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'ब्रिक्स' की सीमा ~ स्वतंत्र फ़िलिस्तीन को समर्थन ~ इज़राइल पर चुप्पी

केशव कुमार भट्टड़•14 सितंबर 20264 मिनट पठन115 बार पढ़ा गया

फ़िलिस्तीन के हक़ में उठे बोल, मगर आक्रामक इज़राइल पर ब्रिक्स का रुख़ गोल!
ब्रिक्स के 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' में 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फ़िलिस्तीन राष्ट्र की स्थापना और गाजा में तुरंत युद्धविराम का समर्थन किया गया है। घोषणापत्र में मूल निवासियों के जबरन विस्थापन और गाजा के जनसांख्यिकीय स्वरूप को बदलने की कड़ी निंदा की गई है। हालांकि, गाजा में जारी हिंसा, वेस्ट बैंक पर अवैध कब्जे और मानवीय संकट के लिए जिम्मेदार इज़राइल का नाम लेने से सीधे तौर पर परहेज किया गया है। इस कारण फ़िलिस्तीन के अधिकारों की पैरोकारी के बावजूद, आक्रमणकारी की सीधी जवाबदेही तय करने के मामले में ब्रिक्स की सीमाएं उजागर होती हैं।

'ब्रिक्स' की सीमा ~ स्वतंत्र फ़िलिस्तीन को समर्थन ~ इज़राइल पर चुप्पी


~ 'ब्रिक्स' की सीमाएं ~
स्वाधीन फ़िलिस्तीन के पक्ष में ब्रिक्स की बुलंद आवाज, लेकिन... इजराइल का नाम लेने से परहेज़


नई दिल्ली, 13 सितंबर: ब्रिक्स (BRICS) समूह ने एक स्वतंत्र और संप्रभु फ़िलिस्तीन राज्य की स्थापना का ज़ोरदार समर्थन करते हुए साम्राज्यवादी व औपनिवेशिक नीतियों के खिलाफ अपना कड़ा रुख अपनाया है। 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' में गाजा में तुरंत युद्धविराम, निर्बाध मानवीय सहायता, मूल निवासियों के जबरन विस्थापन पर रोक और 1967 की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के आधार पर 'द्वि-राष्ट्र समाधान' (Two-State Solution) की मांग की गई है। हालांकि, गाजा में जारी नरसंहार, वेस्ट बैंक पर कब्जे और लगातार हो रहे हमलों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार इजराइल का नाम लेने से घोषणापत्र में परहेज किया गया है। फ़िलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार का जोरदार समर्थन करने के बावजूद, आक्रामकता और अवैध कब्जे की सीधी जवाबदेही तय न करना ब्रिक्स की कूटनीतिक सीमाओं को दर्शाता है।

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और अंतरराष्ट्रीय संधियों की अनदेखी

घोषणापत्र के अनुच्छेद 28 में पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने का आह्वान किया गया है। इसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के तहत निर्दोष नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की मांग की गई है, लेकिन किसी सैन्य आक्रामक देश का नाम दर्ज नहीं किया गया। इसी तरह, अनुच्छेद 29 में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा घेरे में आने वाले नागरिक परमाणु संयंत्रों और बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की गई है। अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की बात तो मानी गई है, पर हमलावर का उल्लेख नहीं है।

द्वि-राष्ट्र समाधान और 1967 की सीमाओं पर स्पष्ट रुख

गाजा संघर्ष के मुद्दे पर घोषणापत्र का रुख तुलनात्मक रूप से अधिक स्पष्ट रहा। ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लागू करने की मांग की। अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद जारी हिंसा पर असंतोष व्यक्त करते हुए स्थायी युद्धविराम और मानवीय मदद की गुहार लगाई गई। ब्रिक्स ने 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी येरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फ़िलिस्तीन के गठन की वकालत की। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र में फ़िलिस्तीन की पूर्ण सदस्यता और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में उसके अधिकारों का समर्थन किया गया।

जनसांख्यिकीय बदलाव और जबरन बेदखली का विरोध

घोषणापत्र के अनुच्छेद 32 में कब्जे वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों से मूल निवासियों के स्थायी या अस्थायी विस्थापन की तीव्र भर्त्सना की गई है। ब्रिक्स ने गाजा पट्टी के भौगोलिक या जनसांख्यिकीय (Demographic) स्वरूप को बदलने के किसी भी प्रयास को खारिज कर दिया। अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं के निर्देशों के तहत अवैध कब्जे को समाप्त करने और शांति प्रक्रिया में बाधा डालने वाले एकतरफा कदमों को रोकने की मांग की गई है।

भुखमरी को युद्ध का हथियार बनाने और मानवीय संकट पर चिंता

अनुच्छेद 33 में गाजा के भीषण मानवीय संकट पर ध्यान केंद्रित करते हुए अंतरराष्ट्रीय मानवीय और मानवाधिकार कानूनों के पालन पर जोर दिया गया है। युद्ध नीति के रूप में भुखमरी के इस्तेमाल, अस्पतालों व स्वास्थ्य सेवाओं के विनाश, तथा राहत कार्यों में बाधा डालने की कड़ी निंदा की गई है। ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) के जनादेश का समर्थन करते हुए फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों की सहायता जारी रखने की अपील की है।

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेशों का उल्लेख, फिर भी इजराइल पर चुप्पी

दक्षिण अफ्रीका द्वारा दायर याचिका पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के अंतरिम निर्देशों का हवाला देते हुए घोषणापत्र में कहा गया कि गाजा में मानवीय मदद सुनिश्चित करना इजराइल का कानूनी कर्तव्य है। हालांकि, इस पैराग्राफ में भी इजराइल का नाम प्रत्यक्ष रूप से लिखने से बचा गया। अंत में, अधिकृत येरुशलम की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति से छेड़छाड़ के प्रयासों को खारिज करते हुए सभी धर्मों के पवित्र स्थलों की पवित्रता बनाए रखने का आह्वान किया गया।


साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति। 14.09.2026

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'ब्रिक्स' की सीमा ~ स्वतंत्र फ़िलिस्तीन को समर्थन ~ इज़राइल पर चुप्पी

अपलोडर: VKA-FD9RRG • प्रकाशित: 14 सितंबर 2026 • 4 मिनट पठन

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