"क़ानून का राज ख़त्म,लोकतंत्र पर वार;सहारनपुर मस्जिद गिराए जाने पर वामपंथियों का तीखा प्रहार!"
1911 में निर्मित ऐतिहासिक मस्जिद को रातोंरात गिराए जाने के विरोध में चार वामपंथी दलों (माकपा, भाकपा, भाकपा-माले और फॉरवर्ड ब्लॉक) ने उत्तर प्रदेश के दो दर्जन से अधिक जिलों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर वाम नेताओं ने इसे संवैधानिक अधिकारों का हनन और राज्य को ‘ऑर्वेलियन डिस्टोपिया’ ("खौफनाक और दमनकारी शासन") बनाने की साज़िश करार दिया। प्रदर्शनकारियों ने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशों पर रोक लगाने, दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई करने और ध्वस्त मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग की है।
सहारनपुर में मस्जिद गिराने के खिलाफ
वामपंथी दलों ने पूरे उत्तर प्रदेश में उठाई जोरदार आवाज
किया संयुक्त विरोध प्रदर्शन
लखनऊ, 15 सितंबर। सहारनपुर में एक सदी से भी अधिक पुरानी मस्जिद को रातोंरात ध्वस्त किए जाने के खिलाफ राज्य भर में जनाक्रोश देखने को मिला। उत्तर प्रदेश में कानून के शासन को कमजोर करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए चार प्रमुख वामपंथी दलों के आह्वान पर मंगलवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों में व्यापक विरोध प्रदर्शन किए गए। प्रदर्शन के उपरांत जिला प्रशासन के जरिए राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर ध्वस्त मस्जिद के अविलंब पुनर्निर्माण और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई।
चार प्रमुख दलों का संयुक्त आह्वान और विरोध कार्यक्रम
यह प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन 10 सितंबर को आयोजित भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन तथा ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक की संयुक्त बैठक में लिए गए निर्णय के तहत किया गया था। चारों वाम दलों ने एकजुट होकर उत्तर प्रदेश में बढ़ती प्रशासनिक मनमानी और दमनकारी नीतियों पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया।
रातोंरात मस्जिद ध्वस्त करने पर उठाए कानूनी सवाल
राज्यपाल को भेजे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि सहारनपुर में वर्ष 1911 में बनी मस्जिद—जिसके 113 वर्ष पुराने प्रामाणिक दस्तावेज मौजूद हैं—को नगर मजिस्ट्रेट के आदेश पर अचानक रातोंरात गिरा दिया गया। इस कार्रवाई के लिए सप्ताहांत (वीकेंड) का समय चुना गया, ताकि प्रभावित पक्ष को उच्च न्यायालय से स्टे लेने का उचित अवसर न मिल सके। वामपंथी नेताओं ने इसे न्याय की मूल अवधारणा और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया।

‘ऑर्वेलियन डिस्टोपिया’ बनता उत्तर प्रदेश: कानून के शासन पर गहराता संकट
ज्ञापन में राज्य में लगातार कमजोर होते 'कानून के राज' पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। विपक्षी नेताओं और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ दमनकारी कदम उठाने तथा उन्हें अवैध रूप से नजरबंद करने की घटनाओं का हवाला देते हुए वामपंथी दलों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला जा रहा है। ज्ञापन में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया गया, जिसमें राज्य को साजिशन ‘ऑर्वेलियन डिस्टोपिया’ (खौफनाक भय और सख्त नियंत्रण पर आधारित राज्य) जैसी स्थिति में ढकेलने के प्रयासों का जिक्र है।
सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की साजिश और सौहार्द की अपील
वामपंथी दलों के अनुसार, सहारनपुर की यह घटना समाज में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण तेज करने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। 10 सितंबर की बैठक का संदर्भ देते हुए नेताओं ने कहा कि सत्ता के संरक्षण में सांप्रदायिक ताकतें समाज को बांटना चाहती हैं, जबकि आम जनता अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान और आपसी भाईचारे के साथ शांतिपूर्ण जीवन चाहती है। उन्होंने संविधान और कानून के शासन की रक्षा के लिए सभी लोकतांत्रिक व विपक्षी ताकतों को एक मंच पर आने का आह्वान किया।

राज्यपाल से पुनर्निर्माण और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
राज्यपाल से प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रखे गए:
उत्तर प्रदेश में कानून का शासन और संवैधानिक व्यवस्था बहाल की जाए।
सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण में शामिल जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों और राजनीतिक चेहरों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई हो।
ध्वस्त मस्जिद को सरकारी खर्च पर फिर-से बनाया जाए तथा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी को पूर्ण न्याय दिया जाए।

प्रदेश के दो दर्जन जिलों में दिखा व्यापक असर
वामपंथी दलों के इस संयुक्त आह्वान का असर पूरे उत्तर प्रदेश में देखने को मिला। राज्य के भदोही, मुरादाबाद, बरेली, प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, कुशीनगर, आगरा, जौनपुर, मऊ, सोनभद्र, सुल्तानपुर, गोंडा, एटा, देवरिया, बुलंदशहर, इटावा, मथुरा, अलीगढ़, कानपुर, जालौन और बहराइच समेत कई प्रमुख जिलों में वाम कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे।
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