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सरकार पीछे हटी, हरियाणा में हड़ताली बिजली कर्मचारियों की बड़ी जीत

अपराजिता•24 अक्टूबर 20263 मिनट पठन2 बार पढ़ा गया
बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के एकजुट आंदोलन के दबाव में हरियाणा सरकार को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा है। गुरुग्राम और नूंह इलाकों में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड (Eleven Power Pvt. Ltd.) को दिए गए बिजली वितरण के समानांतर लाइसेंस (parallel license) के खिलाफ राज्यव्यापी दो दिवसीय ऐतिहासिक हड़ताल के कारण राज्य सरकार बिजली कानून की धारा 108 के तहत नीतिगत निर्देश जारी करने पर सहमत हो गई है।

सरकार पीछे हटी, हरियाणा में हड़ताली बिजली कर्मचारियों की बड़ी जीत

चंडीगढ़, अक्टूबर:

बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के एकजुट आंदोलन के दबाव में हरियाणा सरकार को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा है। गुरुग्राम और नूंह इलाकों में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड (Eleven Power Pvt. Ltd.) को दिए गए बिजली वितरण के समानांतर लाइसेंस (parallel license) के खिलाफ राज्यव्यापी दो दिवसीय ऐतिहासिक हड़ताल के कारण राज्य सरकार बिजली कानून की धारा 108 के तहत नीतिगत निर्देश जारी करने पर सहमत हो गई है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि राज्य में बिजली वितरण का कोई भी समानांतर लाइसेंस लागू नहीं होने दिया जाएगा। सरकार के इस आश्वासन के आधार पर हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मंच ने हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया है।

भारत के बिजली कर्मचारियों के संगठन इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (EEFI) ने इस ऐतिहासिक आंदोलन के लिए हरियाणा के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों को बधाई दी है। संगठन का कहना है कि सरकारी बिजली वितरण प्रणाली को कमजोर करके निजी कंपनियों के मुनाफे का रास्ता साफ करने की कोशिश के खिलाफ कर्मचारियों की एकजुट लड़ाई और आम जनता की एकजुटता ने ही सरकार को यह फैसला लेने पर मजबूर किया है।

गत 21 अक्टूबर की रात 10 बजे से हड़ताल शुरू हुई थी। 22 और 23 अक्टूबर को भी कर्मचारियों ने पूरी ताकत से आंदोलन जारी रखा। राज्यभर के लगभग 40 हजार से 55 हजार बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने इस हड़ताल में भाग लिया। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और बिजली पारेषण (ट्रांसमिशन) निगम में हड़ताल का असर लगभग व्यापक रहा।

लंबे समय तक बिजली न रहने से आम जनता का दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। घरों, जल आपूर्ति प्रणाली, सरकारी और निजी कार्यालयों तथा औद्योगिक क्षेत्रों में भारी समस्याएं उत्पन्न हुईं। कई इलाकों में निवासियों को घंटों बिना बिजली के रहना पड़ा। इसके बावजूद आंदोलन की मांगों का समर्थन करते हुए आम जनता उनके साथ खड़ी रही। किसान संगठनों, मजदूर संगठनों और बिजली उपभोक्ताओं ने भी हड़ताल के प्रति अपना समर्थन जताया। दूसरी ओर, आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने अस्पतालों जैसी आपातकालीन सेवाओं में बिजली आपूर्ति बनाए रखने की व्यवस्था की।

EEFI के अनुसार, हड़ताल की व्यापकता और आम जनता के सक्रिय समर्थन ने इस आंदोलन को सही मायनों में एक जन-आंदोलन में बदल दिया। बिजली कर्मचारियों के इस एकजुट प्रतिरोध ने साबित कर दिया है कि सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था को निजी मुनाफे के स्वार्थ में कमजोर करने की कोशिश को कर्मचारी और आम जनता बर्दाश्त नहीं करेंगे।

सरकार द्वारा नीतिगत निर्देश जारी करने की सहमति और मुख्यमंत्री की सार्वजनिक घोषणा को EEFI ने आंदोलन की एक महत्वपूर्ण जीत बताया है। हालांकि, संगठन केवल मौखिक आश्वासन से संतुष्ट होने को तैयार नहीं है। उन्होंने बिजली कानून की धारा 108 के तहत तत्काल लिखित निर्देश जारी करने की मांग की है। इसके साथ ही, बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal for Electricity) में लंबित मामले में उस निर्देश को दर्ज करने और इलेवन पावर को दिए गए लाइसेंस को लागू करने के लिए कोई कदम न उठाया जाना सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

EEFI ने कहा है कि समानांतर लाइसेंस के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। जब तक लिखित निर्देश जारी नहीं हो जाता, न्यायाधिकरण में अपील का उचित निपटारा नहीं हो जाता और लाइसेंस निष्प्रभावी नहीं हो जाता, तब तक आंदोलन पर सतर्क निगरानी रखनी होगी। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए प्रत्येक बिजली कर्मचारी, इंजीनियर, किसान, मजदूर और आम नागरिक को बधाई दी गई है।

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साभार:बांग्ला दैनिक गणशक्ति

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सरकार पीछे हटी, हरियाणा में हड़ताली बिजली कर्मचारियों की बड़ी जीत

प्रकाशित: 24 अक्टूबर 2026 • 3 मिनट पठन

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