 26 जुलाई 1980 को एक बेहद भावुक और ऐतिहासिक आलेख लिखा था, जिसका बांग्ला शीर्षक था - "অস্তমিত নক্ষত্র" - 'अस्तमित नक्षत्र'। यह आलेख 24 जुलाई 2019 को 'अस्तमित उत्तम' (অস্তমিত উত্তম) के नाम से पुनः प्रकाशित हुआ। इस शीर्षक में बहुत ही सुंदर शब्दावली का खेल किया गया , जिसके दो समानांतर अर्थ निकलते हैं: उत्तम कुमार के नाम के संदर्भ में - यहाँ 'उत्तम' का सीधा अर्थ अभिनेता 'उत्तम कुमार' से है। यानी "उत्तम कुमार का अस्त हो जाना (निधन हो जाना)"। बांग्ला और हिन्दी दोनों में 'उत्तम' का गुणवाचक अर्थ 'सर्वश्रेष्ठ' या 'सबसे अच्छा' होता है। इसके अनुसार इस शीर्षक का भावार्थ है—"श्रेष्ठता का ढल जाना" या "एक स्वर्णिम युग का अंत"। अपने इस आलेख में महानायक के निधन के बाद उनकी अभिनय क्षमता का विश्लेषण किया था महान निर्देशक सत्यजीत राय ने। आनंदबाज़ार पत्रिका का आभार व्यक्त करते हुए उत्तम कुमार (03 नवंबर 1926- 24 जुलाई 1980) जन्मशती वर्ष में हिन्दी पाठकों के लिए प्रस्तुत है इस ऐतिहासिक आलेख का हिन्दी में भावानुवाद । भावानुवाद करते समय मूल लेख का भाव, विश्लेषण और महान निर्देशक सत्यजीत राय की भाषा की गंभीरता बनाए रखने की कोशिश की गई है। जन्मशती वर्ष में किवदंती महानायक का सादर स्मरण, श्रद्धांजलि ।

केशव कुमार भट्टड़ • 10 सितंबर 2026

श्रद्धांजलि

शहीद-ए-आज़म भगतसिंह: क्रांति, विचार और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के अमर नायक

28 सितंबर 2026 - शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती है। उनका प्रसिद्ध नारा ‘इंकलाब जिंदाबाद’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध आदमी होने की असली तमीज़ और चेतना का महाकाव्य है। यह वर्ष 'नौजवान भारत सभा' का शताब्दी वर्ष और 'शहीद यादगार समिति' का रजत जयंती वर्ष भी है। भगत सिंह की क्रांतिकारी आवाज़ केवल शोर नहीं थी, बल्कि उसके पीछे गहरा अध्ययन, सामाजिक न्याय और विश्व के महान विचारकों का वैचारिक आधार था। साम्राज्यवादी ब्रिटिश हुकूमत ने डरकर 23 मार्च 1931 को उन्हें फाँसी दे दी, लेकिन उनके विचार आज भी अमर हैं। ‘इंकलाब जिंदाबाद’ बाज़ारवाद, शोषण और अन्याय के खिलाफ आम आदमी की चेतना और बदलाव के लिए संघर्ष का प्रतीक है। आज के अवसरवादी राजनीतिक दौर में भगत सिंह के विचार एक न्यायपूर्ण भविष्य गढ़ने की प्रेरणा देते हैं और मशाल बनकर राह दिखाते हैं।

केशव कुमार भट्टड़ • 27 सितंबर 2026

श्रद्धांजलि

स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर राम सिंह: क्रांति, त्याग और संघर्ष का प्रेरणादायी जीवन

"ठाकुर राम सिंह - काले पानी की यातनाओं से लेकर जन-संघर्ष तक, आजादी और अधिकारों के लिए समर्पित रहा जिनका जीवन " - अजमेर में जन्मे महान क्रांतिकारी थे, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में 'डोगरा शूटिंग केस' के तहत काले पानी (अंडमान जेल) की कठोर सजा काटी। आजादी के बाद वे कम्युनिस्ट पार्टी और किसान सभा से जुड़कर आजीवन गरीबों व किसानों के अधिकारों के लिए संघर्षरत रहे। उन्होंने आगरा को अपनी कर्मभूमि बनाया और संजय प्लेस में ऐतिहासिक 'शहीद स्मारक' व पुस्तकालय का निर्माण कराया। सादगी पसंद ठाकुर साहब 98 वर्ष की आयु तक क्रांतिकारी विचारों और सामाजिक न्याय के प्रतीक बने रहे। आगरा का शहीद स्मारक, पुस्तकालय-वाचनालय, उनके द्वारा प्रकाशित स्मारिकाएं और उनसे जुड़े लोगों की स्मृतियां आज भी उनके संघर्ष की कहानी कहती हैं। यही उनकी सबसे बड़ी विरासत है। महान क्रांतिकारी ठाकुर राम सिंह को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।

नवाब उद्दीन • 16 सितंबर 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement