सात दशकों से देश के वैज्ञानिकों और तकनीशियनों के अथक परिश्रम से निर्मित अंतरिक्ष अनुसंधान के बुनियादी ढांचे को इस तरह निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने की योजना बनाई जा रही है। 2023 की भारतीय अंतरिक्ष नीति के माध्यम से पूरे अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी पहल के लिए खोलने और विदेशी निवेश के मामलों में विभिन्न छूट देकर इसी रास्ते को सुगम बनाया गया है। प्रक्षेपण लागत कम करने का तर्क देकर इस नीति को लागू किया जा रहा है।
इसरो के गैर-सरकारीकरण करने को तुरंत रोकना होगा
पोलिट ब्यूरो की माँग
नई दिल्ली,
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के गैर सरकारीकरण के प्रयासों का सी पी आई [ एम] ने कड़ा विरोध किया है। पार्टी ने इस प्रक्रिया को तुरंत बंद करने की मांग की है।
सोमवार को जारी एक बयान में इस मांग का जिक्र करते हुए माकपा पोलिट ब्यूरो ने कहा कि देश की रक्षा, कृषि, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान और सुदूर संवेदन (रिमोट सेंसिंग) प्रणालियों में इसरो का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से सीधे जुड़े ऐसे रणनीतिक और आत्मनिर्भर संस्थान को निजी हाथों में सौंपने से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय क्षेत्रों में निजी कंपनियों पर अवांछित निर्भरता पैदा होगी।

सीपीआई (एम)ने आरोप लगाया है कि इन-स्पेस के अध्यक्ष पवन गोयनका की इस टिप्पणी ने—कि इसरो अब प्रक्षेपण यान (लॉन्च व्हीकल) का निर्माण नहीं करेगा—योजना के उस पहलू को उजागर किया है जो बेहद चिंताजनक है। सात दशकों से देश के वैज्ञानिकों और तकनीशियनों के अथक परिश्रम से निर्मित अंतरिक्ष अनुसंधान के बुनियादी ढांचे को इस तरह निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने की योजना बनाई जा रही है। 2023 की भारतीय अंतरिक्ष नीति के माध्यम से पूरे अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी पहल के लिए खोलने और विदेशी निवेश के मामलों में विभिन्न छूट देकर इसी रास्ते को सुगम बनाया गया है। प्रक्षेपण लागत कम करने का तर्क देकर इस नीति को लागू किया जा रहा है।
बयान में कहा गया है कि मार्च 2026 में प्रस्तुत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पर्यावरण संबंधी संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट में भी बिना किसी पारदर्शिता और जवाबदेही के सरकारी संपत्तियों को निजी कंपनियों को सौंपे जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई थी।
वहीं, इसरो के कर्मचारी संघों के संयुक्त मंच द्वारा इसरो प्रमुख को लिखे गए पत्र में जताई गई चिंता के जवाब में इसरो द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण में भी इस नीति का समर्थन करने का प्रयास किया गया है। लेकिन इससे राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे में पड़ने की मुख्य आशंका का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया है।
सीपीआई (एम)ने देश के रणनीतिक हितों की रक्षा करने और इसरो को और मजबूत करने की मांग को लेकर आंदोलनरत वैज्ञानिकों, तकनीशियनों और कर्मचारियों के साथ खड़े रहने की बात कही है। इसके साथ ही पार्टी ने इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संस्थान को निजी हाथों में सौंपने के सभी प्रयासों का विरोध किया है।
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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति
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